लघुकथा

सेल्फी

वह पुल की दीवार पर कोहनी टिकाए हथेलियों के मध्य अपना चेहरा रख कर नदी को निहार रहा था, किसी यादों में खोया हुआ। एकटक, अपलक दृष्टि नदी के जल पर गड़ी हुई थी। तभी छपाक की ध्वनि के साथ उसकी तंद्रा टूटी। उसकी दृष्टि आवाज की दिशा में मुड़ी। जहाँ एक बालिका अभी-अभी गिरकर […]

कविता

पिता बड़ा महान है

असाध्य कष्ट साधता, अनेक दुक्ख झेलता निरभ्र व्योम को झुका, खुशी समस्त मोलता गृहस्थ यान सारथी, सुधीर धैर्यवान है कुटुंब पालता पिता, पिता बड़ा महान है सुभावना भरे हुए, स्वभाव को छुपा लिया कठोर नारिकेल सा, कठोरता दिखा दिया सुता सुपुत्र के लिए, पिता बने जहान है कुटुंब पालता पिता, पिता बड़ा महान है अनंत […]

कहानी

नया सवेरा

“नहीं! नहीं!! और नहीं!!…….मैं एक विधवा को अपनी बहु नहीं बना सकती।” आभा तल्ख आवाज में लगभग चीख पड़ी। “पर क्यों माँ?! मैं प्रेम करता हूँ उससे और वह भी मुझसे उतना ही प्रेम करती है।” विप्लव ने माता से मनुहार किया। “समाज क्या कहेगा बेटा?” इस बार वाणी की तल्खी कम हो गई थी। […]

कहानी

सहानुभूति

तीसरी बार दरवाजे से वापस ड्राईंग रुम की ओर मुड़े अनिकेत के कदम। झुँझलाया हुआ अनिकेत सोफे पर पसर गया और बेबस आँखें दीवार पर टँगी टेलिविजन की ओर उठ गईं। समाचार वाचिका के बोल उसके कानों पर तीर से चुभ रहे थे जो लगातार बता रही थी कि भयानक संक्रामक महामारी कोरोना का कहर […]

कुण्डली/छंद

आसन

आसन प्राणायाम से, देह रहे यह स्वस्थ। चंचल चितवन शांत हो, आत्मा बने तटस्थ।। आत्मा बने तटस्थ, मोह माया को छोड़े। प्रभु सह बढ़ता प्रीत, जगत बंधन को तोड़े।। कह अनंत कविराय, करो प्रतिदिन पद्मासन। निज को दो आयाम, सबेरे उठकर आसन।। *अनंत पुरोहित ‘अनंत’*

गीत/नवगीत

अरिदल जो देखे आँख उठा…..

मन में ज्वाला सी दहक उठे, औ अग्नि नयन से बरसे अरिदल जो देखे आँख उठा, निज प्राणों को फिर तरसे देशभक्ति की धार हृदय से, टप टप टप टप टपके, हिम प्रदेश में तना खड़ा है, पलक नहीं वह झपके, है शत्रु सामने कुटिल बड़ा, छल आयुध लेकर लपके, भारत माँ का लाल अड़ा […]

कविता

श्रमिक

सींच पसीने से खेतों को, उदर जगत का वह भरता विडंबना देखो यह कैसी भूखे पेट वही मरता नींव भवन की रखते रखते हुआ नींव सा अनदेखा कंगूरा छाती चढ़ बैठा है विधि की ऐसी रेखा सड़क बनाने वाला कर्मठ शयन सड़क पर ही करता विडंबना देखो यह कैसी भूखे पेट वही मरता दुनिया की […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

षड़यंत्रों के चक्रवात में लाँघ गई सीता रेखा

षड़यंत्रों के चक्रवात में लाँघ गई सीता रेखा छुपे महात्मा की भूषा में पाखंडी हमने देखा विपदा की इस विकट घड़ी में रोग शोक चहुँदिग फैला पापी रावण के मन में फिर सोच एक उपजा मैला श्रमिक बंधु में भय संचारण पापी को करते देखा षड़यंत्रों के चक्रवात में लाँघ गई सीता रेखा त्रस्त हुए […]

मुक्तक/दोहा

अनंत के दोहे

ज्ञानी उसको मानिए, समरुप करे प्रकाश जैसे चंदन वृक्ष से, चहुँ दिग फैले वास जग में नर वह बाँटता, जो है उसके पास मोरी से दुर्गंध है, चंदन करे सुवास रस्सी इतनी तानिए, कहीं न जाये टूट साधो उतनी देह को, प्राण न जाये छूट दोहन इतना कीजिए, लात न मारे गाय लात निसर्ग बड़ी […]

भजन/भावगीत

शिव वंदना

अनादि भी अनंत भी, असीम है विराट है शिवे धड़ंग नंग है, भुजंग भी ललाट है त्रिनेत्र शंभु भाल में, सुभाष भस्म अंग है किरीट चंद्र है बना, जटा पवित्र गंग है भगीरथी प्रचंड को, स्वयं शिखा लपेट के धरा बची चपेट से, धरा नदी समेट के अघोर है सुनेत्र है, सुनील नीलकंठ है पिनाक […]