फूलों की कविता-16

                                   फूलों की 21 कविताएं से संग्रहीत

16. हरसिंगार के फूल

नाम हमारा हरसिंगार है,

शरद ऋतु में खिलते हैं।

नन्हे-नन्हे श्वेत सुमन हम,

रात में खिलते-झरते हैं॥

वैभव की हमें चाह नहीं है,

पूजा की परवाह नहीं।

बालों या माला में सजने,

की भी हमको चाह नहीं॥

हम तो जग को सुंदर करके,

दे सुगंध झर जाएंगे।

फिर अवसर-मौसम आने पर,

सेवा करने आएंगे॥

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।