लघुकथा

नया ज़माना

संदीप स्वयं को आधुनिक मानता था. उसका कहना था कि जैसा ज़माना हो उसके अनुसार ही चलना चाहिए. ज़माने के साथ रफ्तार मिलाने में वह अक्सर यह भी नही सोंचता था कि इसका परिणाम क्या होगा. उसके बड़े भाई अक्सर उसे समझाते थे कि जमाने के हिसाब से चलना तो ठीक है लेकिन बदलते समय […]

लघुकथा

बंटवारा

धीरज का ध्यान सुबह से ही पड़ोस में होने वाली गतिविधियों पर था. वह बड़ी बेचैनी से उधर से आती हर आवाज़ को सुन रहे था. कुछ साल पहले हुए बंटवारे ने ना सिर्फ मकान के बीच एक दीवार खींच दी बल्कि दिलों में भी दरार पैदा कर दी. मन मुटाव इतना बढ़ा कि एक […]

लघुकथा

आत्मिक सुख

बसेसर कुछ देर अपने आराध्य कान्हा जी के भजन गाने के इरादे से ढोलक लेकर बैठा ही था कि किसी ने दरवाज़ा खटखटाया. वह उठ कर गया तो सामने उसका मित्र गंगाधर खड़ा था. “आओ भीतर आओ बहुत बाद दिखे.” बसेसर ने उसे अंदर बुलाते हुए कहा. गंगाधर फर्श पर बिछी चटाई पर बैठ गया. […]

लघुकथा

मुठ्ठी की रेत

बाबूजी अपना चश्मा ढूंढ़ रहे थे. उन्होंने नौकरानी से पूंछा तो वह हंसते हुए बोली “यह क्या आपके गले में लटक रहा है.” उनकी भूलने की आदत की वजह से ही बहू ने दोनों कमानियों पर डोरी बांध दी थी कि चश्मा गले में पड़ा रहेगा. इधर उधर नहीं होगा. लेकिन उन्हें यह भी याद […]

लघुकथा

परिणिति

पंडितजी ने दो माह पूर्व का शुभ मुहूर्त निकाला. इससे पहले कोई तिथि शुभ नही थी. किंतु सुहास को पंद्रह दिनों में विदेश जाना था. उससे पूर्व ही वह विवाह करना चाहता था. उसने कहा कि वह मुहूर्त वगैरह में यकीन नही करता. लेकिन रश्मी के पिता यात्रा भी मुहूर्त देख कर करते थे. विवाह […]

लघुकथा

दया

जैसे ही गाड़ियां लाल बत्ती पर रुकीं शन्नो अपने बच्चे को गोद मे उठा कर भागी. वह कार के शीशो पर थपथपा कर भीख मांग रही थी. बाहर चिलचिलाती धूप थी. बच्चा भूख से बिलख रहा था. इस दृश्य ने कई लोगों के मन में दया पैदा की. जिसे जितना सही लगा उसे दे दिया. […]

लघुकथा

असहजता

दरवाज़ा खोलते ही सोनल ने सामने पापा को देखा तो उनकी छाती से लग गई. पापा उसके इस नए फ्लैट में पहली बार आए थे. चाय नाश्ते के बाद वह उन्हें पूरा फ्लैट दिखाने लगी. फ्लैट दिखाते हुए वह बड़े उत्साह के साथ सभी चीज़ों का बखान कर रही. फ्लैट दिखा लेने के बाद उसने […]

लघुकथा

वंश वृद्धि

भैंस के बच्चे को लाकर हवेली के आंगन में बांधा गया था. अपनी माँ से बिछड़ा बच्चा जोर जोर से रंभा रहा था. कुछ देर में देवी के मंदिर में उसकी बली चढ़ाई जानी थी. यह सब देख विभावरी बहुत व्याकुल थी. समय आने पर जब उसे बली के लिए ले जाया जाने लगा तो […]

लघुकथा

रात

दूर तक फैली सरहद. अंधेरे में पूरी मुस्तैदी से उसकी निगरानी करता गुरबख़श सिंह. आज दीवाली थी. शाम को ही घरवालों से बात हुई थी. सब उसे याद कर रहे थे. उसकी दस महीने की गुड्डी की यह पहली दीवाली थी. वह पूरी तरह चौकन्ना था. ज़रा सी चूक दहशतगर्दों को उसके मुल्क में घुसने […]

लघुकथा

लघुकथा- अनपढ़

वंदना का आज का दिन भी अन्य दिनों की भांति आरंभ हुआ था किंतु खास था. आज उसकी तपस्या फलित होने वाली थी. उसके व्यक्तित्व को नई पहचान मिलने वाली थी. आज रह रह कर उसे पिछले दिन याद आ रहे थे. प्राण पण से वह पति की सेवा करती थी. सास की एक आवाज़ पर […]