गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सही बात कहना हिमाकत नहीं है। हक़ीक़त बयानी बगावत नहीं है। सभी माल मत्ता मेरे नाम है पर, उसे छू सकूँ ये इजाजत नहीं है। नबी पर यक़ीं है ख़ुदा पर भरोसा, कहींकुछ किसीसे शिक़ायत नहीं है। है बेकार आना जहां में हमारा, वतन से जो अपने मुहब्बत नहीं है। इबादत का तेरी नहीं फायदा […]

गीतिका/ग़ज़ल

पुलवामा का वादा

अब हम यूँ इंसाफ करेंगे। स्विच दहशत का आफ करेंगे। अज्म किया है ठान लिया है, भूलेंगे ना माफ करेंगे। गुल कर देंगे बत्ती उनकी, दहशत गर्दी साफ करेंगे। हमले से जो ग्राफ बढ़ा है, जल्दी नीचे ग्राफ करेंगे। मारेंगे जब सैनिक जाकर, लाशों पर ना लाफ करेंगे। — हमीद कानपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

उन्हे लज्जा नहीं आती उन्हे लज्जा न आने दो। हमें सरहद पे जाकर के ज़रा सर काट लाने दो। शहादत ये जवानों की नहीं हो रायगाँ हरगिज़, किया इस काम को जिसने उसे जग से मिटाने दो। बुजुर्गों ने लहू देकर बचाया था जिसे कल तक, पसीना अब बहा कर के हमें उसको सजाने दो। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

काम आसां हों कि हों मुश्किल करो। लळ्य अपना हर तरह हासिल करो। मत नहीं अनुदान दे हासिल करो। नस्ल पूरी को नहीं काहिल करो। एक ही रब पर करो मरकूज़ तुम, चित्त को अपने नहीं गाफिल करो। जी हुज़ूरों को बहुत शामिल किया, अब दलों में आदमी शामिल करो। चापलूसी बन्द कर दो अब […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

लौटो घर को अब तो प्यारे। टेर रहे हैं घर चौबारे। प्यार मुहब्बत पर अक्सर ही, नफरत के चलते हैं आरे। आँख चुराते मेहनत से जो, दिन में दिखते उनको तारे। आस जगी है दहकां मन में, नभ पर बादल कारे कारे। सब कुछ देखा है जीवन में, अनुभव मेरे मीठे खारे। नेता अपने खद्दर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बदी की कामनाओं का बहुत अफसोस होता है। सभी बेजा खताओं का बहुत अफसोस होता है। शिफा तो दे नपायीं कुछ वरन नुकसान कर डाला, उन्ही नकली दवाओं का बहुत अफसोस होता है। ज़मानेभर में चर्चाका विषय है बोल्डलुक जिनका, हमें उन कजअदाओं का बहुत अफसोस होता है। मेरी कुरबानियाँ भी जब उन्हे लगतीं हैं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – आजकल

काट सका जो यूपी फीता। दिल्ली समझो वो ही जीता। यूपी का रण जो भी हारा, घट रहता है उसका रीता। कृष्णउन्हेफिर जितवाते ही, जनता की गर पढ़ते गीता। वोट हमारे पाकर जीते, रोज़ रटें अम्बानी नीता। सत्ता पाकर भूला हमको, खूनहमारा निशिदिन पीता। क्या बतलायें तुमको कैसे, पाँच बरस है अपना बीता। 🌹 हमीद […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जब मेरा इंतिखाब बोलेगा। कुल जहां लाजवाब बोलेगा। लब कुशाई नहीं ज़रा होगी, आज उनका शबाब बोलेगा। बात उर्दू ज़बान में होगी, हर कोई जी जनाब बोलेगा। आज दावे यहाँ नहीं होंगे, आज बस इंतिसाब बोलेगा। आज दरिया हमीद है चुपचुप, आज उठकर हुबाब बोलेगा। हमीद कानपुरी अब्दुल हमीद इदरीसी 179,मीरपुर कैण्ट कानपुर-208004 9795772415

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

दहकां के दुख दर्द का,तनिक नहीं आभास। वोटन खातिर गाँव में , झूठा करें प्रवास। जनता किस बूते करे, इन पर फिर विश्वास। वर्तमान को खोद कर , बदल रहे इतिहास। खास ज़हनियत के रहे , हरदम ये तो दास। शासन इनका यूँ नहीं , आता सब को रास। बालिंगका लगतानहीं,अनुभव उसको खास। रोहित बल्लेबाज़ […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

रफ्ता रफ्ता खो गया, दिल का चैन करार।रफ्ता रफ्ता हो गया, मुझको उससे प्यार। जब से मेरी हो गयीं , उससे आँखें चार।मैं उसका बीमार हूँ, वो मेरी बीमार। बुझा बुझा रहने लगा, तब से दिल ये यार।जबसे उसने प्यारको, नहीं किया स्वीकार। नहीं समझना तुम इसे, दिलबर का इंकार।अक्सर होती है मियाँ, चाहत में […]