कविता

कविता

केशर की क्यारियां खिल उठी
महक बिखरी चारों ओऱ
दफ़न हो गई
बारूदी गंध से सनी
आबो हवा
बर्फ़ीले पहाड़
चीड़ देवदार भी खुश
कश्मीर निखरा
जो बिखरा था आतंकी सायों से
बाशिन्दे किसी की शह पर
कुछ चलते गलत राहों पर
अब हुए
दबाव से मुक्त
अनुच्छेद से खुश
लहराते तिरंगे के संग
राष्ट्रीय गीत
राष्ट्रीय पर्वो पर
जम्मू कश्मीर
लेह लद्दाख के संग
मिलकर  गाएंगे
एकता , भाईचारे का
ये संदेशा
दुनिया को बतायेंगे
अमन की दुनिया में
केशर की क्यारियां
फिर से सजायेंगे
रहवासी वापस
अपने छुटे घरों में
रहने जाएंगे।
— संजय वर्मा ‘दृष्टि’