कविता

दशानन

महाज्ञानी, धर्मकर्म का ज्ञाता, … था दशानन ! आज फिर,,, दशहरे में सजा उसका पुतला देख रहा था *अनेकाननों* को जो छुपा अपनी ओछी मानसिकता, राग – द्वेष, मद -लोभ और तृष्णा ! बन न्यायधीश, गर्वित नज़रों से कर रहे थे इंतजार उसके जल जाने का !! अंजु गुप्ता

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

क्या मेरी व्यथा सुनोगे!

इस वर्ष भी तुमने मेरे पुतले का दहन कर ही दिया;आखिर कब तक मुझे जलाने का ढ़ोंग कर अपने दम्भ की तुष्टी करते रहोगे और आम जन को भरमाते रहोगे?क्या मेरे गुनाह इतने थे!क्या मेरे अपराध की इतनी सजा है कि सदियों तक मेरे पुतले को जलाकर तुम खुश होते रहो,उत्सव मनाते रहो!अगर तुम्हें उत्सव […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – गांधी जी का चौथा बंदर

माने तो जाते है गांधी जी के तीन बंदर लेकिन आजकल चौथे बंदर का फोग चल रहा है। या यूं कहे तो भी अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इस चौथे बंदर के आगे तीनों बंदरों का वर्चस्व डाउन हो गया है। यह चौथा बंदर कमाल और धमाल है। इसकी आदतें और हरकतें बाकि के तीन बंदरों […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति

अथ श्री भागवत कथा

विजय दशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मोदी सरकार की जमकर तारीफ तो की लेकिन राष्ट्रवादी नीतियों पर. संघ प्रमुख ने अपने एक घंटे से ज्यादा की स्पीच में जहां मोदी सरकार की राष्ट्रवादी नीतियों का जिक्र करते हुए जमकर सराहना की, वहीं आर्थिक नीतियों पर संदेह जताया. साथ ही […]

सामाजिक

लेख– गांधी का सपना और वर्तमान स्वच्छ भारत का स्वरूप

गांधी और स्वच्छता दोनों एक- दूसरे के पर्याय हैं। ग़ांधी की दिनचर्या की शुरुआत ही स्वच्छता के कर्मों से शुरू होती थी। मगर देश का दुर्भाग्य आज़ादी के वक़्त देश की राजनीति ने केवल गांधी के नाम पर राजनीति ही की। उनके विचारों और आदर्शों को तो तिलांजलि दे दी गई। स्वच्छता समाज और देश […]

समाचार

वर्षा वार्ष्णेय सम्मानित

दि. 10 सितम्बर 17 को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी में आगमन स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर साझा काव्य संग्रह “संदल सुंगध ” का विमोचन समारोह और काव्य पाठ का भव्य आयोजन हुआ ! देश विदेश के वरिष्ठ रचनाकार व अन्य रचनाकारों का अदभुत संगम था ! इसमें जय विजय से जुड़ी हुई रचनाकार सुश्री वर्षा […]