कविता

कविता

आज मिलने चले झोपड़ी से महल। आज खिलने चले कीचड़ों में कमल।। आई समभाव की इक सुहानी हवा। थोड़ी माँ की दुआ,थोड़ी दर्दे – दवा।। आज सूरज भी निकलेगा समभाव से। माथ फिर से उठेगा त्वरित ताव से।। स्वेद-सरवर से सरिता बहेगी धवल। भूख की ज्यामिती होगी सीधी-सरल।। अब पिघलने लगीं पाँव की बेड़ियाँ। अब […]

पुस्तक समीक्षा

समीक्षा : बहुमुखी बहुभाषी ज्योति

रामकृष्ण मिशन शिलांग की संयोजना में प्रकाशित त्रैमासिक  ई’ पत्रिका का दूसरा अंक  Autom 2 मुझे  प्राप्त हुआ। हिन्दी ,अंग्रेजी तथा खासी भाषा समावेशित इस पत्रिका को भाषा विशेष में क्रम अनुसार ‘Light’, ‘ज्योति’ , ‘ Ka Jingsai’ नाम दिए गए हैं जिसका एक ही अर्थ निकलता है ,”ज्ञान” । कविता लेख ,कहानी ,समाचार आदि […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ज़िंदगी जिंदादिली को प्यार लिखना, अजनबी को मत कभी हमयार लिखना। अनछुए कोरे कपोलों की परिधि पर, तर्जनी से यूँ नहीं श्रृंगार लिखना। हैं शरम से लाल मेरे अनजुठे लब, मत जुठाकर प्रीति का अभिसार लिखना। नत नयन में ख़्वाब मत कोई पिरोना, नींद में आकर नहीं अधिकार लिखना। दे दखल ना तूँ मेरे हक […]

समाचार

राष्ट्रीय शिक्षा पुरस्कार से सम्मानित हुए डॉ राकेश कुमार आर्य

उत्तर प्रदेश के राष्ट्रवादी इतिहास लेखक 54 वर्षीय डॉ राकेश कुमार आर्य को भारत सरकार  द्वारा उनके ऐतिहासिक लेखन “भारत का 1235 वर्षीय स्वतन्त्रता संग्राम का इतिहास (भाग 1,2,3)” के लिए “राष्ट्रीय शिक्षा पुरस्कार 2017” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें 8 अप्रैल 2020 को एक कार्यक्रम में केन्द्रीय मन्त्री के कर कमलों से […]

कविता

उम्मीद

उम्मीदों के भँवर जाल में फँसकर मानव, सपनों के अगणित तानों को तुड़प रहा है। चंचल इन्द्रिय पर संयम के अंकुश डाले, हृदि सरगम में प्रिय गानों को तुड़प रहा है। द्वेष दम्भ माया मद मत्सर दुर्विचार पर, दुनिया में नव सृजन कराती भी उम्मीदें- उम्मीदों से होता जीवन का सब किसलय, उम्मीदों  से हर […]

कविता

नेताजी सुभाष

नेताजी दिल में बसते थे, बसे रहेंगे, नेताजी से विमुख नहीं हम होने वाले। खोया था हमने सुभाष को नेताजी को, पुनः नहीं उनकी यादें हम खोने वाले। धोया था जिसने माथे से स्याह दाग को, उसके अहसानों को हम ना धोने वाले। जिसने भारत नहीं विश्व को आजादी दी, उसे भूल हम नहीं चैन […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

अँधियारे को मत धिक्कारो, दीपक एक जलाओ तुम। सोच बुराई की राहों को, उचित राह अपनाओ तुम। बुरे काम का बुरा नतीजा आज नहीं तो होगा कल- इसीलिए दुख लाख सहो पर मत भटको – भटकाओ तुम।। डॉ अवध

राजनीति

जन विमुख जनतन्त्र

छब्बीस जनवरी को फिर से मनाया जाएगा गणतन्त्र दिवस। ठीक वैसे ही जैसे पाँच महीने पहले मनाया गया था स्वाधीनता दिवस। ये दोनों हमारे जन्म से बहुत पहले से मनाए जा रहे हैं। शायद आप भी न जन्में हों या नन्हें-मुन्ने रहे हों। सच की दस्तक भी नहीं जन्मा था। यकीनन नहीं जन्मा था। हमने […]

भाषा-साहित्य

जीने की कला का दस्तावेज : “जीना इसी का नाम है”

साहित्य का मूल अभिप्राय है सहित की भावना का विकास करना। वही मनुष्य जीता हुआ माना जाता है जिसमें साहित्य के प्रति लगाव हो। जो सबको साथ लेकर चल सके। जिसका जीवन जीने के पावन उद्देश्य से भरा हो। जो गर्व से कह सके कि उसने जीवन जीया है और सबको भी ऐसा ही लगे। […]

गीतिका/ग़ज़ल

धूप-छाँव

कभी तुम धूप लगते हो कभी तुम छाँव लगते हो, शहर की बेरुखी में तुम तो अपना गाँव लगते हो। बताओ मैं भला कैसे कहूँ अपनों ने ठुकराया, सभी राहें हुई जो बंद अंतिम ठाँव लगते हो। कभी जब बात करते हो लुटे अधिकार की अपने, सगे  सम्बंधियों के बीच कौआ-काँव लगते हो। जो कहते […]