मेरे खिलौने !

मिंटू जैसे ही सुबह उठा ममी ने सिर पर हाथ फेर कर कहा आज तुम्हारी बुआ जी और सन्नी आ रहे हैं, मिंटू बहुत खुश हो गया। जल्दी जल्दी नहा धौ लिया और ममी से बार बार पूछने लगा कि कब आएंगे विमी बुआ सन्नी भी नहीं आ रहा कब हम खेलेंगे। ममी जानती थी मिंटू जितना अभी सन्नी का इंतज़ार कर रहा है जब वो आएगा तो कुछ ही देर में खिलौनों पर दोनो की लड़ाई लगना शुरु हो जाएगी। ममी यह भी जानती थी कि मिंटू सन्नी से बहुत प्यार करता है और गर्मी की छुट्टियों में उसको सन्नी का इंतज़ार रहता है, पर मिंटू की मर्जी के खिलाफ अगर उसके कोई खिलौने छेड़े तो मिंटू गुस्सा करता है। जल्दी ही विमी बुआ और सन्नी आ गए थे, मिंटू बहुत प्यार से बुआ से मिला और सन्नी को भी प्यार लगाया। सारा घर हँसी के ठहाको से गूंज रहा था। सन्नी और मिंटू अपने कमरे में खेलने चले गए, विमी अपनी भाभी से गप्पे लड़ा रही थी। मां बाबा के देहांत के बाद भाभी के पास गर्मी की छुट्टियों में आना होता था। अभी थोड़ी ही देर हुई थी कि कमरे से झगड़े की आवाज़े आने लगी मिंटू कह रहा था मेरे खिलौने छोड़ दे सन्नी, तू तोड़ देगा। विमी चुप रही पर नीता जल्दी से कमरे में गई और मिंटू को प्यार से समझाया देखो मिंटू अब तुम बड़े हो रहे हो हर छुट्टियों में तुम सन्नी का इंतज़ार करते हो वो तुम्हारा भाई भी है और दोस्त भी, पर जब वो आता है तो तुम उसे खिलौनों के साथ खेलने नहीं देते। ऐसे नहीं करते अपनी चीज़ों को बांट कर खेलना सीखो तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा क्योंकि जब हम खुशियां बांटते हैं न तो हमें ज्यादा खुशी मिलती है, जब हमारी वजह से किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट आती है। देखो सन्नी तुमसे मिलने आया तुम्हारे संग खेलने आया है तुम मेरा मेरा करोगे तो उसे कैसा लगेगा? सन्नी अपनी ममी को भी देखता था उनके मन में भी यही बात थी विमी बुआ को ममी ने कभी भी बेगाना महसूस नहीं होने दिया वो बहुत हंस कर उनका स्वागत करती थीं और बुआ भी खुशी से आते थे रहने और जब विदा होते तो भी हंसी खुशी होते ममी तो उनको जाने नहीं देते पर सन्नी की पढ़ाई की वजह से ज्यादा दिन नहीं रुक पाते। मिंटू ममी की बात समझ गया था और इन छुट्टियों में उसने जीभर कर सन्नी के साथ खेला और जाते वक्त भी सन्नी से कहा कि अगर तुम्हें कोई खिलौना पसंद है घर ले जाना चाहते हो तो ले जाओ यार कोई बात नहीं। विमी भी हैरान थी कि मिंटू में भी अपनी ममी नीता की खूबियां झलकने लगी थीं और विमी सोच रही थी कि कितनी जल्दी मिंटू और सन्नी समझदार हो गए थे।

परिचय - कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |