राजनीति

गणतन्त्र के सात दशक

 परिवर्तन का जोश भरा था, कुर्बानी के तेवर में। सब कुछ हमने लुटा दिया था, आजादी के जवर में।। हम खुशनसीब हैं कि इस वर्ष 26 जनवरी को 71वाँ गणतन्त्र दिवस मना रहे हैं। 15 अगस्त सन् 1947 को पायी हुई आजादी कानूनी रूप से इसी दिन पूर्णता को प्राप्त हुई थी। अपना राष्ट्रगान, अपनी […]

राजनीति

संस्कृति संरक्षण और शिक्षा

यह कल्पना करना ही भयावह लगता है कि अगर शिक्षा न होती तो क्या होता? अगर शिक्षा न होती तो प्राचीनतम् विचारों का क्रमबद्ध संकलन होना सम्भव नहीं होता। गुरुकुल या विद्यापीठ अथवा आज के अत्याधुनिक विद्यालय नहीं होते। समाजीकरण की सतत् प्रक्रिया सुचारु नहीं हो पाती। हमारी अनमोल धरोहर जिसे हम आज भी गर्व […]

कविता

चल रे! मतदान करें

चल रे! मतदान करें देशप्रेम को आगे रख- सबका आह्वान करें, चल रे! मतदान करें। लोकतन्त्र में हाथ बँटा- मत का सम्मान करें, चल रे! मतदान करें। महापर्व के अवसर पर- मन से गुणगान करें, चल रे! मतदान करें। मनचाहे प्रत्याशी चुन- इतना अवदान करें, चल रे! मतदान करें। सही बटन पर जाए मत- इसका […]

राजनीति

परीक्षा : उम्मीदवार की या जनता की

जनतन्त्र जनतामय होता है। जनता के बीच से जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि जननायक, जननेता, जनसेवक या ऐसे ही बहुतेरे विशेषणों से सुशोभित होता है। ग्राम पंचायत से संसद तक निर्वाचन की प्रक्रिया ही आधारभूत है। संविधान द्वारा निर्धारित मौलिक अर्हताओं को पूरा करके किसी भी एक पद के लिए दर्जनों उम्मीदवार मतदाताओं के समक्ष […]

गीत/नवगीत

तुझको कोटि नमन उन्नीस

मिला बहुत खोया तनिक,                     प्यारा   वर्ष   उनीस। करो  पूर्ण  हर  कामना,                     सादर स्वागत बीस।। तीन सौ सत्तर का कलंक तूने माथे से धोया था। काश्मीर की धवल कड़ी को लेकर हार पिरोया था।। मर्दों की […]

गीत/नवगीत

जाग भी जाओ

हे मानुस! तूँ सभी जीव में ज्ञानी है – विज्ञानी है। जैव – जगत  में  नहीं  दूसरा कोई तेरा सानी है। सकल जगत की इच्छाओं का तूँ राजा है, रानी है। सच्चाई   से   दूर   भागना बस तेरी नादानी है।। मैं  मुर्गा   बन  गला फाड़कर तुझे जगाने आता हूँ। सूरज की किरणों में शामिल होकर धूप […]

कविता

नवल बसंत

संसद के गलियारे में गूँजा भारत का गान। पाने वाला है भारत फिर से खोया सम्मान।। बँटवारे का दाग मिटाने को हम हैं तैयार। देर सही पर अब ना छोड़ेंगे अपना अधिकार।। एक धर्म का एक पंथ का नहीं चलेगा राज। शांति-दूत अब बना कबूतर केसरिया-सा बाज।। सात दशक के उहा – पोह का हो […]

सामाजिक

स्त्रियों के लिए स्वर्ग है मेघों का घर मेघालय

जंगलराज से आदमराज में परिणत होती हुई दुनिया स्त्रियों को गौड़ बनाकर पुरुष प्रधान हो गई। समाज और धर्म के समस्त विधान पुरुषों के अहंकार और महत्व के पोषक हो गए। नारी जाति क्रमश: ढकेली जाने लगी और शोषण जनित पतन के परिणाम स्वरूप गर्भ में ही मारी जाने लगी। ‘यत्र नार्येस्तु पूज्यंते रमन्ते तत्र […]

कविता

सपना एक बीज मन्त्र

जिसके दिल में सौम्य सुभाषित सपन सलोना हो। जिसके दिल में बेहिसाब हर पाना – खोना हो।। ऐसे दिल के स्वामी सम्मुख सादर नत जग है। सपनों को पूरा करने के हेतु मगन मग है।। सपनों के सागर की लहरें नभ को छू लेतीं। सीपी – शंखों को उछालकर आँचल भर देतीं।। इसी स्वप्न में […]

कविता

माँ और मैं

मेरे  सर  पे  दुवाओं का घना साया है। ख़ुदा जन्नत से धरती पे उतर आया है।। फ़कीरी में  मुझे पैदा किया, पाला भी। अमीरी में लगा मुँह – पेट पे, ताला भी।। रखा हूँ पाल, घर में शौक से कुत्ते, पर। हुआ छोटा बहुत माँ के लिए, मेरा घर।। छलकती आँख के आँसू, छुपा जाती […]