छुपा के अपने आँचल माँ

कल माँ के आँचल दूध पिया,
गोदी में की अठखेलियाँ।
आज कदम धरे धरती माँ पर,
मेरी गूँज रही किलकारियाँ।।

घुटुरुनि दौड़ रहा हूँ अब तो ,
धरती माँ के ऊपर।
जननी पकड़ हटाती हर पल,
रज जो लगे हैं मुँह पर।।

माँ के नजरों से बचकर के,
मिट्टी खूब ही खाता।
जिसे देख माँ गुस्सा होती,
तनिक ना उनकों भाता।।

कभी – कभी माँ का गुस्सा,
तो बेहद ही बढ़ जाता।
उस गुस्से में गाल पीठ मेरा,
लाल रंग हो जाता।।

झर-झर अश्रु बहे नयनों से,
लाल को जब-जब मारा।
लगा के सीने से माँ ने तब,
अमृत क्षीर उतारा।।

बालक की हर पीड़ा को,
माँ हर पल ही महसूस करे।
छुपा के अपने आँचल में माँ,
सारी विपदा उससे दूर करे।।

।।प्रदीप कुमार तिवारी।।
करौंदी कला, सुलतानपुर
7978869045

परिचय - प्रदीप कुमार तिवारी

नाम - प्रदीप कुमार तिवारी। पिता का नाम - श्री दिनेश कुमार तिवारी। माता का नाम - श्रीमती आशा देवी। शिक्षा - संस्कृत से एम ए। जन्म स्थान - दलापुर, इलाहाबाद, उत्तर-प्रदेश। मूल निवासी - करौंदी कला, शुकुलपुर, कादीपुर, सुलतानपुर, उत्तर-प्रदेश। इलाहाबाद मे जन्म हुआ, प्रारम्भिक जीवन नानी के साथ बीता, दसवीं से अपने घर करौंदी कला आ गया, पण्डित श्रीपति मिश्रा महाविद्यालय से स्नातक और संत तुलसीदास महाविद्यालय बरवारीपुर से स्नत्कोतर की शिक्षा प्राप्त की, बचपन से ही साहित्य के प्रति विशेष लगव रहा है। समाज के सभी पहलू पर लिखने की बराबर कोशिस की है। पर देश प्रेम मेरा प्रिय विषय है मैं बेधड़क अपने विचार व्यक्त करता हूं- *शब्द संचयन मेरा पीड़ादायक होगा, पर सुनो सत्य का ही परिचायक होगा।।* और भ्रष्टाचार पर भी अपने विचार साझा करता हूं- *मैं शब्दों से अंगार उड़ाने निकला हूं, जन जन में एहसास जगाने निकला हूं। लूटने वालों को हम उठा-उठा कर पटकें, कर सकते सब ऐसा विश्वास जगाने निकला हूं।।*