मुक्तक….
चरागों की पनाहों में मुहब्बत साँस भरती है। सितारों की निगाहों में अँधेरी रात चुभती है। ये माना है
Read Moreरात अँधेरी वो था आया मेरा मन कुछ कुछ घबराया देख भोर को छुपता मांद क्या सखि प्रेमी..? न सखि
Read Moreहै मुहब्बत अगर तो अना छोड़ दो। या मुहब्बत का ये फैसला छोड़ दो। ख्वाहिशे वस्ल है फिर ये कैसी
Read Moreपुनः परीक्षा ले रहे, रखा न पहले ध्यान। सीबीएसइ ने किया, जारी एक बयान। जारी एक बयान, करो छात्रों तैयारी।
Read Moreहे मात अम्बे रानी, हे मात अम्बे रानी। सुन लो पुकार मेरी, कष्टों में जिंदगानी। महिषा असुर से फिर माँ
Read More#आधुनिकता नैतिक मूल्यों को रखा, बड़े गर्व से ताक। खूब उड़ाई धूल में, संस्कारों की खाक। संस्कारों की खाक,
Read Moreश्रृंगार छ्न्द अरे….! हो जाये हाहाकार। न लूटो जीवन का आधार। प्रथम जल जीवन है तो जीव। अन्यथा तृण मानव
Read Moreनमामि मात शारदे, नमामि मात शारदे। विनाश काम क्रोध मोह लोभ मात मार दे। सदैव सत्य लेखनी लिखे डरे
Read Moreजब भी पीकर तुम आते हो। हंगामा ही बरपाते हो। भूल नहीं पाए तुम अब तक। खाबों
Read More(सार ललित छ्न्द) हठ कर बैठी गुड़िया रानी, चाँद मुझे दिलवा दो। दादी बाबा नाना नानी, चाँद मुझे दिलवा दो।
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