किसी रूप में भगवन मिलते

किसी रूप में भगवन मिलते, रखना हर पल ध्यान
करना मत अपमान किसी का, देना सबको मान
भव से तर जाओगे, भव से तर पाओगे- भव से तर जाओगे, भव से तर पाओगे-

 
1.कभी हरि भिक्षुक के रूप में भिक्षा लेने आते
सच पूछो तो इसी तरह वो देना हमें सिखाते
इसी रूप में मिल सकते वो रखना हर पल ध्यान
करना मत अपमान किसी का देना सबको मान भव से तर जाओगे, भव से तर पाओगे-

 
2.कभी हरि निर्धन के रूप में कपड़े लेने आते
सच पूछो तो प्रभु किसी का तन ढकना सिखलाते
इसी रूप में मिल सकते वो रखना हर पल ध्यान
करना मत अपमान किसी का देना सबको मान भव से तर जाओगे, भव से तर पाओगे-

 
3.कभी-कभी किसी मित्र रूप में भगवन पास हैं आते
सच पूछो तो प्रेम से रहना हरि हमें सिखलाते
इसी रूप में मिल सकते वो रखना हर पल ध्यान
करना मत अपमान किसी का देना सबको मान भव से तर जाओगे, भव से तर पाओगे-

 
4.कभी-कभी हरि श्वान रूप में भोजन लेने आते
सच पूछो तो कृपा करके दरश हमें दिखलाते
इसी रूप में मिल सकते वो रखना हर पल ध्यान
करना मत अपमान किसी का देना सबको मान भव से तर जाओगे, भव से तर पाओगे-

 

(तर्ज़-विनय सुनो हे स्वामी सबका जीवनधन सरसाओ———————-)

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।