मुक्तक….

 

चरागों की पनाहों में मुहब्बत साँस भरती है।
सितारों की निगाहों में अँधेरी रात चुभती है।
ये माना है नही आसां मुहब्बत राह पर चलना-
कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है।

________अनहद गुंजन अग्रवाल