लघुकथा

सच्चा जीवन साथी 

गुड मोर्निंग माई स्वीट हार्ट लीजिए गरमा गर्म सूप और टोस्ट का लुत्फ़ उठाइए ” चंदर ने ट्रे मेज पर रखते हुए कहा | शुक्रिया चंद्र आप मेरे लिए कितनी तकलीफ उठा रहे हैं “चंद्र को प्यार और आदर से निहारते हुए चांदनी की आँखों में मोती चमक उठे | अरे ये क्या जानू इन […]

लघुकथा

गलती या गुनाह ?

शादी के बाद दूल्हा दुल्हन स्टेज पर बैठे  हुए थे सभी लोग उन दोनों को और उनके  माता पिता को बधाइयां दे रहे थे, दुल्हन का भाई और भाभी  उनको आशीर्वाद दे रहे थे भाई अपनी बहन के सर पर स्नेह भरा हाथ रखते हुए बोला “सदा सुखी रहो मेरी बहन, आज तू हमारा आँगन […]

कहानी

दलदल

माँ कितना ख्याल रखती थी अपने  बेटे का , माँ थी न ,माँ तो निस्वार्थ प्यार करती है बच्चो को, जान से भी जयादा ख़याल रखती है| एक जान को नो महीने अपनी कोख में पालना , अपने खून से उसे सीचना, पल पल उसकी धड़कन को महसूस करना | और फिर असहनीय पीड़ा, जिसका […]

कहानी

बहुत देर कर दी मेरे दोस्त

अवतार आज पूरे २० साल बाद वतन वापिस आया था, एयरपोर्ट से बाहर आते ही वतन की भूमि को प्रणाम किया. बाहर चाचा जी उसे लेने आये हुए थे. उनके चरण छुए चाचा ने ढेरों आशीर्वाद देते हुए कहा, ”बेटा तुम बरसों के बाद आज लौटे हो , हमारी तो नज़रें ही तरस गईं तुम्हें […]

लघुकथा

बेरंग जीवन

  शॉपिंग सेंटर में सीमा की नजर एक औरत पर पड़ी जो उसे जानी पहचानी सी लग रही थी उसके चहरे पर उदासी थी और उसने बहुत सादा पहनावा पहन रखा था. उसे गौर से देखने पर सीमा को लगा, कि ये तो उसकी सहेली नेहा है पर नेहा तो कॉलेज में सब से सुन्दर […]

लघुकथा

एक माँ का प्यार

  दरवाजे पर दस्तक हुई शांति देवी ने दरवाजा खोला, लता अपने हाथ में खाने की थाली लिए खड़ी थी। शांति देवी ने कहा” आ गई बिटिया ,आज क्या बना के लाई है अपनी माँ के लिए ? मुस्कुराते हुए लता बोली “आप की मन पसंद भिन्डी की सब्जी और मसूर दाल पुदीने की चटनी […]

लघुकथा

लघुकथा : दोस्ती-दुश्मनी

सरला और सीमा दोनों पड़ोसिनें थी| उनमे बहुत गहरी दोस्ती थी उनके बच्चे भी एक दूसरे के दोस्त थे। उनके बजुर्ग पिछले २० सालो से ये दोस्ती निभाते आ रहे थे | वो दोनों परिवार आपस में मिल जुल कर रहते थे। एक दिन घर के सामने, दोनों के बच्चे मिल कर क्रिकेट खेल रहे […]

लघुकथा

दौड़ का अंत

रविवार का दिन था प्रीती अपनी सहेली रीना से मिलने उसके घर पहुंची |अभी वो दरवाजे के बाहर ही थी की एक कुतिया वहां से गुजर रही, एक तेज रफ़्तार के मोटर बाइक के पीछे, भोंकते हुए भागने लगी और वो तब तक भोंकती रही, जब तक उसने रफ़्तार कम् नहीं कर ली | प्रीती […]

लघुकथा

मुक्ति का फैसला

  विनोद टेलीविज़न पर कीटाहारी पौधो पर डॉक्यूमेंट्री देख रहा था जिस में भिन्न-भिन्न प्रकार के पौधे दिखाए जा रहे थे जैसे एक था “सुन्दरी का पिंजड़ा” यानि” वीनस फ्लाई ट्रैप प्लांट “| मधु की तलाश में भटकता हुआ कीड़ा जैसे ही उस पर बैठता है, ये पौधा उसे अपनी गिरफत में ले लेता है. […]

हाइकु/सेदोका

हाइकु : तेरे बिन माँ

  आँगन सूना भाए नहीं पीहर तेरे बिन माँ राह तकें ना नैन बिछाए कोई दर पे खड़ा छूटा आँचल दर्द बहाऊं कहाँ टूटा ये दिल लाँघ न पाऊं / कैसे लांघूं माँ मैं घर की चौखट छलके आंसू मिले न छाया वो ममता का साया दम लूँ कहाँ? बतला ज़रा तुझे लाऊं कहा से […]