कविता

आस्था और अनास्था

सूर्यग्रहण
अभी ‘काजू’ लग रहा है !
आस्थावाले को
न नहाने और न खाने के चक्कर में ऑफिस या स्कूल नहीं जाने चाहिए !

×××

‘सूर्यग्रहण’ आस्था नहीं,
विज्ञानसम्मत है.
मैं नास्तिक हूँ,
कुछ देर पहले चाय ली, अब दूध-चूड़ा खा रहा हूँ….

×××

अपने क्षेत्र में कई फ़र्ज़ी नेता हो गए हैं !
बकौल
“फ़र्ज़ी नागरिक”

×××

शेख चिल्ली साहब !
मैं लाइक पाने के लिए पोस्ट नहीं करता !
मेरा उद्देश्य सिर्फ़ ‘स्वांत: सुखाय’ है, मित्र !

×××

‘कर्ण’
की सही पहचान न होने से
वे आजन्म प्रताड़ित रहे,
तो वहीं कुँवारी माँ की संतान ‘प्रभु यीशु मसीह’ संसार के लिए आदरणीय हो गए !

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

Leave a Reply