कविता पद्य साहित्य

तुम….

कहाँ रह रही हो तुम मुझे अकेला छोड़कर
दुनिया की महफिल में मुझे तन्हा छोड़कर
मुसाफिरों की तरह यहाँ चक्कर काटता हूँ
मना लेता मन को,आने की आहट सुनकर

रह जाता है मेरा दिल देखने को मचलकर
झलक न दिखे तो रह जाता है मन तरसकर
अगर तुम आखों से ओझल हो जाती हो तो,
हृदय के अन्दर रह जाता है दिल तड़पकर

अगर सृजन कर जाती प्रेम-प्रस्फुटित कर
सृजन-सृजित मधुर-मिलन संगीनी बनकर
हर लो मन की तपन फूलों से सुसज्जित कर
इतना ध्यानकर मुझमें प्रेम की धारा बहाकर
@रमेश कुमार सिंह
**************

परिचय - रमेश कुमार सिंह 'रुद्र'

रमेश कुमार सिंह (हिंदी शिक्षक ) विद्यालय --उच्च माध्यमिक विद्यालय ,रामगढ़ ,चेनारी रोहतास जन्म तारीख --०५/०२/१९८५ शिक्षा --एम.ए. (हिन्दी,अर्थशास्त्र),बी.एड. हिंदी पता--कान्हपुर ,पोस्ट-कर्मनाशा ,जिला --कैमूर (बिहार)८२११०५ मोब.९५७२२८९४१०/९४७३००००८०/९९५५९९९०९८ Email - rameshpunam76@gmail.com प्राप्त सम्मान - भारत के विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से अब तक 70 सम्मान प्राप्त।

2 thoughts on “तुम….

Leave a Reply