सच कहता हूं

घर से
‘कुछ नहीं’ पीकर आने की कसम
खाकर जाने वाले
प्रेमपूर्वक 
‘कुछ नहीं’ पीकर
घर आते हैं
और 
घर जाकर
पत्नी की कसम खाकर
कहते हैं
”सच कहता हूं”
आज फिर ‘कुछ नहीं’ पी.”
इस प्रकार
‘कुछ नहीं’ के चक्कर में
बहुत कुछ पी जाते हैं
और 
अपने
तन-मन-धन
स्वास्थ्य और संस्कृति के साथ
खिलवाड़ करते हैं
जमकर सच कहने की
कसम खाकर झूठ के साथ
जमकर दोस्ती निभाते हैं.

पुनश्च-
(‘कुछ नहीं’ स्कॉच व्हिस्की का नाम है)

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।