प्रतीक

नदी के किनारे की रेतीली स्लेट पर
अब भी तुम्हारे मन के लहरों की उंगलियाँ
कुछ लिख रही होंगी
हिचकोले खाते तिनकों से
तुम कह रही होगी
रुक जाओ पढ़ तो लो
मंदिर की सीढियों की झिलमिलाती परछाईयाँ
तुम्हारे और करीब आ गयी होंगी
धूल धूसरित पीपल की पत्तियाँ
कहती होंगी मेरी हथेली पर भी
रच दो प्रेम का अनूठा रंग
तुम्हे छूकर लौटती हुई सी पगडंडी पर
दूर तक कोई नहीं होगा
सिवा मौन के ..खामोशी के ..
और मेरे पदचिन्हों के ..
तुमसे बिछड़ने और फिर मिलने के मध्य का
यह दर्द से परिपूर्ण अंतराल
ही तो हम दोनों के जीवित होने का प्रतीक है
kishor kumar khorendra 

परिचय - किशोर कुमार खोरेंद्र

परिचय - किशोर कुमार खोरेन्द्र जन्म तारीख -०७-१०-१९५४ शिक्षा - बी ए व्यवसाय - भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत एक अधिकारी रूचि- भ्रमण करना ,दोस्त बनाना , काव्य लेखन उपलब्धियाँ - बालार्क नामक कविता संग्रह का सह संपादन और विभिन्न काव्य संकलन की पुस्तकों में कविताओं को शामिल किया गया है add - t-58 sect- 01 extn awanti vihar RAIPUR ,C.G.