कविता

दिलखुश जुगलबंदी-14

सोच-समझकर शब्द बोलें

शब्दों की भारी भीड़ से
एक से बढ़कर एक शब्द चुनकर
रंगबिरंगी माला जब सजने लगी
मानो मन में शहनाइयां बजने लगीं
सुर-लय-ताल का
सुनहरी छत्र छाता गया
नए-नए कवियों का प्रदर्शन
गज़ब ढाता गया
मीठे-सुरीले सार्थक शब्दों का
होने लगा मेल
लाजवाब अर्थ लिए
शब्द रहे हैं खेल
शब्दों ने जाने क्यों मेरा मन
मोह लिया
मैंने भी दिलखुश जुगलबंदी से जुड़ने की ओर
रुख किया.

शब्द भारी-भरकम हों या हल्के
ख़ास यह है कि उनमें से कैसा भाव झलके!
शब्द अगर सटीक और सार्थक हों
तो मन मोह लेते हैं,
जीवन को सही राह पर
मोड़ देते हैं
सफलता के अनगिनत रास्ते
खोल देते हैं
शब्द अगर नकारात्मक और निरर्थक हुए
तो मन तोड़ लेते हैं,
अच्छे-खासे संगठन को
फोड़ देते हैं,
चहकती-महकती बगिया की चहक-महक को,
पल भर में विवादों की फुंकार से
झिंझोड़ देते हैं.

शब्द अनमोल संपदा है,
प्रेम और बैर इसी से लेते जन्म हैं,
प्रेम से बोलने पर शब्द ही बनाते दोस्त हैं,
कड़वाहट आते ही यही करा देते खत्म हैं.
शब्द से खुशी
शब्द से गम
शब्द से पीड़ा
शब्द ही मरहम
शब्द से सुर-तान-लय है
शब्द से ही बनती सरगम
सोच-समझकर शब्द बोलें
याद रखें इसको हरदम.

अपनी नई काव्य-पंक्तियों को कविता रूप में मेल से भेजें. जिनकी काव्य-पंक्तियां दिलखुश जुगलबंदी में सम्मिलित हो सकेंगी, उन्हें मेल से सूचित किया जाएगा. काव्य-पंक्तियां भेजने के लिए पता-

tewani30@yahoo.co.in

दिलखुश जुगलबंदी-10 के कामेंट्स में प्रकाश मौसम और लीला तिवानी की काव्यमय चैट पर आधारित दिलखुश जुगलबंदी.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “दिलखुश जुगलबंदी-14

  1. शब्दों से माला भी सजती है,
    शब्दों से छुरियाँ भी चलती हैं,
    शब्द से ही टपकता शहद,
    शब्द से ही टपकता जहर,
    शब्दों का है खेल अजब,
    शब्द ही ढाते हैं गजब.

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