Monthly Archives: November 2016

  • क्षणिका

    क्षणिका

    साँपों की कूँज में आँखो की मूँद में पत्तों मे से गुजरती हूँ बनकर हवा खिड़की तो खोलो मेरा नाम तो बोलो छुपी नही कही मै वहॉ भी हूँ..!! — रितु शर्मा


  • तेरे बिना

    तेरे बिना

    सोचा न था… जी पायेंगे… तेरे बिना मैं भी जी रही हूँ , रिश्ते निभा रही हूँ इस जिन्दगी के संग, आगे बढ़ती जा रही हूँ ! कमी नहीं है कोई, यूँ जिन्दगी में मुझको पर...

  • गीत : विपक्षी चाल है

    गीत : विपक्षी चाल है

    देश की दशा को देख मन मेरा बेहाल हैं। बार बार मन मेरा ये कर रहा सवाल है। किसको है आजादी मिली, कौन खुशहाल है। नेता हैं विधाता बना, जनता फटे हाल है। और, कह रहे...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बहुत मनाया, वो न माने, चले गये । तोड़ के सारे ताने बाने चले गये । दादी  के किस्सों मे सच्चे लगते थे, बचपन के वो राजघराने चले गये । जात, पाँत, धन, दौलत, शोहरत, का अन्तर, बचपन के सब मीत  पुराने  चले गये । जिनके खातिर खोले दिल के दरवाजे वो  स्वप्नों  के महल ढहाने चले गये ।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    नहीं    गर  तेरे  स्तर  का   हूँ   । बतला दो, तो फिर मैं क्या हूँ ?, तुम विद्युत क्रत्रिम प्रकाश हो मैं  पूनम  की  चन्द्र  प्रभा  हूँ   । तुम महलों का  राजरोग  हो मैं फुटपाथ की...




  • अधिकार

    अधिकार

    रोज़ की तरह आज भी अलीशा ने सुबह की चाय बनाई । रोज़ ही तरह उसने खाना बनाया और राकेश ऑफिस चला गया । आज उसका मन नहीं लग रहा था ऑफिस में । घर में...