फटाक-फटाक- 2

तेजी से बदलते इस युग में खबरें भी तेजी से बदलती रहती हैं. तेजी से बदलती इन खबरों को सहेजने के लिए प्रस्तुत है एक नवीन प्रयास फटाक-फटाक. फटाक-फटाक के इस दूसरे अंक में ढेर सारी सकारात्मक खबरें संक्षेप में, लेकिन पहले बात सिद्धियों की-

सिद्धियों के बारे में हम अक्सर सुनते हैं, उनकी कुल संख्या 18 है. इनमें अणिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, सिद्धि, ईशित्व अथवा वाशित्व, सर्वकामावसायिता, सर्वज्ञ, दूरश्रवणा, सृष्टि, परकायप्रवेशन, वाक्सिद्धि, कल्पवृक्षत्व, संहारकरणसामर्थ्य, भावना, अमरता, सर्वन्यायकत्व सम्मिलित हैं.

इसके बाद एक बहुत ही अच्छी और सच्ची बात-

परेड में पीछे मुड़ बोलते ही
पहला आदमी आखिरी और आखिरी आदमी पहले
नंबर पर आ जाता है!
जीवन में कभी आगे होने का घमंड
और आखिरी होने का गम न करे,
पता नहीं कब जिंदगी बोल दे
” पीछे मुड़ “.

रशियन गणितज्ञ ओल्गा लैडिज़ेनस्काया का जन्मदिन 7 मार्च-
खास मौकों को स्पेशल डूडल के जरिए सेलिब्रेट करने वाले सर्च इंजन जायंट गूगल ने 7 मार्च को अपना डूडल रशियन गणितज्ञ ओल्गा लैडिज़ेनस्काया पर बनाया है. पार्शियल डिफरेंशल इक्वेशंस और फ्लुइड डायनमिक्स के क्षेत्र में काम करने वाली ओल्गा के 97वें जन्मदिन पर गूगल ने यह डूडल बनाया है. ओल्गा के इक्वेशंस की मदद से ओशियनोग्रफी, एयरोडायनमिक्स और मौसम के पूर्वानुमान में मदद मिलती है। गूगल के डूडल में ओल्गा के चेहरे के साथ ही इक्वेशन और फ्लुइड डायनमिक्स को भी दर्शाया गया है.

अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च-
अभी 8 मार्च को हमने अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस मनाया है. नारी सशक्तिकरण और महिलाओं को सम्‍मान देने के देने के उद्देश्‍य से मनाए जाने वाले अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं-

आज, अनगिनत महिलाएं सिर्फ कार्यकुशल गृहिणी बनने के साथ ही घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर देश के निर्माण में असरदार ढंग से भाग ले रही हैं. उन्होंने लिंग असमानता की बेड़ियों को तोड़ने के बाद प्रफेशनल कामयाबी हासिल की है.
इस अवसर पर हम आपको एक महिला कुली से मिलवाते हैं. यह महिला इसलिए कुली बनी, ताकि पति की तरह बच्चों को न उठाना पड़े बोझ. यह महिला है- जबलपुर रेलवे स्टेशन की महिला कुली संध्या मरावी.
महिला दिवस की अन्य बातें हम आपको आगे भी बताते रहेंगे.

दूधवाली के बेटे को दुनिया का सलाम-
9 मार्च 1934 को जन्मे यूरी गागरिन के बारे में शायद ही किसी ने सोचा होगा कि उनकी वजह से अंतरिक्ष के कई गूढ़ रहस्यों के बारे में पता चलेगा. यूरी गागरिन अंतरिक्ष में जाने वाले पहले इंसान थे. यूरी के पिता एक मामूली बढ़ई थे और मां दूध वाली थीं. ज़ाहिरसी बात है कि उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वे यूरी को पढ़ा-लिखाकर क सफल इंसान बना पाते. आगे चलकर यही यूरी गागरिन विमान से पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर निकल कर स्पेस में पहुंचे और इस तरह वह अंतरिक्ष में जाने वाले पहले इंसान बन गए.

हमारी विशेष विज्ञान- रिपोर्ट-
वॉयस रिकग्निशन क्या है?
वॉयस रिकग्निशन एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर प्रोग्राम या हार्डवेयर डिवाइस है जिसमें मानव की आवाज को डिकोड करने की क्षमता होती है. वॉयस रिकॉग्निशन का उपयोग आमतौर पर किसी डिवाइस को संचालित करने, कमांड करने, या कीबोर्ड, माउस का उपयोग किए बिना लिखने या किसी भी बटन को दबाने के लिए किया जाता है. आज, यह ASR (automatic speech recognition) सॉफ्टवेयर प्रोग्राम वाले कंप्यूटर पर किया जाता है. कई ASR प्रोग्राम्स को उपयोगकर्ता को अपनी आवाज को पहचानने के लिए एएसआर प्रोग्राम को “प्रशिक्षित” करने की आवश्यकता होती है, ताकि यह स्पीच को टेक्स्ट में अधिक सटीक रूप से परिवर्तित कर सके. उदाहरण के लिए, आप कह सकते हैं “ओपन इंटरनेट” और कंप्यूटर इंटरनेट ब्राउज़र को खोलेगा.

वॉयस रिकग्निशन किसी व्यक्ति के वॉयस बायोमेट्रिक्स का मूल्यांकन करता है, जैसे कि उनकी आवाज़ की आवृत्ति और प्रवाह और उनका प्राकृतिक उच्चारण. वॉइस रिकग्निशन को स्पीकर रिकग्निशन के रूप में भी जाना जाता है. यह तकनीक बिना हाथों वाले लोगों के वरदान है. अनेक डॉक्टर्स भी समय बचाने के लिए इसका इस्तेमाल बखूबी करते हैं.

विज्ञान का कमाल-

कैंसर की वजह से अरुणिमा की एक ओवरी को निकाल दिया गया था, लेकिन वह मां बनना चाहती थीं. इस उम्मीद को अरुणिमा ने छोड़ा नहीं. लंबे वक्त तक चले इलाज के बाद उन्हें एक बेटी हुई है. अरुणिमा की मां बनने की चाहत, IVF तकनीक से चाहत पूरी हुई.

अनोखी गिरफ्तारी-
गुजरात के अहमदाबाद में हुई एक अनोखी गिरफ्तारी का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. आरोपी शराब तस्कर ने जब कहा कि मोटा होने की वजह से वह चल नहीं पाएगा, तो पुलिस उसे खाट सहित ही उठा ले गई. पहले ऐसा चुटकुलों में ही सुना करते थे.

बदलाव का काम-
कुछ लोग सिर्फ बदलाव की बातें करते हैं, लेकिन कुछ लोग अपने प्रयासों से वाकई बदलाव कर के दिखाते हैं. ऐसे ही एक शख्स हैं कुंदन, जिन्होंने राजधानी दिल्ली की एक झुग्गी-बस्ती में रहने वाले गरीब बच्चों की जिंदगी बहुत हद तक बदल दी है. कुंदन सचमुच में कुंदन-सा शुद्ध सोना हैं. वे खेल-खेल में झुग्गी-झोंपड़ी के बच्चों को पढ़ाते हैं.

बिल्लियों को पकड़ने का ठेका-
कर्नाटक के राज्यपाल के आधिकारिक निवास राजभवन में इन दिनों बिल्लियों का प्रकोप है. इन बिल्लियों को पकड़ने का काम महानगरपालिका को दिया गया, मगर उसे बिल्ली पकड़ने का अनुभव नहीं है. ऐसे में एक प्राइवेट एजेंसी को 1 लाख रुपये का ठेका दिया गया है.

आकृति-
वडोदरा के अजय पटेल ने सेक्स रीअसाइनमेंट कराया और अब वह आकृति पटेल के नाम से जाने जाते हैं. अब आकृति चाहती हैं कि उनकी एक पुरुष के तौर पर सभी यादें मिटा दी जाएं. आकृति अब इस पहचान को पुख्ता करना चाहती हैं. उन्होंने एक सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने सभी दस्तावेजों से अपना पुराना नाम हटाने की इजाजत मांगी है.

अनूठी ब्रेन सर्जरी-
राजस्थान के एक अस्पताल में डॉक्टरों ने एक अनूठी सर्जरी की है. डॉक्टरों ने बताया कि महिला के दिमाग के उस हिस्से में ट्यूमर था, जिससे बोलने की प्रक्रिया नियंत्रित होती है और शरीर का दाहिना भाग संचालित होता है. ऐसे में यह सर्जरी जागते हुए ही की जा सकती थी. इस सर्जरी के लिए महिला की पहले काउंसलिंग की गई थी और उसे इलाज के हर पहलू के बारे में अच्छे से समझाया गया था. टोंक की रहने वाली शांति देवी का जागती हुई अवस्था में सर्जरी करने के पीछे डॉक्टरों का मकसद था कि वह इस दौरान यह पता लगा सकें कि दिमाग का स्पीच पार्ट किसी तरह से प्रभावित तो नहीं हो रहा है और अगर हो रहा है तो इसे सर्जरी के दौरान ही ठीक किया जा सके.

ट्रैफिक जाम का लाभ-
फरीदाबाद के बिजनसमैन का कुछ लोगों ने अपहरण कर लिया और कार से दिल्ली ले जाने लगे. रास्ते में बहुत जाम लगा होने के कारण कार रुकी थी और पीड़ित ने शोर मचाना शुरू कर दिया. इसके बाद आसपास हंगामा होते देखकर पीड़ित ने भागकर अपनी जान बचाई और पुलिस के पास पहुंच गया.

फटाक-फटाक के इस अंक में आज बस इतना ही. आप भी कामेंट्स में फटाक-फटाक खबरें लिखकर हमारे साथ साझा कर सकते हैं.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।