भजन/भावगीत

हे श्याम

हे श्याम! हे श्याम!! हे श्याम!!! हे श्याम!!!! तुम बिन सूना-सूना गोकुल, सूना है ब्रज धाम। हे श्याम! हे श्याम!! हे श्याम!!! हे श्याम!!!! सूना  है  माता   का आँचल। पसरा रहता है जो  हर पल। पहन आध, पहनाऊँ आधा- आये जब काधा लेकर कल।। कर ले वह विश्राम। हे श्याम! हे श्याम!! हे श्याम!!! हे […]

कविता

कन्हैया जेल में है

हे देवकी-वसुदेव! क्या अभी भी तुम इतने लाचार हो! जिसने तुम्हें कैद से बाहर किया माँ-बाप का दर्जा दिया जन्मते ही यमुना को पछ़ाड़ा कालिय नाग को नाथकर सुधारा अगणित राक्षसों पर भारी था यशोदा-नन्द का बनवारी था छाछ पर नाचा भी वह अल्हड़ राधा के अनूठे प्यार में पड़ा कंस से खुलेयाम लड़ा अन्याय […]

गीत/नवगीत

चलो अयोध्या धाम

चलो अयोध्या धाम, विराजेंगे  अपने    श्रीराम। कभी  राम झुठलाये जाते। नकली चरित बताये जाते। आतंकी बाबर के सम्मुख- मनगढ़ंत  कहलाये   जाते।। कैसी भी हो रात, किन्तु होती है सुबह ललाम। वंशज   बहुधा जीते – हारे। अनुयायी  के   वारे – न्यारे। रक्तपात  के छद्म खेल में – रामभक्त तन मन धन वारे।। हुआ बहुत बलिदान, […]

गीत/नवगीत

वचन पर्व राखी

थाल सजाकर बहन कह रही,आज बँधा लो राखी। इस  राखी  में  छुपी हुई  है, अरमानों  की  साखी।। चंदन, रोली, अक्षत,  मिसरी, आकुल  कच्चे-धागे। अगर नहीं आए तो  समझो, हम हैं  बहुत अभागे।। क्या सरहद से एक दिवस की,छुट्टी ना मिल पायी? अथवा   कोई  और  वजह है, मुझे  बता दो भाई ? अब आँखों को चैन […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मारकर पत्थर न रोको राह, प्यारे, भष्म कर देगी जलाकर आह, प्यारे। पत्थरों को चुन नई सड़कें गढ़ेंगे, तोड़ देंगे छल कपट की चाह, प्यारे। त्याग साहस से बनी बुनियाद घर की, मत बनाओ स्वार्थ में ऐशगाह, प्यारे। चापलूसी में गलत के साथ हो गर, पारखी कैसे कहेगा वाह, प्यारे। दूर से नापी न जाएगी […]

गीत/नवगीत

सावन क्यों होता मनभावन?

सूरज अपनी रश्मिपुंज से, जल का वाष्पन करता है। धीरे – धीरे नभ में लाकर, हवा संग में धरता है। अपनेपन की सरस ऊष्म से, ये जल-वाष्प मेघ बनते। धरा सुंदरी को व्याकुल लख, मिलन हेतु आकुल रहते।। उमड़ घुमड़कर गरज सहमकर, सूरज के सम्मुख जाते। कभी नम्र हो कभी उग्र हो, दिल की चाहत […]

भाषा-साहित्य

प्रेमचन्द के हंस का संजय

सांस्कृतिक पतन के दौर में पूर्वजों को नाकाम, असफल, अयोग्य, अकर्मण्य, अप्रगतिशील और न जाने क्या- क्या कहने का चलन बढ़ गया है। वेदव्यास, कबीर और तुलसी को गरियाने की परम्परा में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और प्रेमचन्द को भी घसीटा जाने लगा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कुकर्म में तथाकथित इनके अपने ही […]

गीतिका/ग़ज़ल

जिंदगी

जिंदगी इक जंग का मैदान है, बीच में इसके फँसा इंसान है। पार करना जिंदगी की सिंधु को, मान लो होता नहीं आसान है। है परीक्षा ज्यों हमारी जिंदगी, पास अथवा फेल से अनजान है। कर्म से प्रारब्ध से निज भाग्य से, हाथ हर आया – गया सामान है। है चुनौती जिंदगी में लाख लेकिन, […]

गीतिका/ग़ज़ल

काशी

बनारस में भगीरथ गंग की शुचि धार होती है, सभी की जिंदगी इस नीर से भव पार होती है। पिनाकाकार गंगा के तटों पर राजती काशी, पहर आठों शिवालय में महा जयकार होती है। छने भाँगों की बूटी भस्म काया भाल पर टीका, त्रिफल डमरू गले में साँप की फुँफकार होती है। कबीरा दास तुलसी […]

कविता

ज़द बनाम हद

कोरोना ने अनधिकार अधिकार कर लिया हमारी साँसों पर मिलना जुलना, हाथ मिलाना गले लगना और लगाना प्यार से अथवा तिरस्कार से रोक दिया रोक दिया घर से बाहर निकलना बाजार में लार टपकाना फिसलना, निरर्थक घूमना अखाद्य और खाद्य को खाना घर न आने के सौ सो बहाने बनाना रोक दिया रोक दिया रिश्तों […]