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  • सपना एक बीज मन्त्र

    सपना एक बीज मन्त्र

    जिसके दिल में सौम्य सुभाषित सपन सलोना हो। जिसके दिल में बेहिसाब हर पाना – खोना हो।। ऐसे दिल के स्वामी सम्मुख सादर नत जग है। सपनों को पूरा करने के हेतु मगन मग है।। सपनों...

  • माँ और मैं

    माँ और मैं

    मेरे  सर  पे  दुवाओं का घना साया है। ख़ुदा जन्नत से धरती पे उतर आया है।। फ़कीरी में  मुझे पैदा किया, पाला भी। अमीरी में लगा मुँह – पेट पे, ताला भी।। रखा हूँ पाल, घर...

  • अपनी कद्र करो

    अपनी कद्र करो

    जनता कद्र करेगी जब तक नेता की, नेतागण    यूँ    ही जनता को लूटेंगे। प्रतिभाएँ सड़कों पर कुचली जाएँगी, लोकतन्त्र  के  भाग्य रोज ही फूटेंगे। अपनी क्षमता को पहचानों, कद्र करो, मक्कारों   के   अहंकार   तब ...


  • कर्मवीर के कदम चूम लें

    कर्मवीर के कदम चूम लें

    कर्मवीर वह कहलाता जिसकी रुकती नहिं चाल। कर्मवीर वह कहलाता जिसका अनुगामी काल। जिसकी चलती हैं हर साँसें सदा कर्म के साथ- कर्मवीर वह कहलाता, नहिं वृथा बजाए गाल।। नहीं झुका है नहीं झुकेगा इसका उन्नत...

  • बिहारीपन में रँगी दुनिया

    बिहारीपन में रँगी दुनिया

    अंग्रेजों द्वारा भारत को पर्वों की भूमि कहा जाना आज भी उतना ही प्रासंगिक है। भारत की आत्मा धर्म पर आधारित है जिसमें नैतिकता, शुचिता और परोपकार भी भावना कूट कूटकर भरी है। हजार वर्षों के...

  • सोच सको तो सोचो

    सोच सको तो सोचो

    गिलगित बाल्तिस्तान हमारा है हमको लौटाओ। वरना जबरन ले लेंगे मत रोओ मत चिल्लाओ।। खून सने कातिल कुत्तों से जनता नहीं डरेगी। दे दो वरना तेरी छाती पर ये पाँव धरेगी।। तेरी मेरी जनता कहने की...

  • तिमिर

    तिमिर

    चिंतन पर तिमिर का कब्जा पहले भी था आज भी है पर न रहे भविष्य में इसलिए वर्तमान में क्रांति करके ज्ञान की रौशनी द्वारा अज्ञान के तिमिर को छिन्न भिन्न कर चिंतन को मुक्त कराना...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    फूल सा खिलने लगा हूँ आजकल, फक्र  से   उड़ने लगा हूँ आजकल। खूँ – पसीने  से  कमाई  जब किया, काम  पर  मरने लगा हूँ आजकल। जब  निवाले  को मिलाया भूख से, फूलने – फलने  लगा  हूँ...