कविता

आधी अधूरी ख़्वाहिशें !

आधी अधूरी ख़्वाहिशों को ले चली मैं जाने कहां !

तुम न होना उदास बेवजह
इस अल्हड़ के लिए
जितने भी  पल जीए
हाँ वो बस तुम संग जिए
खामोशी ओड़े चल पड़े
हैं हम उस डगर
यहां से कोसों दूर
रह गया अब तुम्हारा शहर
ख़्वाहिशें तो ख़्वाहिशें हैं
किसकी हैं सब पूरी हुई
आधी अधूरी ख़्वाहिशें लिए
चली अब मैं जाने कहां
यादें दे चली संग
दे चली मैं दुआ
तुम्हारी हंसी में हंसना
है अब तो मुझे
दुख में भी हरदम
संग पाओगे मुझे
अलविदा हमनशीं
ऐ मेरे हमसफर
हंसते हुए विदा करना
तुम हमको मगर !!!
कामनी गुप्ता ***
जम्मू !

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |