संस्मरण

सबक

1992 की बात है उस समय मेरी उम्र यही कुछ 11 साल रही होगी l कक्षा 5 का छात्र था l हम चार भाई बहन थे l, मेरे पिता जी की आमदनी बहुत नहीं थी, लेकिन उन्होंने हम लोगों को पढ़ाने में कोई कसर नही छोड़ी l मैं शहर के सबसे अच्छे स्कूलों में से एक […]

इतिहास

वीर योद्धा

आपको यह तो ज्ञात होगा कि NDA (National Defence Academy) में जो बेस्ट कैडेट होता है, उसको एक गोल्ड मैडल दिया जाता हैं | लेकिन क्या आपको यह ज्ञात हैं कि उस मैडल का नाम “लचित बोरफुकन” है ? कौन हैं ये “लचित बोरफुकन” ? पोस्ट को पूरा पढ़ने पर आपकों भी ज्ञात हो जाएगा […]

कहानी बालोपयोगी लेख बोधकथा सामाजिक

बुद्धिमान राजा

.एक राज्य के लोग एक वर्ष के उपरान्त अपना राजा बदल देते थे. राजा को हटाने के दिन जो भी व्यक्तिसबसे पहले शहर में आता था तो उसे ही नया राजा घोषित कर दिया जाता था..पहले वाले राजा को सैकड़ों मील में फैले जंगल के बीचोबीच छोड़ आते थे जहां खूंखार जानवर थे. बेचारा अगर […]

बोधकथा लघुकथा

प्रेम

एक डलिया में संतरे बेचती बूढ़ी औरत से एक युवा अक्सर संतरे खरीदता । अक्सर, खरीदे संतरों से एक संतरा निकाल उसकी एक फाँक चखता और कहता, “ये कम मीठा लग रहा है, देखो !” बूढ़ी औरत संतरे को चखती और प्रतिवाद करती “ना बाबू मीठा तो है!” वो उस संतरे को वही छोड़, बाकी […]

सामाजिक

भारतीय समाज में वर्ण व्यवस्था

प्राचीन काल में जो वर्ण व्यवस्था थी वो जन्म आधारित नहीं बल्कि कर्म आधारित थी l जो जैसा कर्म करता था उसे उसी वर्ण का माना जाता था l उदाहरणतः जो व्यापार करता था उसे वैश्य वर्ण में रखा जाता था राजा क्षत्रिय होता था, शिक्षा देना ब्राह्मणों का काम था, सेवा करना शूद्रों का […]

कविता सामाजिक

सच्चे रिश्ते

मकान चाहे कच्चे थे लेकिन रिश्ते सारे सच्चे थे… चारपाई पर बैठते थे पास पास रहते थे… सोफे और डबल बेड आ गए दूरियां हमारी बढा गए…. छतों पर अब न सोते हैं बात बतंगड अब न होते हैं.. आंगन में वृक्ष थे सांझे सुख दुख थे… दरवाजा खुला रहता था राही भी आ बैठता […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति हास्य व्यंग्य

चींटी और टिड्डा की कहानी का भारतीय संस्करण

चींटे (ant) और टीडे की कहानी बाय मेरी जुबानी – ओरिजिनल स्टोरी – चीटा सारी गर्मी, कुम्हला देने वाली गर्मी में अपना घर बनाता है, बड़े जतन से खाने का इन्तेजाम करता रहता है, उसे सर्दियों के लिए सहेज के रखता जाता है और ये देख टीडा हँसता है के देखो चिंटा कैसे पगलाया हुआ […]

सामाजिक

डॉक्टरों द्वारा लूट

ईमानदार डाक्टर (यदि कोई हो तो) अन्यथा न लें और आहत न हों। आप एक कसबे में रहते हैं, मोटर साइकिल से कही जा रहे थे, एक्सीडेंट हो गया, चोट लग गयी। अस्पताल 2 km दूर है, बगल से एक ऑटो रिक्शा वाला जा रहा है। अस्पताल 2 km दूर है ऑटो वाला कहता है 2000 […]

बालोपयोगी लेख बोधकथा सामाजिक

पिता

गुस्से से मैं घर से चला आया, इतना गुस्सा था की गलती से पापा के जूते पहने गए। मैंआज बस घर छोड़ दूंगा, और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा। जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते थे,तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें है। आज मैं उठा लाया था, पापा का पर्स भी,जिसे […]