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  • ग़ज़ल

    दास्ताँ दर्दे दिल की सुनाते रहे। वो हमें देख कर मुस्कराते रहे। टूट करके बिखरने से क्या फायदा। ये गलत है उन्हें हम सिखाते रहे। जब कभी देखा गम़गीन मैने उन्हें। आँख में अश्क अपने छुपाते...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    कुछ दीप आँधियों में जलते हैं तालाबों में ही कमल खिलते हैं दामन बुराई का छोड़ दो तुम हर नर में नारायण मिलते हैं इस तरह ख्वाबों मे, वो आने लगे गीत हम प्यार के गुनगुनाने...

  • दोहे

    दोहे

    फैशन के इस दौर में, जली अनूठी आग अधनंगा तन को लिये,बिटिया घूमे बाग !! माँ को कहते माम अब,डैड बन गये बाप अम्मा बापू क्या बुरा,खुदी बताओ आप !! गंगाजल गंदा लगे, सभी पी रहे...

  • मुक्तक (बेख़बर देहलवी)

    मुक्तक (बेख़बर देहलवी)

    मुक्तक  जन्नत  है  यहीं  पर  उनके पाँवों में मिलता  है  सुकून  इनकी पनाहों मैं हर बला जिसके दम से टल जाती है सच बहुत है असर माँ की दुआओं में !! बेख़बर देहलवी परिचय - बेख़बर...

  • मुक्तक (बेख़बर देहलवी)

    मुक्तक (बेख़बर देहलवी)

    मुक्तक दिलबर  तिरे बगैर  मैं जी  नहीं सकता ज़हर जुदाई  का  और  पी  नहीं सकता ज़िन्दगी की चादर भी इतनी फट चली बिना  तेरे  साथ  इसे  सी  नहीं  सकता !! बेख़बर देहलवी परिचय - बेख़बर देहलवी...

  • मुक्तक (बेख़बर देहलवी)

    मुक्तक (बेख़बर देहलवी)

     मुक्तक  सच  में  ऊबे  हम इन यारानों से लोग अब पलटने लगे ज़बानों से रिश्ते  मतलब  से यहाँ  बनाते हैं जरा बचो तुम इन्ही मेहमानों से ।। बेख़बर देहलवी परिचय - बेख़बर देहलवी नाम-विनोद कुमार गुप्ता...




  • ग़ज़ल : इंसान और इंसानियत

    ग़ज़ल : इंसान और इंसानियत

    इंसान इंसानियत को भुल जाता है क्यो छोटा होकर ये खुद बड़ा बताता है क्यो !! ख़ुद अपने जिन्दगी मे भटका हुआ पड़ा फिर दुसरो को ये रास्ता दिखाता है क्यो !! इनके दिलो मे पलते...