जनसुविधा व बदलाव लाने वाला रेल बजट

रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने वर्ष 2016-17 रेल बजट पेश कर दिया है। वार्षिक उत्सव के रूप में हर बार की तरह इस बार भी सभी विपक्षी दलों ने रेल बजट की आलोचना करते हुए निराशा व्यक्त की हैं लेकिन आश्चर्यजनक रूप से ओडीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने रेल बजट की सराहना करते हुए तथा ओडीशा राज्य की सभी बड़ी मांगों को माने जाने के कारण रेल मंत्री सुरेश प्रभु को धन्यवाद दिया है। कई उद्योगपतियों ने भी रेल बजट की सराहना को ती है लेकिन रेल बजट पेश होने के बाद शेयर बाजार में गिरावट के आधार पर मीडिया के कुछ हलकों में भी भारी निराशा व्यक्त की गयी है। जबकि वास्तव में सुरेश प्रभु का रेल बजट सराहनीय व स्वागत योग्य है। वर्ष 2016-17 के रेल बजट को जनसुविधाओं वाला बजट बनाया गया है। यह बजट देश का बजट लग रह है। विगत 35 वर्षो से जो बजट पर बन रहे थे वह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित रहे थे।

इन 35 वर्षो में देश की गठबंधन सरकारों ने रेलवे का बखूबी राजनैतिक दोहन किया है। ममता बनर्जी ने मनमोहन सिंह सरकार में अपने रेलमंत्री का क्या हाल किया था यह बात आज भी पूरे देश को याद है। पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव आज रेल बजट को बहुत हल्का बता रहे हैं और नीतिश कुमार तो दावा कर रहे हैं कि तेल के दाम होने के कारण रेल किराया कम होना चाहिये था। जबकि आज हालात यह हैं कि इन रेल मंत्रियों के शासनकाल में जो योजनायें घोषित की गयी थीं वह आज भी धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं जिसके उन योजनाओं की लागत में भी काफी वृद्धि हो गयी है। आज इन्हीं राजनीति करने वाले रेल मंत्रियों के कारण ही रेलवे का बुरा हाल है और अब यही लोग मोदी सरकार के बजट की आलोचना कर रहे है। यह तो देशहित की भावना है कि मोदी सरकार का रेल मंत्रालय पहले से लम्बित पड़ी विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में जुटा है।

सबसे अधिक सुखद बात यह है कि हर बार की तरह इस बजट में भी बिहार और बंगाल को ही राजनैतिक खुराक नहीं बांटी गयी है यही कारण है कि नीतिश कुमार और लालू यादव निराश होकर बजट की नकली हवा निकालने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि यह बजट वास्तव में एक अच्छा बजट है। बजट में रेल मंत्री ने कोई बड़ी-बड़ी बातें नहीं कही है। बजट में जनसुविधाओं में वृद्धि करने का प्रयास किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, छात्रों, रेलकर्मियों सहित सभी को सौगातें देने का प्रयास किया है। अब देखना यह है कि उनकी ये कितनी घोषणायें आगामी लोकसभा चुनावों तक पूरी हो जायेंगी और रेलवे में बदलाव की बयार बहती हुई दिखायी पड़ेगी। पहली बार किसी रेलमंत्री ने वर्ष 2020 तक 95 प्रतिशत रेलों को समय पर चलाने का वादा बजट प्रावधानों में किया है। बजट के माध्यम से रेलवे का डिजिटलाइजेशन करने का अद्भुत प्रयास किया गया है।

यह रेलवे बजट पहली बार सोशल मीडिया से जनता का इनपुट लेकर तैयार किया गया है।बताया जा रहा है कि लगभग डेढ़ लाख लोगों ने रेल मंत्री ने बजट प्रावधानों पर अपने सुझाव दिये थे जिसमें से कुछ को समाहित कर लिया गया है। इस बजट में राजनीति नहीं की गयी है यही कारण है कि यह बजट राजनैतिक आलोचना का शिकार हो रहा है अगर राजनीति होती भी तो और आलोचना होती। आज रेलमंत्री सुरेश प्रभु और पीएम नरेंद्र मोदी के विजन के कारण ही रेलवे में भी मेक इन इंडिया का प्रभाव जल्द ही दिखलायी पड़ने वाला है और रेलवे के विकास को गति देने के लिए जापान सहित विश्व के कई देशों से समझाते हो रहे हैं तथा होने जा रहे हैं। रेल मंत्री सुरेश प्रभु देश के पहले ऐसे रेल मंत्री बन गये हैं जिन्होंने सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग किया है और रेल अधिकारियों को भी ट्विटर आदि पर सक्रिय करके जनता की सेवा करने के लिए एसी कमरों से बाहर निकालने का सफल प्रयास किया है। आज रेल मंत्री के ट्विटर एकाउंट पर किसी समस्या के जाने पर उसका उचित समाधान निकल रहा है जिसके कारण रेल मंत्री की लोकप्रियता बढ़ रही है।

रेल बजट की सबसे बड़ी बात यह है कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने वैश्विक आर्थिक मंदी और वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद भी रेल किराया व मालभाड़ा नहीं बढ़ाया है। मंत्री महोदय ने जमकर आम आदमी के लिए सुविधाओं का पिटारा खोल दिया है। रेल बजट में रेल मंत्री ने सौर ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ाने का ऐलान किया है। रेल बजट में यह भी प्रयास किया जा रहा है कि रेलवे को पेपरलेस कर दिया जाये और हर चीज मोबाइल फोन पर उपलब्ध हो सारी जानकारी एसएमएस के माध्यम से जनता को हो। रेल मंत्री ने अपने बजट भाषण के माध्यम से नये मार्गो का विद्युतीकरण करेन और बायो टायॅलेट बनाने सहित प्रतिदिन सात किमी तक रेल लाइनों को बिछाने का भी साहसिक निर्णय लिया है जो स्वागत योग्य है। वास्तव आज की तारीख मं जो लोग रेल बजट की आलोचना कर रहे हैं उनके पास आलोचना का कोई विशेष तर्क या आधार नहीं रह गया है तथा भविष्य में इन लोगों के रेल मंत्री बनने की संभावनायें भी समाप्त होती नजर आ रही हैं। जिसके कारया यभी पूर्व रेल मंत्री निराशावादी होकर निराशावाद को फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। अब रेलवे एक नये युग में प्रवेश कर रहा है। देश की जनता को हमसफर, तेजस और उदय जैसी रेलें मिलने जा रही है।यह रेल बजट मीनी हकीकत की झलक भी प्रस्तुत कर रहा है। जब रेल मंत्री सुरेश प्रभु आस्था सर्किट का ऐलान कर रहे थे उस समय कांग्रेसी सांसदों ने संसद में अचानक से उठकर विरोध किया था और मानसिक विकृति का प्रस्तुतीकरण ।

रेलवे में तो बहुत सी परियोजनाओं का काम पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के जमाने से भी अधूरा है उनकी फाइलें भी निकालकर खोली जा रही हैं तथा यथासंभव उनको पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है यदि रेलवे की पुरानी पड़ी कई परियोजनायें इन पांच वर्षों में पूरी हो जाती हैं तो रेलवे में काफी सुधार और व्यापक बदलाव आ जायेगा।

एक प्रकार से मोदी सरकार ने रेलवे से राजनीति का सिग्नल हटा दिया है और राज्यनीति का सिग्नल लागू कर दिया है। रेलनीति अब केंद्र व राज्य सरकार के सहयोग से चलेंगी। अब बिहार, कोलकाता का एकतरफा वर्चस्व टूट चुका है। बजट में रेलवे के पूरी तरह से कायापलट की तस्वीर साफ दिखलायी पड़ रही है। काफी समय के बाद रेलवे सत्ताधारी दल के पस आया है वह भी तब जब उसे पूर्ण बहुमत प्राप्त है और उसके पास बेहद मजबूत नेतृत्व भी है। बजट में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण कड़ी यह है कि रेलवे के विस्तार, लोगों को रोजगार और सुविधा देने में सक्रिय भूमिका रहेगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बजट में पूर्वोत्तर राज्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है। मिजोरम और मणिपुर बहुत जल्द ब्राडगेज रेलवे नेटवर्क से जुड जायेंगे। राजनैतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण उ.प्र. के रेल बजट में 13 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गयी है। विशेषज्ञों ने रेल बजट की आलोचना और प्रशंसा दोनों की है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने सभी को कुछ न कुछ देने का प्रयास किया है। अब यह तो आने वाला समय ही बतायेगा कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु रेलवे को कितना बदल सकने में सफल रहे। रेलवे के पास चुनौतियां बहुत है। लेकिन मंत्री महोदय का साफ कहना था कि वे न रूके हैं और न ही रूकेंगे। उन्होंने बजट भाषण के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी और कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता भी पढ़कर सुनायी। शायद कम से कम रेलवे के अच्छे दिन आ जायें प्रभु कृपा से ।

मृत्युंजय दीक्षित