कविता

कविता : ज़िन्दगी

ज़िन्दगी गर सहज ही चलती जाती तो क्या बात थी
जैसा हम चाहते वैसा ही होता रहता तो क्या बात थी
पर ज़िन्दगी तो सुख दुख का मिश्रण है यह कहां एक सी थी
कभी राहें खुशियों की कहीं गम की लम्बी दास्तां थी
इक पहेली सी लगती कभी लगती हसीं सी
कहीं खौफ के साए मे जीती कहीं बेखौफ तूफानो से लड़ती यह ज़िन्दगी |||

कामनी गुप्ता जम्मू

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |

One thought on “कविता : ज़िन्दगी

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत खूब !

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