कहानी

कहानी – टीस

जैसे-2 उपन्यास अपने चरम पर पहुंचता जा रहा था दिव्या लेखक के भावों में डूब उतरा रही थी।वह उपन्यास के पात्रों के साथ रो रही थी,हँस रही थी। कहानी की समाप्ति के साथ नायिका के आँसू उसकी आँखों से बह पड़े।एक तीखा खालीपन उसे विचलित कर उठा। वह देर तक कथानक के प्रवाह में डूबती […]

कहानी

कहानी – अंततः

मृणाल जल्दी- जल्दी काम निबटा रही थी। बेटी के खराब स्वास्थ्य को देखकर उसका मन बहुत अशांत था। अवनि की छुट्टियाँ समाप्त हो रही थीं चार दिन बाद उसे वापस पुणे लौटना था। वहाँ चली जाएगी तो कौन उसका ध्यान रखेगा। इस वक़्त शहर में डेंगू का प्रकोप था और पूरी सावधानी के बावजूद भी […]

कविता

कविता : ज़िन्दगी

ज़िन्दगी तूने दिए , ज़ख्म बहुत, पर हौसला न मेरा , तोड़ पाई है । माना की हैं , दुश्वारियां बहुत , जीने की मैंने , कसम खाई है । शक्ति हूँ मैं , कमज़ोर नहीं , शूल चुनके मैंने , राह बनाई है । हर फ़िक्र से अब , आज़ाद हूँ , अपनी हस्ती […]

कविता

कविता : जब भी तेरी यादों का

जब भी तेरी यादों का झोंका चला आता है, सुकून ओ करीने से , संवरी ज़िन्दगी में, सब कुछ बिखेर जाता है, समेटती रह जाती हूँ मैं , तिनके -तिनके , जो रखे थे सहेजकर, फिर कितने ही दिनों की , मशक्कत की सज़ा दे जाता है , कभी खूबसूरत यादों के , बहाव में,डूबती-उतराती […]

कविता

कविता : रंग बदलते मैँने देखे

अजब गजब सारी दुनिया के रंग बदलते मैँने देखे । ज़र्रे ऊपर उठते देखे , गिरते यहाँ मसीहा देखे ।। दौलत की भूखी आँखेँ थीँ , रिश्तोँ की झूठी फितरत थी । मुस्कानेँ कुछ लोग खरीदेँ , बिकते बेबस आँसू देखे ।। बँगलोँ मेँ बह रहे समन्दर , बाहर कितने प्यासे देखे । हँसते यहाँ […]

लघुकथा

लघुकथा : सुख

” ऐसे मायूस क्यूँ नज़र आ रहे हो हेमन्त ?” ” कुछ नहीं संजय-सोच रहा हूँ की आखिर सुख की परिभाषा क्या है ” ” तो क्या निष्कर्ष निकाला ?” ” तू तो सब जानता है -की बचपन कितना तंगी में गुज़रा-हम सब साथ थे-पर एक एक चीज़ के लिए तरसते थे-तब निश्चय किया की […]

लघुकथा

लघुकथा : बिडम्बना

बाल श्रम उन्मूलन सप्ताह की कवरेज करके सहकर्मी राकेश के संग लौट रहा सुमित उमंग और जोश से लबरेज़ था। ” सरकार के इस कदम की जितनी प्रशंसा की जाए कम है । कम से कम भोले भाले मासूमों का बचपन तो न छीन पाएगा कोई अब। “          एक झोपड़ पट्टी के पास से […]

लघुकथा

लघुकथा : पगलिया

हाथ से अधिक तेज  उसकी जुबान चल रही थी  । उधर अमित का गुस्सा बढ़ता जा रहा था उसकी बकझक से । जिया ने आग्नेय दृष्टि से उसे घूरा फिर पौधों को पानी देने लॉन में आ गई। बर्तन मलते हुए ,कम दिमाग वाली वो पगली सी  किशोरी कभी मुस्कुरा रही थी,तो कभी गालियाँ बक रही […]

लघुकथा

लघुकथा : एक और द्रौपदी

जब पत्ते खोले गए तो मोहन के होश उड़ गए। इस बाजी के साथ वह अपना सब कुछ गंवा चुका था। एक चाल में दो हज़ार रुपए जीतने के बाद वह लगातार हार रहा था। अपनी मेहनत की कमाई के दस हज़ार रूपये, अपना खोमचा, अपनी घरवाली के चाँदी के गहने। ” अब क्या लगाते […]