गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बिगाड़े है खुदा, बनाता भी तो है निराशा में आशा, जगाता भी तो है। भले ही कष्ट कितने वो दे दे हमें हरिक का साथ पर निभाता भी तो है। हमें वो उलझनों में डाले है मगर सही रस्ता हमें दिखाता भी तो है। सिखाता दूर रहना सबको इश्क से चिरागे इश्क पर जलाता भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मौसम की अंगड़ाई समझ, यह बदली क्यों छाई समझ। आंखें तेरी रोशन हैं, फिर क्यों ठोकर खाई समझ लिखने से पहले अपने, लफ़्ज़ों की गहराई समझ दिल में जब तूफान उठे, याद किसी की आई समझ आज नमिता खुश है तू, दिल में मस्ती छाई समझ — नमिता राकेश

गीतिका/ग़ज़ल

मेरा दिल मानो कि गुलाब सा खिल गया

मेरा दिल मानो कि गुलाब सा खिल गया कमरे में जब तेरा खत पुराना मिल गया खाली रातें,सूने दिन और बेचैन सी साँसें तेरी यादें पा कर एक ज़माना मिल गया वही कहीं तुम्हारे लबों की छुअन भी थी छुआ तो मेरे होंठों को तराना मिल गया हर्फों में छिपे तेरे घुँघराले लटों का जादू […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सृष्टिकर्ता ईश्वर का निज व मुख्य नाम और उसके मिलने का पता

ओ३म् हमारा यह संसार लाखों व करोड़ो वर्षों पूर्व बना है। यह अपने आप नहीं बना और न ही स्वमेव बिना किसी कर्ता के बन ही सकता है। इसका बनाने वाला अवश्य कोई है। जो भी चीज बनती है उसका बनने से पहले अस्तित्व नहीं होता। इस संसार का भी बनने से पहले इस दृश्यरूप […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मनुष्य की जीवात्मा चेतन, अल्पज्ञ, अनादि, अजर व अमर सत्ता है

ओ३म् मनुष्य मननशील प्राणी को कहते हैं। परमात्मा ने इस संसार एवं इसके सभी प्राणियों को उत्पन्न किया है जिनमें मनुष्य भी एक प्राणी है। मनुष्य की अनेक विशेषतायें हैं जो अन्य प्राणियों में नहीं हैं। अन्य प्राणियों में भी अनेक विशेषतायें हैं जो मनुष्यों में नहीं है। यह सभी प्राणी परमात्मा से जन्म पाते […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

हमारा यह जन्म हमारे पूर्वजन्म का पुनर्जन्म है और यह सत्य सिद्धांत है

ओ३म् वैदिक धर्म एवं संस्कृति इस सृष्टि की आद्य एवं प्राचीन धर्म एवं संस्कृति है। यह धर्म व संस्कृति ईश्वर प्रदत्त ज्ञान वेद के आधार पर प्रचलित एवं प्रसारित हुई है। महाभारत काल तक इसका प्रचार व प्रसार पूरे विश्व में था। वेद के सभी सिद्धान्त ईश्वर प्रदत्त होने से सत्य एवं विज्ञानसम्मत हैं। वेदों […]

इतिहास

“खलीफत-गांधी एक्सप्रेस” की शताब्दी पर मौन क्यों? (भाग -1)

दक्षिण अफ्रीका से आने के बाद भारत में गाँधी जी ने पहला राजनीतिक अभियान 1919 ई. में शुरू किया था। आज उसकी शताब्दी मनाना तो दूर, उस का नाम तक कोई नहीं ले रहा! जी हाँ, ‘खलीफत आंदोलन’ याद करें, जो वस्तुतः ‘खलीफत-जिहाद’ था, जिसे कांग्रेस अध्यक्ष रहीं विदुषी एनी बेसेंट ने ‘गाँधी-खलीफत एक्सप्रेस’ कहा […]

कविता

एकता की चाहत

राष्ट्रीय एकता दिवस पर विशेष आज एकता की चाहत ने, फिर हमको ललकारा है, एक साथ सब मिलकर बोलो, भारत देश हमारा है. याद करो ऐ भारतवासी, भारत था जब जगद्गुरु, भारत की महिमा गाने को, जन्मे थे पोरस व कुरु. हिंसा का तब नाम नहीं था, छुआछूत का ज्ञान नहीं, जाति-पाति के भेदभाव और […]

लघुकथा

नुक्कड़ की मुलाकातें

“नुक्कड़ की मुलाकात” ये झिनकू भैया भी अजीब किस्म के इंसान है, जब भी मिलते हैं गाँव के नुक्कड़ पर ही मिलते हैं। यहाँ तक तो ठीक है पर मिलते ही किसी न किसी समस्या के जनक बन जाते हैं। लगता है इनकी कुंडली के सारे ग्रह झगड़ालू विरादरी से ताल्लुक रखते हैं। पूजा के […]

मुक्तक/दोहा

दोहा

“दोहा” चाँद आज का मनचला, करता बहुत किलोल। लुक्का-छुप्पी खेलकर, हो जाता है गोल।।-1 साजन करवा चौथ का, है निर्जल उपवास। जल्दी लाना चाँद घर, चिलमन चलनी खास।।-2 मुखड़ा तेरा देखकर, बुझ जाएगी प्यास। साजन तुम दीर्घायु हो, यहीं चाँद से आस।।-3 रूप निखारूँगी सजन, कर सोलह शृंगार। तेरे खातिर रात-दिन, रहती पिय बेजार।।-4 चाँद […]