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  • छद्म वेश 

    छद्म वेश 

    शाम  धुंध में डूब चुकी थी होटल की ट्यूटी खत्म कर तेजी से केमिस्ट की दुकान पर पहुंची। उसे देखते ही केमिस्ट सेनेटरी पैड को पेक करने लगा। रंजना ने उससे कहा इसकी जगह मेन्सुअल कप...


  • लघुकथा – जीने की वजह

    लघुकथा – जीने की वजह

    सुबह वृद्धाश्रम पहुँच कर सारी कार्यवाही पूरी कर बेटा बहू जाने लगे तो हतप्रभ सा पोता बोला माँ दादाजी को भी साथ ले चलो, सुनते ही बहू ने उसका हाथ कस कर पकड़ा  और घसीटते हुए...

  • लघुकथा – जोकर

    लघुकथा – जोकर

    दर्शक दीर्घा में बैठे हुए सोच रही थी कलाबाजियां दिखाते हुए तीन फिट के जोकर को जो चेहरे पर निरंतर मुस्कुराहट लिए करतब दिखा रहा था।  उसकी अजीबोगरीब हरकतों से बच्चें उछल उछल कर तालियां बजा...

  • दिसंबर चलने को है

    दिसंबर चलने को है

    पैरों की थकन क्या कहूँ उम्र हुई चलते चलते हर बार दिसंबर आता है यादें सुहानी छोड़ जाता है दिसम्बर की इतनी कहानी है जैसे याद आई गुजरी जवानी है कभी टीस सी रह जाती है...

  • आँखे

    आँखे

    आँखे भूरी सुनहरी नीली आँखे गहरी झील सी आँखे मुदी पलकों में देखती सपनें आँखे खुली तो ख्वाबों को हकीकत में बदलती आँखे चित चोर तेज धार सी आँखे स्वपनीली मदहोश सी आँखे घनेरी पलकों में...

  • उड़ान बाकी है

    उड़ान बाकी है

    तिनकों को जोड़कर बना घोंसला हमारा इस प्यारे ‌से घोंसले में । अभी-अभी जन्मी हूँ। सुकोमल नरम सी नन्हें से परो का निकलना बाकी है दिन भर खाने की तलाश में माँ का चुग्गा लाना बाकी...

  • मेरे अल्फ़ाज़

    मेरे अल्फ़ाज़

    आज मेरे अल्फ़ाज़ मुझसे खफा हो गए । खिड़की के रास्ते दफा हो गए । कितने मासूम लगते मुंह के अंदर । बाहर निकलते ही हवा हो गए । हाय मेरे अल्फ़ाज़ मुझको दगा दे गए...

  • देहरी उदास है

    देहरी उदास है

    द्वारे को दीप भी देहरी उदास। तेरे आगमन की आंगन को आस। आओगे हे दिल में  आस। बांट लोगे दुःख ऐसी आस। फूल भी कुम्हला रहे देख बाट। सुनी गली पड़ी हे और हाट।  हृदय में...