Monthly Archives: October 2019


  • सच्ची आधुनिकता

    सच्ची आधुनिकता

    सच्ची आधुनिकता सुबह- सुबह सोसाइटी के पार्क में मॉर्निंग वॉक करते हुए मिसेज शर्मा की नजर मिसेज बैनर्जी पर पड़ी। “हेलो मिसेज बनर्जी क्या बात है आप आजकल सोसाइटी की किटीज में नहीं दिख रहीं!” “ऐसे...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मुहब्बत  की  ज़रूरत है। ये इक तन्हा हक़ीक़त है। बुलन्दी पर कहाँ थी कल, कहाँ  आखिर  मईसत है। नहीं कहते ज़बां से कुछ, हमारी   ये    शराफत  है। जो  उछला नाम मी टू में, किसी  की ...


  • उत्सव: एक काव्य रूपक

    उत्सव: एक काव्य रूपक

    ”हम कांटों से नहीं डरते, इसलिए गुलाब लगाते हैं, हम गमों से नहीं डरते, इसलिए उत्सव मनाते हैं.” उत्सवों में उत्सव है दिवाली, लेकिन दिवाली मनाने में आईं दिक्कतें- पटाखे कोर्ट ने बंद कर दिए, साउंड...

  • विडम्बना

    विडम्बना

    विडम्बना वही तो है, बिल्कुल वही। आज पाँच वर्षों के बाद उसे देखा मैंने हरिद्वार में पतितपावनी गंगा के किनारे। गेरुआ वस्त्र में लिपटी हुई, मुख पर असीम शांति लिए हुए चोटिल और बीमार पशुओं की...

  • एनकाउंटर

    एनकाउंटर

    एनकाउंटर क्या हाल है शेखू लंगड़े? अरे ! इंस्पेक्टर दिग्विजय आप। हाँ शेखू! इंस्पेक्टर साहब! शेखू तो जेल में ही मर गया था। अब तो आपके सामने शेखर रावत है साहब। हा हा हा…अच्छी बात है...


  • ये कुछ तुम जैसा है

    ये कुछ तुम जैसा है

    ये कुछ तुम जैसा है कुछ नेह के धागे बुने हुए कुछ स्नेह की झरती बूंदों सी, कुछ यादें मीठी-मीठी हैं कुछ लम्हें रीते-रीते से कुछ होंठों पर मुस्कान लिए कुछ नमी भी है इन आँखों...