व्यंग्य लेख – आजादी मिली थी, गुलामी हमने खुद चुन ली
कमाल की आज़ादी है हमारी! अंग्रेज़ों को भगाने के बाद हमने गुलामी के इतने नए दरवाज़े खोल लिए कि अब
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Read Moreकभी मौका मिले तो चुगली करके देखिए कितना सकून मिलता है। हृदय तरोताजा हो जाता है जैसे-अभी अनार का जूस
Read Moreअगर आप लेखक हैं और आपको पड़ोसी तक नहीं जानता है कि आप लेखक हैं तो बहुत दुख की बात
Read Moreहमारे एक मित्र कार का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने गए, सामने लंबी कतार देख घबरा कर लौट आए।बोले, अरे भाई बहुत
Read Moreसर्वत्र व्याप्त मोबाईल और उसका रोना है। यह एक ऐसा है यंत्र, जिसने कर दिया इंसान को मुग्धमंत्र? ठेठ हिंदी
Read Moreआनलाइन मिलने वाली साड़ी की तस्वीर देखकर हरिमोहन की पत्नी का हृदय गदगद हो गया। मन मयूर हो उठा। कितनी
Read Moreसाहित्य हमारा अंधेरे में है। आज के साहित्यकारों को पता नहीं है साहित्य का कौन सा वाद या युग चल
Read Moreमैं नवजुगाड़वाद का लेखक हूँ । ठंडा दूध भी फूंक-फूंककर पीता हूँ। उदार हृदय होने के कारण सरकार की बुराई
Read Moreराम नाम की लूट है, लूट सके तो लूटअंतकाल पछताएगा, जब प्राण जाएँगे छूट।मौका है नेता जी आप भी वैतरणी
Read Moreएक कवि की प्रेमिका ने कवि से कहा कि तुम दूसरे की सुंदरता पर खूब तारीफ लिखते हो। कभी मेरी
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