मुक्तक/दोहा

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कुछ दोहे…

  मुक्ति चाहते हो अगर, कैसा भी हो रोग। सुबह सवेरे कीजिये, नितप्रतिदिन ही योग।१। गहरा लंबा स्वांस ले, कर लेना अनुलोम। मन होगा एकाग्र ये, निर्मल हो हर रोम।२। शव आसन का लाभ है, रहे थकावट दूर। अंग अंग पोषित करे, ऊर्जा से भरपूर।३। पद्मासन में बैठकर, हो जाओ तुम लीन। ध्यान लगाना रोज […]

कुण्डली/छंद

पितृ दिवस पर अपने पिता की याद के साथ… एक कुंडलियाँ

कदकाठी मजबूत हो, या हो कोमल देह। जीवन के हर मोड़ पर, मिले पिता का नेह। मिले पिता का नेह, न सूना हो ओसारा। मैका माँ के संग , पिता सँग खुलता द्वारा। “गुंजन” का दुर्भाग्य, छोड़ के गयी है लाठी। वो कोमल सी देह, पुष्ट सी थी कदकाठी। ……. अनहद गुंजन अग्रवाल

मुक्तक/दोहा

मुक्तक….

अ_ढ़े जिद पे रहो न तुम कि बोलो प्रेम के आखर। मुहब्बत है अगर हमसे न तोलो प्रेम के आखर। नयन सब राज हैं खोलें अधर बैठाये क्यों पहरे- पढ़ो “अनहद” से ये नैना कि घोलो प्रेम के आखर। …….अनहद गुंजन अग्रवाल

मुक्तक/दोहा

मुक्तक….

  चरागों की पनाहों में मुहब्बत साँस भरती है। सितारों की निगाहों में अँधेरी रात चुभती है। ये माना है नही आसां मुहब्बत राह पर चलना- कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है। ________अनहद गुंजन अग्रवाल

कुण्डली/छंद

कहमुकरियाँ

रात अँधेरी वो था आया मेरा मन कुछ कुछ घबराया देख भोर को छुपता मांद क्या सखि प्रेमी..? न सखि चाँद। अधरों की बढ़ती है प्यास। कैसे कह दूं सब अहसास मन में उठती प्रणय उमंग। क्या सखि साजन..? न न री भंग। हुई प्रेम में उसके पागल। फैल गया आंखों का काजल। निकली मेरे […]

गीतिका/ग़ज़ल

है मुहब्बत अगर तो अना छोड़ दो…..

है मुहब्बत अगर तो अना छोड़ दो। या मुहब्बत का ये फैसला छोड़ दो। ख्वाहिशे वस्ल है फिर ये कैसी हया तुम बढाओ कदम, ये हया छोड़ दो। मुझको हँसना कभी रास आता नहीं अक्स को मेरे तुम ग़मज़दा छोड़ दो। लाज आती है मुझको , सरेबज्म यूँ दम ब दम अब मुझे देखना छोड़ […]

कुण्डली/छंद

एकदम ताजा हालात पर कुंडलियाँ

पुनः परीक्षा ले रहे, रखा  न  पहले  ध्यान। सीबीएसइ  ने  किया, जारी  एक   बयान। जारी   एक   बयान, करो  छात्रों   तैयारी। कथित रूप से लीक, हुआ परचा है जारी। “अनहद” है आकाश, शेष  है लेनी दीक्षा। आया है फरमान, कि दो तुम पुनः परीक्षा। ……….अनहद गुंजन 28/03/18

गीत/नवगीत

माता रानी के चरणों में समर्पित एक गीत….

हे मात अम्बे रानी, हे मात अम्बे रानी। सुन लो पुकार मेरी, कष्टों में जिंदगानी। महिषा असुर से फिर माँ संसार डर रहा है। मधु और दैत्य कैटव अट्टहास कर रहा है। अवतार लेके फिर माँ दुनिया है ये बचानी। हे मात अम्बे रानी हे मात अम्बे रानी। नारी से जन्म लेकर जो रौंदता है […]

कुण्डली/छंद

कुंडलियाँ छ्न्द

  #आधुनिकता नैतिक मूल्यों को रखा, बड़े गर्व से ताक। खूब उड़ाई धूल में, संस्कारों की खाक। संस्कारों की खाक, धूसरित करती माया। चकाचौंध पुरजोर, आधुनिकता की छाया। “अनहद” दौड़ें दौड़, करें भी काम अनैतिक। रखें ताक पर मूल्य, पूर्वजों के सब नैतिक। __________अनहद गुंजन18/03/18   मंगलमय हो हर दिवस,मंगलमय हो भोर। पूरी हो हर […]

कविता

विश्व जल दिवस पर एक रचना….

श्रृंगार छ्न्द अरे….! हो जाये हाहाकार। न लूटो जीवन का आधार। प्रथम जल जीवन है तो जीव। अन्यथा तृण मानव निर्जीव। न रूठे कहीं किसी इक रोज। कि गंगू नीर का राजा भोज। हनन कर, कर बैठें अधिकार। कहीं कुछ बाहुबली मक्कार। इसलिए करो नही बर्बाद। रखो बस इतना तो तुम याद। पिघलने से पहले […]