Monthly Archives: October 2019

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बिगाड़े है खुदा, बनाता भी तो है निराशा में आशा, जगाता भी तो है। भले ही कष्ट कितने वो दे दे हमें हरिक का साथ पर निभाता भी तो है। हमें वो उलझनों में डाले है...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मौसम की अंगड़ाई समझ, यह बदली क्यों छाई समझ। आंखें तेरी रोशन हैं, फिर क्यों ठोकर खाई समझ लिखने से पहले अपने, लफ़्ज़ों की गहराई समझ दिल में जब तूफान उठे, याद किसी की आई समझ...






  • एकता की चाहत

    एकता की चाहत

    राष्ट्रीय एकता दिवस पर विशेष आज एकता की चाहत ने, फिर हमको ललकारा है, एक साथ सब मिलकर बोलो, भारत देश हमारा है. याद करो ऐ भारतवासी, भारत था जब जगद्गुरु, भारत की महिमा गाने को,...

  • नुक्कड़ की मुलाकातें

    नुक्कड़ की मुलाकातें

    “नुक्कड़ की मुलाकात” ये झिनकू भैया भी अजीब किस्म के इंसान है, जब भी मिलते हैं गाँव के नुक्कड़ पर ही मिलते हैं। यहाँ तक तो ठीक है पर मिलते ही किसी न किसी समस्या के...

  • दोहा

    दोहा

    “दोहा” चाँद आज का मनचला, करता बहुत किलोल। लुक्का-छुप्पी खेलकर, हो जाता है गोल।।-1 साजन करवा चौथ का, है निर्जल उपवास। जल्दी लाना चाँद घर, चिलमन चलनी खास।।-2 मुखड़ा तेरा देखकर, बुझ जाएगी प्यास। साजन तुम...