गीतिका/ग़ज़ल

मैंने भी कुछ टूटे से घर देखे हैं,

मैंने भी कुछ टूटे से घर देखे हैं,
उड़ने वालो के कतरे पर देखे हैं.||

डस जाते हैं वो धीरे धीरे यारो,
आस्तीन में रहते विषधर देखे हैं.||

सारी दुनिया को तो धमकाते हैं वो
उनके मन में पर हमने डर देखे है||

महलों में रहते थे शानों शौकत से
आज वही सड़कों पर बेघर देखे है||

इसे हया की हद कहते दुनिया वाले,
अपना बुत वो जब छुप छुपकर देखे है||
“दिनेश “

दिनेश दवे

नाम : दिनेश दवे पिता का नाम :श्री बालकृष्ण दवे शैक्षणिक योग्यता : बी . ई . मैकेनिकल ,एम .बी.ए. लेखन : विगत चार पांच वर्ष से , साँझा प्रकाशन पता : दिनेश दवे , केमिकल स्टाफ कॉलोनी ,बिरलाग्राम, नागदा जिला उज्जैन ..456331..मध्य प्रदेश

One thought on “मैंने भी कुछ टूटे से घर देखे हैं,

  • विभा रानी श्रीवास्तव

    दुन्या वाले
    या
    दुनिया वाले ?

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