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गड़बड़झाला

बिहार सरकार के उच्चाधिकारी- नियुक्ति आयोग (बी.पी.एस.सी.) के द्वारा 45 वीं CC(M) Exam. में उच्च मेधा-प्राप्तांक के बावज़ूद मेरी नियुक्ति एक दशक से नहीं की जा रही है।सभीतरह के साक्ष्य इकट्ठे कर आयोग के संवैधानिक निकाय के कारण 31.05.2013 को म. राष्ट्रपति जी को गुहारावेदन प्रेषित की, राष्ट्रपति सचिवालय से 02.07.2013 को मुख्य सचिव, बिहार को जांचार्थ मेरा आवेदन अंतरित किया गया । मुख्य सचिव ने जांच के लिए BPSC को ही भेजा, जिनके विरुद्ध मैंने अपनी समस्या को महामहिम जी के सेवार्थ भेजा था। आयोग ने अपनी ही रट लगाए रखा।

पुन: BPSC के विरुद्ध  महामहिम जी को  20.06.2015 को गुहार लगाया। राष्ट्रपति सचिवालय ने मुख्य सचिव, बिहार  को फिर से एतदर्थ जांचार्थ 23.07.2015 को मेरा आवेदन अंतरित किया । जोकि बिहार सरकार के मुख्य सचिव ने अबतक स्वतंत्र जांच नहीं बिठाया है । लगभग 11 वर्षों के बाद भी मेरा उच्चाधिकारी बनाने का सपना यही होकर रह गया है।

दोस्तों , उस समय से अबतक के बिहार सरकार के हमारे  सर्वेसर्वा यही सब तो रहे हैं।…..ये matter चल ही रहा था कि मंत्रिमंडल सचिवालय ( राजभाषा) विभाग, बिहार सरकार के कोई महोदय ने 27.05.2015 को फोन किया कि मुझे ‘ हिंदी पाण्डुलिपि प्रकाशन अनुदान योजना – 2014-15’ अंतर्गत पुरस्कार राशि ₹8,000/- का DD राजभाषा विभाग, पटना कार्यालय में आकर ले लें (साधिकार चेष्टा ), किन्तु दैहिक समस्या आ जाने के कारण  31.05 को ‘मैं’ होने का साक्ष्य सहित स्पीड पोस्ट (01.06.2015) से विभाग को रजिस्ट्री पोस्ट से मेरे पता पर DD भेजने के लिए आवेदन भेजा, कोई जवाब नहीं आने पर RTI एक्ट. 2005 के ज़रिये DD नहीं भेजने का कारण जानना चाहा , कई दिनों के बाद एक अलग मो.न. से यह भी कहा गया कि खुद सहित 2 गवाहों के साथ DD लेने पटना आइये।

मैंने SMS किया कि 2 गवाह के साथ पटना जाने -वापस आने में लगभग 800 KM की यात्रा/ ठहरने / खाने आदि में खर्च ₹3,500/- हो जाएंगे, फिर मात्र ₹4,500/- देकर ₹8,000/- के DD पावती पर हस्ताक्षर करा लेने में बिहार सरकार की दादागिरी तो बिलकुल समझी जायेगी, तभी तो ‘अपील’ पर ही RTI एक्ट का सदेह जवाब लेने 01.12.2015 को पटना बुलाया!! अब तो मेरे प्रति बिहार सरकार की नियति उदासीन, असहिष्णुता आदि लिए है। मुझे असम्मानित करने के लिए है।

ऐसे में बिहार की नयी सरकार  भी 2004 और 2005 वाली ही है, ऐसे में इन्हे बधाई देने की अपेक्षा मैंने अपना ₹8000/- का अदत्त DD – पत्र विरोध में आज दि. 21.11.2015 को स्पीड पोस्ट से वापस किया, इसके साथ ही महामहिम राज्यपाल, माननीय मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, राजभाषा विभाग के निदेशक और बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के सचिव को भी रजिष्ट्री पोस्ट से आज ही प्रतिलिपि भेजकर अपना एतदर्थ विरोध जता दिया है। बिहार सरकार के ऐसे रवैये के विरुद्ध पुरस्कार लौटाने वाला मैं पहला व्यक्ति हूँ । इसपर आपके बहुमूल्य प्रतिक्रिया का सम्बल भी मुझे चाहिए, दोस्तों !