कविता

जीवन

मिलो की दूरियां हैं दिल की खबरें आज भी पहुंचती हैं
यह इश्क है जनाब किसी के कहने से कहा रूकती हैं

जमाना कितनी भी पैरवी कर ले हुक्मरानों की अब
जिस पर फल ज्यादा होते हैं ,डाली वही झुकती है

आंधी और तूफान तो आते रहते हैं ,दुनिया हर कोने में
रब के हाथ में है सब,जीवन की लौ कहां कभी बुझती है

बहुत सुना है समंदर के विशाल और गहरे होने का
इतिहास बनती है वो कश्तियां जो लहरों से जूझती है

परिचय - प्रवीण माटी

नाम -प्रवीण माटी गाँव- नौरंगाबाद डाकघर-बामला,भिवानी 127021 हरियाणा मकान नं-100 9873845733

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