कविता पद्य साहित्य

जुदाई

ये कैसी जुदाई दिया तुने मेरा हाल बुरा हो गया।
फटी सी जिन्दगी में मेरा दिल तड़पता रह गया।
तेरे इस तनहाई के दर्द से मैं गुजरता चला गया।
अब तक आशु तो बह रहे थे दिल रोता रह गया।
आँखों के खुलने पर तुम्हे याद करता रह गया।
आँखों के बन्द होने पर ख्वाब देखता रह गया।
याद और ख्वाब में अपना संसार देखता रह गया।
“प्रिये” तुम्हारी याद में मैं सफर काटता रह गया ।
@रमेश कुमार सिंह /३१-०५-२०१५

परिचय - रमेश कुमार सिंह 'रुद्र'

रमेश कुमार सिंह (हिंदी शिक्षक ) विद्यालय --उच्च माध्यमिक विद्यालय ,रामगढ़ ,चेनारी रोहतास जन्म तारीख --०५/०२/१९८५ शिक्षा --एम.ए. (हिन्दी,अर्थशास्त्र),बी.एड. हिंदी पता--कान्हपुर ,पोस्ट-कर्मनाशा ,जिला --कैमूर (बिहार)८२११०५ मोब.९५७२२८९४१०/९४७३००००८०/९९५५९९९०९८ Email - rameshpunam76@gmail.com प्राप्त सम्मान - भारत के विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से अब तक 70 सम्मान प्राप्त।

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