गीत/नवगीत

कलाधर छंद गीत : एक दीप प्रेम पूर्ण द्वार पे लगाइये

हर्ष व्याप्त यत्र तत्र राम के सुस्वागतार्थ, गीत सर्व मंगली सदा सदैव गाइये। अंधकार दूर हो प्रकाशमान हो भविष्य, एक दीप प्रेम पूर्ण द्वार पे लगाइये।। लोभ मोह काम क्रोध शत्रु हैं बड़े विराट राम नाम जाप से विकार ये भगाइए शांत चित्त धैर्यवान वीतराग हो विचार राम में लगे रहे विधान ये बनाइये अंधकारहारिणी […]

कविता

शब्द और भाव

शब्द उथला, भाव गहरा होता है राम शब्द में भला कहाँ ‘राम’ होता है! ‘राम’ कहना सरल बनना कठिन होता है, शब्द उथला भाव गहरा होता है शब्द ‘सच’ लिखना और सच लिखने में जमीन-आसमान का अंतर होता है अनंत पुरोहित ‘अनंत’

हास्य व्यंग्य

अजीब सपना

सपनों की भी अजीबोगरीब दुनिया है। कभी-कभी तो बहुत आश्चर्य जनक सपने आते हैं। वैज्ञानिक इस बात का पता नहीं लगा पाए हैं कि सपने क्यों और कैसे आते हैं। कभी कभार बहुत रोचक सपने आते हैं, कभी डरावने। कुछ लोग खुली आँखों से भी सपने देख लेते हैं हालाँकि मैं उनमें से नहीं हूँ […]

गीत/नवगीत

सैनिक

गलवान धरा पर शत्रु चढ़ा, तब क्रोधित सैनिक द्वार अड़ा विकराल विराट स्वरूप धरा रिपु सम्मुख है यमदूत खड़ा पद वक्ष रखा कर बाँध लिया, पटका उसको मुख मुष्टि जड़ा धर हस्त ध्वजा जयघोष किया, सुन गर्जन भूमि अराति पड़ा वह पर्वत गह्वर में चलता, चुपके छिपके अति कष्ट सहे। पितु मातु सहोदर से न […]

कुण्डली/छंद

वृद्धाश्रम

जीवन के इस मोड़ में, यादें ही अब शेष बेटा बेटी छोड़ के, चले गए परदेश चले गए परदेश, जरा भी याद न आई वृद्धाश्रम में बैठ, आँख माँ की भर आई चले चक्षु चलचित्र, मनस होता उद्दीपन भूली बिसरी याद, यही माता का जीवन छाती में रख पत्र को, वृद्धाश्रम में मात थाती बस […]

कविता

व्यूह में अभिमन्यु

चक्र व्यूह का गठन हो रहा फिर से आज विरोधी द्वारा दुर्योधन शकुनि संग मिलकर छल बल झोंक रहा है सारा लेश नहीं है नीति नियम का द्वार जयद्रथ रोक खड़ा है पता नहीं अर्जुन का, खोजो, क्षेत्र छोड़ कर किधर पड़ा है? घात लगा कर घात हो रहा अभिमन्यु आघात का मारा चक्र व्यूह […]

लघुकथा

सेल्फी

वह पुल की दीवार पर कोहनी टिकाए हथेलियों के मध्य अपना चेहरा रख कर नदी को निहार रहा था, किसी यादों में खोया हुआ। एकटक, अपलक दृष्टि नदी के जल पर गड़ी हुई थी। तभी छपाक की ध्वनि के साथ उसकी तंद्रा टूटी। उसकी दृष्टि आवाज की दिशा में मुड़ी। जहाँ एक बालिका अभी-अभी गिरकर […]

कविता

पिता बड़ा महान है

असाध्य कष्ट साधता, अनेक दुक्ख झेलता निरभ्र व्योम को झुका, खुशी समस्त मोलता गृहस्थ यान सारथी, सुधीर धैर्यवान है कुटुंब पालता पिता, पिता बड़ा महान है सुभावना भरे हुए, स्वभाव को छुपा लिया कठोर नारिकेल सा, कठोरता दिखा दिया सुता सुपुत्र के लिए, पिता बने जहान है कुटुंब पालता पिता, पिता बड़ा महान है अनंत […]

कहानी

नया सवेरा

“नहीं! नहीं!! और नहीं!!…….मैं एक विधवा को अपनी बहु नहीं बना सकती।” आभा तल्ख आवाज में लगभग चीख पड़ी। “पर क्यों माँ?! मैं प्रेम करता हूँ उससे और वह भी मुझसे उतना ही प्रेम करती है।” विप्लव ने माता से मनुहार किया। “समाज क्या कहेगा बेटा?” इस बार वाणी की तल्खी कम हो गई थी। […]

कहानी

सहानुभूति

तीसरी बार दरवाजे से वापस ड्राईंग रुम की ओर मुड़े अनिकेत के कदम। झुँझलाया हुआ अनिकेत सोफे पर पसर गया और बेबस आँखें दीवार पर टँगी टेलिविजन की ओर उठ गईं। समाचार वाचिका के बोल उसके कानों पर तीर से चुभ रहे थे जो लगातार बता रही थी कि भयानक संक्रामक महामारी कोरोना का कहर […]