बवासीर : कारण और निवारण

बवासीर (अंग्रेजी में पाइल्स) एक ऐसा रोग है जिसको प्रकट करने में लोग शर्माते हैं क्योंकि यह रोग उनके मल विसर्जन से जुड़ा हुआ है। लेकिन यह बहुत बड़ी गलती है, क्योंकि इसे छिपाने का बुरा परिणाम भयंकर कष्ट के रूप में भुगतना पड़ता है। इसलिए जैसे ही इसका संदेह हो या ज्ञान हो, तत्काल इसकी उचित चिकित्सा प्रारम्भ कर देनी चाहिए।

अन्य अधिकांश रोगों की तरह बवासीर भी कब्ज से प्रारम्भ होता है। वास्तव में यह कब्ज का ही बहुत बिगड़ा हुआ रूप है। जब किसी को कब्ज हो जाता है, तो वह मल विसर्जन के समय आवश्यकता से अधिक जोर लगाने लगता है और इसी तरह बवासीर की शुरुआत हो जाती है। बवासीर हो जाने पर मल त्यागने में बहुत कष्ट होता है, कई बार मल के साथ खून भी आने लगता है, गुदा में सूजन हो सकती है और मस्से बन सकते हैं। गुदा में लगातार खुजली होना भी इसका एक लक्षण है। इनमें से कोई भी लक्षण होने पर तत्काल सावधान होकर इससे छुटकारा पाने में लग जाना चाहिए।

कब्ज के जितने भी कारण हैं, जैसे पानी कम पीना, भारी भोजन करना, अधिक खाना, जंक फूड खाना आदि बवासीर के भी कारण बन जाते हैं। इनके अतिरिक्त मल विसर्जन में अधिक जोर लगाना इसका सबसे बड़ा कारण है। कभी कभी गर्भावस्था और वृद्धावस्था तथा अधिक वनज उठाने के कारण भी बवासीर हो सकता है या फिर यह रोग आनुवांशिक भी हो सकता है।

सभी रोगों की तरह इसमें भी बचाव इलाज से बेहतर होता है। इसलिए उन कारणों से बचना चाहिए, जिनसे कब्ज और आगे चलकर बवासीर हो सकता है। सबसे पहले तो अपने आहार पर ध्यान देना चाहिए और ऐसी वस्तुएँ लेनी चाहिए जिनमें रेशे (फाइबर) अधिक होते हैं, जैसे दलिया, मक्का, गेंहूँ, गाजर, मूली, हरी सब्जियाँ आदि। इनके साथ पर्याप्त पानी भी पीना चाहिए। लाभकारी फलों जैसे अंजीर, पपीता, केला, जामुन, अमरूद, सेब आदि का सेवन करना चाहिए।

कब्ज या बवासीर के रोगियों को मैदा से बनी चीजों, जंक फूड, बासी खाना, दूध की बनी मिठाइयों तथा फास्ट फूड से दूर रहना चाहिए। सात्विक आहार, पर्याप्त जल पीना और नियमित व्यायाम करने वालों को कब्ज या बवासीर होने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता।

यदि आपको बवासीर हो ही गया है, तो ऊपर बताये गये आहार और सावधानियों के साथ-साथ निम्नलिखित क्रियायें इससे छुटकारा दिलाने में बहुत सहायक होती हैं-
1. कटिस्नान लेकर तेजी से टहलना
2. अश्वनी मुद्रा का अभ्यास
3. नौली क्रिया या उसके विकल्प के रूप में अग्निसार क्रिया
4. गणेश क्रिया

आप किसी योग केन्द्र पर जाकर या मेरी लिखित पुस्तिका से ये क्रियायें सरलता से सीखकर उपयोग में ला सकते हैं और लाभ उठा सकते हैं।

विजय कुमार सिंघल
श्रावण कृ 4, सं 2075 वि (31 जुलाई 2018)

परिचय - डाॅ विजय कुमार सिंघल

नाम - डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’ जन्म तिथि - 27 अक्तूबर, 1959 जन्म स्थान - गाँव - दघेंटा, विकास खंड - बल्देव, जिला - मथुरा (उ.प्र.) पिता - स्व. श्री छेदा लाल अग्रवाल माता - स्व. श्रीमती शीला देवी पितामह - स्व. श्री चिन्तामणि जी सिंघल ज्येष्ठ पितामह - स्व. स्वामी शंकरानन्द सरस्वती जी महाराज शिक्षा - एम.स्टेट., एम.फिल. (कम्प्यूटर विज्ञान), सीएआईआईबी पुरस्कार - जापान के एक सरकारी संस्थान द्वारा कम्प्यूटरीकरण विषय पर आयोजित विश्व-स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में विजयी होने पर पुरस्कार ग्रहण करने हेतु जापान यात्रा, जहाँ गोल्ड कप द्वारा सम्मानित। इसके अतिरिक्त अनेक निबंध प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। आजीविका - इलाहाबाद बैंक, डीआरएस, मंडलीय कार्यालय, लखनऊ में मुख्य प्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) के पद से अवकाशप्राप्त। लेखन - कम्प्यूटर से सम्बंधित विषयों पर 80 पुस्तकें लिखित, जिनमें से 75 प्रकाशित। अन्य प्रकाशित पुस्तकें- वैदिक गीता, सरस भजन संग्रह, स्वास्थ्य रहस्य। अनेक लेख, कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य, कार्टून आदि यत्र-तत्र प्रकाशित। महाभारत पर आधारित लघु उपन्यास ‘शान्तिदूत’ वेबसाइट पर प्रकाशित। आत्मकथा - प्रथम भाग (मुर्गे की तीसरी टाँग), द्वितीय भाग (दो नम्बर का आदमी) एवं तृतीय भाग (एक नजर पीछे की ओर) प्रकाशित। आत्मकथा का चतुर्थ भाग (महाशून्य की ओर) प्रकाशनाधीन। प्रकाशन- वेब पत्रिका ‘जय विजय’ मासिक का नियमित सम्पादन एवं प्रकाशन, वेबसाइट- www.jayvijay.co, ई-मेल: jayvijaymail@gmail.com, प्राकृतिक चिकित्सक एवं योगाचार्य सम्पर्क सूत्र - 15, सरयू विहार फेज 2, निकट बसन्त विहार, कमला नगर, आगरा-282005 (उप्र), मो. 9919997596, ई-मेल- vijayks@rediffmail.com, vijaysinghal27@gmail.com