मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

आत्म प्रसंशा  से  नहीं, बनती  है  पहचान। सब करते तारीफ जब,तब मिलता सम्मान। पुख्ता  होती  है तभी,‌ रिश्तों  की  बुनियाद। प्यार मुहब्बत की अगर,उसमें  डालो खाद। चेला अब मिलता नहीं, मिलते सब उस्ताद। चाहत हो  जब ज्ञान की , करते गूगल याद। जीने  वाले  जी  गये , जीवन  अपना  यार। जीवन  पर तो  मौत की, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जो हमको ज़माने से अब तक मिला है। ज़माने   को   हमने   वही  तो  दिया है। कहीं  कुछ  बुरा  तो  यक़ीनन   घटा हैे। मेरा  दिल  सवेरे  से  कुछ  अनमना है। बयां  उसका  पूरा   सियासत   भरा  है। वो क़ातिल को क़ातिल कहाँ बोलता है। जो क़ातिल था वो तो  बरी हो  गया पर, नहीं  दूसरा  कोई  अब  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आ के बैठा  हूँ किनारे आ सको तो पास आओ। मन तुझे ही बस पुकारे आ सको तो पास आओ। एक पल सोया नहीं हूँ  रात भर जागा तेरे बिन, हैं  गवाही   में  सितारे  आ सको तो  पास आओ। ऋतु  सुहानी  हो गयी है,  मन मयूरा  नाच  ता है, छा गये  बादल हैं कारे आ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बड़ी  बे  अदब  है   चुनावी  सियासत। बुराई  की  करते  फिरें  सब  हिमायत। सियासत में बाक़ी नहीं अब  शराफत। कहाँ तक  सुधारेगी  उसको अदालत। दिखावे की हरगिज़ नहीं है  इजाज़त। दिखाते फिरो मत यहाँ तुम  नफासत। करेगा  वतन की  जो  पूरी  हिफाज़त। उसे  ही    मिलेगी   अवामी  हिमायत। उन्हे  हार   मिलती  ज़माने  में  हर  सू, समय […]

गीतिका/ग़ज़ल

बजट के बतोले

नहीं मिल सका आम जनता को कुछभी, हमें   बस   सुनाये    बजट   के   बतोले। किया   तेल   महँगा   भरी   ज़ेब  अपनी, हमें   कुछ  न  भाये   बजट   के  बतोले। बताये   है   शेयर   का  बाज़ार  गिरकर, तनिक  भी   न  भाये   बजट के  बतोले। — हमीद कानपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

साथ  तेरा  अगर   पायेंगे  दूर तक। तब यक़ीनन सनम जायेंगे दूर तक। उलझनों से निजी  जब उबर पायेंगे, देख तब  ही कहीं  पायेंगे  दूर तक। कल तलक जोहुआ वोहुआ सोहुआ, अब न धोखे मियाँ खायेंगे  दूर तक। मंज़िलों  के  निशां  खूब बतला चुके, ऊँच और नीच  समझायेंगे  दूर तक। दूर  कर   के  रहेंगे   सभी   उलझनें, […]

मुक्तक/दोहा

कबीर को समर्पित दोहे

हार नहीं सकते कभी , मन में ले विश्वास। जीत नहीं सकते कभी,शंका के बन दास। नागिन सी डसती रही,उसको जग की पीर। सब मस्ती से  सो गये, जगता  रहा  कबीर। देख बेतुका ये जहां, तन मन हुआ अधीर। जग हमीद जैसा दिखा, वैसा कहा कबीर। एक खुदा  वहदानियत, सबसे रही अज़ीज़। बौनी   उसके   सामने, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

रोज़ उसको न बार बार करो। जो करो काम आर पार करो। आ  के  बैठो गरीब  खाने  में, मेरी दुनिया को मुश्कबार करो। तेरे बिन है खिजाँ खिजाँ मौसम, आ के मौसम को खुशगवार करो। जब तुझे मिल गया सनम याराँ, अब न अाँखों को अश्कबार करो। माँग  ली  है  हमीद  ने माफी, अब नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सपने  सब बे  नूर  हुये हैं। दिलबर जबसे दूर  हुये हैं। घर  में  ही महसूर  हुये हैं। जब से  वो  पुरनूर  हुये हैं। डरने  पर  मज़बूर  हुये हैं। चन्द क़दम ही दूर  हुये हैं। खूब बड़ों को  गाली देकर, जग  में  वो मशहूर  हुये हैं। ज़ब्त नहीं जब हो पाया तो, कहने  पर  मज़बूर   हुये […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ठीक सब कुछ यहाँ है बतला दो। हाथ  अपना  हवा  में  लहरा  दो। वो रज़ा खुद  ब खुद समझ  लेगा, हाथ  से  बाल  उसके  सहला दो। आप  बिन  ये   लगे   मुझे   सूना, घर मेरा आप  आ  के  महका दो। बाल  बच्चे   रहें   सलामत   सब, नाम  से  उनके  यार  सदक़ा  दो। इक  नया  इंकिलाब  तुम  लाकर, […]