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वकीलों की फीस

जनसाधारण से लेकर वीआइपी तक एसडीओ कोर्ट से लेकर सर्वोच्च न्यायालय में न्याय की आस में पहुंचते हैं, जहां रसूखदार लोग तो मोटी फीस देकर अपने मुकदमे की पैरवी के लिए अच्छे वकील रख लेते हैं.

परंतु कानूनी जानकारी नहीं होने के कारण साधारण लोग शीघ्र न्याय पाने की लालसा में ऐसे वकील के फीस तभी भर पाते हैं, जब जमीन, घर या औरत के गहने गिरवी रखते हैं या बेचते हैं. इसके बाद भी केस जीतने की कोई गारंटी नहीं रहती.

हालांकि गरीब मुवक्किलों के लिए संविधान ने नि:शुल्क वकील की व्यवस्था की है, किंतु ऐसे पैरवीकार अधिवक्ता की कानूनी जानकारी अल्प ही होती है. मैंने कई कोर्ट के वकीलों के फीस निर्धारण को लेकर ‘बार कौंसिल ऑफ इंडिया’ को पत्र लिखा, किंतु जवाब अब तक पेंडिंग है. सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है.

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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