इतिहास

बर्तानिया तुम्हारा, हिंदोस्तां हमारा : पं० मेलारम वफ़ा

पाकिस्तानी उर्दू अखबार जमींदार के सम्पादक मौलाना जफ़र अली खाँ ने एक बार किसी नौसिखिये शायर से आज़िज़ होकर उसे समझाते हुए कहा था- तोड़ता है शायरी की टांग क्यों ऐ बेहुनर, शेर कहने का सलीका सीख मेला राम से। सियालकोट (वर्तमान पाकिस्तान) में दीपोके गाँव में 26 जनवरी 1895 को पं० मेलाराम वफ़ा जी […]

राजनीति

भारतीय गणतन्त्र के सात दशक

परिवर्तन का जोश भरा था, कुर्बानी के तेवर में। उसने केवल कीमत देखी, मंगलसूत्री जेवर में।। हम खुशनसीब हैं कि इस वर्ष 26 जनवरी को 74वाँ गणतन्त्र दिवस मना रहे हैं। 15 अगस्त सन् 1947 को पायी हुई आजादी कानूनी रूप से इसी दिन पूर्णता को प्राप्त हुई थी। अपना राष्ट्रगान, अपनी परिसीमा, अपना राष्ट्रध्वज […]

हास्य व्यंग्य

जन विमुख जनतन्त्र

छब्बीस जनवरी को फिर से मनाया जाएगा गणतन्त्र दिवस। ठीक वैसे ही जैसे पाँच महीने पहले मनाया गया था स्वाधीनता दिवस। ये दोनों हमारे जन्म से बहुत पहले से मनाए जा रहे हैं। शायद आप भी न जन्में हों या नन्हें-मुन्ने रहे हों। सच की दस्तक भी नहीं जन्मा था। यकीनन नहीं जन्मा था। हमने […]

समाचार

कैबिनेट मंत्री सर्बानन्द सोनोवाल को राष्ट्रवादी पुस्तक इनसे हैं हम भेंट की गई

गुवाहाटी। पुस्तक मेले के 33वें संस्करण में असम के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और कैबिनेट मत्री पत्तन, नौवहन, जलयान एवं आयुष मत्रालय भारत सरकार माननीय सर्बानंद सोनोवाल को राष्ट्रवादी पुस्तक इनसे हैं हम भेंट की गई। पुस्तक की सह लेखिका अवनीत कौर दीपाली एवं सह लेखिका कुमुद शर्मा ने इनसे हैं हम भेंट करते हुए माननीय सोनोवाल […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

गुरु दक्षिणा में अंगूठे का सच

हमारे देश ही नहीं अपितु समस्त विश्व में गुरु-शिष्य परम्परा किसी न किसी रूप में आदि काल से सर्वदा विद्यमान है। गुरु से सदैव सर्वगुण संपन्न होने की अपेक्षा की जाती है। संत कबीर ने शिष्य को मिट्टी का कच्चा घड़ा तथा गुरु को कुम्भकार बताया। इतना ही नहीं, गुरु को ब्रह्मा, विष्णु व महेश […]

कविता

हे पुरुष! पुरुषत्व तेरा है छलावा

हे पुरुष! नारियों के हेतु सौ – सौ वर्जनाएँ और अपने हाथ सौ अधिकार लेकर, न्याय के सर्वोच्च पद को कब्जियाए, खींचते हो व्यर्थ ही लक्ष्मण रेखाएँ और फिर रावण बने आते तुम्हीं, सच बताओ, जल रहे प्रतिशोध में या कि तेरी वासना तट तोड़कर खींच लाई थी तुम्हें याचक बना…..। हे पुरुष! ये न […]

समाचार

राष्ट्रवादी कृति इनसे हैं हम शिक्षको में भी लोकप्रिय

आजादी के अमृत महोत्सव के परिप्रेक्ष्य में गुमनाम पूर्वजों की यशगाथा पर आधारित राष्ट्रवादी पुस्तक इनसे हैं हम की लोकप्रियता शिक्षकों में भी बढ़ रही है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अवधेश कुमार अवध द्वारा इक्यावन लेखकों के सह लेखन में लिखित इक्यावन प्रतिनिधि पूर्वजों की शौर्यगाथा है इनसे हैं हम। यह पुस्तक श्याम प्रकाशन, जयपुर से […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

पूर्वोत्तर भारत में आध्यात्मिक सूर्योदय के अग्रदूत थे स्वामी विवेकानन्द

स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते। जी हाँ, राजा की पूजा उसके देश में होती है वो भी भय से इसके विपरीत विद्वान् की पूजा दुनिया भर में होती है वो भी पूरी श्रद्धा से। उन्नीसवीं शताब्दी का अंत और बीसवीं शताब्दी की शुरुआत एक ऐसे परिवेश में हुई जिसमें अधिकांश दुनिया परतन्त्र थी। न […]

सामाजिक

सोनपुर का मेला

सोनपुर का मेला जो कभी आजादी की योजना-स्थल के रूप में जाना जाता था, अब से आवाज दबाने के रूप में जाना जाएगा। जब कभी रिजनीति लड़खड़ाती है तो साहित्य आगे बढ़कर उसे थाम लेता है, वाला युग समाप्त हो रहा है। अब तो दोनों लड़खड़ा रहे हैं और दोनों एक-दूसरे से गुत्थम गुत्थ कर […]

कविता

हम भेड़ हैं

हाँ, हम भेड़ हैं हमारी संख्या भी बहुत अधिक है सोचना-विचारना भी हमारे वश में नहीं न अतीत का दुःख न भविष्य की चिंता बस वर्तमान में संतुष्ट क्रियाशील, लगनशील, अनुगामी अगुआ के अंध फॉलोवर अंध भक्त, अंध विश्वासी अनासक्त संन्यासी क्योंकि हम भेड़ हैं। हाँ, हम भेड़ हैं किंतु खोज रहे हैं उस भेड़िये […]