गीत/नवगीत

बसंती मन भाया

गीत

रंग बहुत-से देखे, बसंती मन भाया
रंगों का सरताज, बसंती मन भाया-

रंग बसंती भगतसिंह का, मन को बहुत ही भाया
बलि चढ़ा दी अपने तन की, ज्यों ही मौका आया बसंती मन भाया-

वीर हकीकत ने भी पहना, रंग बसंती बाना
मात्तृभूमि की बलिवेदी पर, हंसते-हंसते जाना बसंती मन भाया-

वीर शहीदों ने भी पहना, चटक बसंती चोला
जोश देखकर उन वीरों का, शत्रु का मन डोला बसंती मन भाया-

इसी रंग से रंगा हुआ है, ऋतुओं का यह मेला
चारों ओर हैं फूल बसंती, बड़ी सुहानी वेला बसंती मन भाया-

आओ हम भी रंग दें तन-मन, इसी रंग से अपना
देशप्रेम के रंग के आगे, भाए कोई रंग ना बसंती मन भाया-

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

8 thoughts on “बसंती मन भाया

    1. प्रिय गुरमैल भाई जी, आपका आशीर्वाद बना रहे.

  1. वाहह लाजवाब अनुपम सृजन के लिए बधाई बहन जी सादर प्रणाम

    1. प्रिय राजकिशोर भाई जी, प्रोत्साहन के शुक्रिया.

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