कविता

मेरा देश

मेरे देश की अनमोल बातें ,
मुझको याद दिलाती हैं ।
मैं हूँ पहले एक इंसान ,
मर्यादा यही सिखाती है ।

गाय हमारी पूजनीय माता ,
श्रद्धा से .. गहरा नाता है
दूध देकर पितरों को भी ,
सहज मुक्ति दिलाती है ।

मंदिर मस्जिद एक बनाकर,
सबको ज्ञान का पाठ दिया ।
सभी धर्मों से हमें मिलाकर ,
प्यार ही सच्चा धर्म बताती है ।

दींन दुखियों की सेवा से
ईश्वर भी मिल जाते हैं ।
मानव सेवा सच्ची सेवा ,
संस्कृति यही बताती है ।

माँ हमारी पहली गुरु है
घर ही पहली पाठशाला ,
इंसान बने हम नेक सदा
हर दिन यही समझाती है ।

घर छोड़ा परिवार छोड़ा ,
सीमा पर हर पल रहते तैयार
देश की सेवा सच्ची सेवा ,
सच से हमें मिलाती है ।

मिट गए हजारों वीर यहाँ
देश की शान बचाने को ।
कफन से उठती चीत्कार
फिर भी हिम्मत दिलाती है ।

देश हमारा जग से निराला ,
नक्शे में दिखता है प्यारा ।
न झुके कभी न झुकने देंगे ,
शहीदों की चिता समझाती है ।

चाहे जाओ तुम अमेरिका ।
या कनाडा की गलियों में ।
सौंधी मिट्टी की अजब महक
अपने वतन की याद दिलाती है ।

— वर्षा वार्ष्णेय, अलीगढ़

परिचय - वर्षा वार्ष्णेय

पति का नाम –श्री गणेश कुमार वार्ष्णेय शिक्षा –ग्रेजुएशन {साहित्यिक अंग्रेजी ,सामान्य अंग्रेजी ,अर्थशास्त्र ,मनोविज्ञान } पता –संगम बिहार कॉलोनी ,गली न .3 नगला तिकोना रोड अलीगढ़{उत्तर प्रदेश} फ़ोन न .. 8868881051, 8439939877 अन्य – समाचार पत्र और किताबों में सामाजिक कुरीतियों और ज्वलंत विषयों पर काव्य सृजन और लेख , पूर्व में अध्यापन कार्य, वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन यही है जिंदगी, कविता संग्रह की लेखिका नारी गौरव सम्मान से सम्मानित पुष्पगंधा काव्य संकलन के लिए रचनाकार के लिए सम्मानित {भारत की प्रतिभाशाली हिंदी कवयित्रियाँ }साझा संकलन पुष्पगंधा काव्य संकलन साझा संकलन

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