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  • चम्पू बन्दर

    चम्पू बन्दर

    चम्पू बन्दर मस्त कलंदर। चलता देखो कैसे तन कर। पढ़ने में थोड़ा सा कम पर। शैतानी में पहला नम्बर। डाल डाल कभी पात पात पर, लपक लपक कर उचक उचक कर, अभी आम खा कर बैठा...

  • दिया और मैं

    दिया और मैं

    देहरी पर माटी का दिया जल रहा था। रात की गोद में सपना सा पल रहा था। कभी हवा, कभी अँधेरे से लड़ रहा था। मिटटी का था पर ज़रा न डर रहा था। मैंने कहा...

  • राम बन लड़ लीजिये

    राम बन लड़ लीजिये

    भीतर के रावण से खुद ही राम बन लड़ लीजिये। ये करारी ज़िद्द हो तो फिर बेधड़क अड़ लीजिये।। वेद पढ़ने से कभी फुर्सत अगर मिल पाए तो, भूखे चेहरे पर लिखी कोई वेदना पढ़ लीजिए।...

  • अच्छे बच्चे

    अच्छे बच्चे

      रेल चली भई छुक छुक छुक। हमने बोला रुक रुक रुक। ड्राइवर था वो बड़ा सयाना। उसने पूछा कहाँ है जाना। हम बोले नानी जी के घर। ड्राइवर बोला ज़ोर से हँस कर। पहले मुझको...

  • पिंक शूज़

    पिंक शूज़

    उफ़ जूही… कितने पसन्द हैं तुम्हे जूते? बड़ी हो जाओ तुम्हारे लिए जूतों की दूकान ही खोल देंगे…’ दिव्या ने हँसते हुए जूही के गाल पर हल्की सी चपत लगायी ‘मम्मा सिर्फ एक और ये पिंक...

  • करवाचौथ

    करवाचौथ

      ‘अरे ज़रा नमक लेती आना सब्ज़ी में कम रह गया है और रोटी ज़रा पतली …’ वाक्य अधूरा रह गया विद्यादत्त का ‘कभी कभार नमक कम भी खा लोगे तो कुछ बिगड़ेगा नहीं तुम्हारा… एक...

  • सृजन पथ पर…

    सृजन पथ पर…

      सृजन पथ पर बढ़े अगर, तो बाधाएँ संग आएँगी। शूल बिछा कर पग पग पर, तुझे देख देख मुस्काएंगी। अभी राह हैं बेखबर, तेरे स्वप्नों की दौड़ से। हँस रही है देख तू आगे, मंज़िल...

  • थाली में चाँद

    थाली में चाँद

    इंद्रधनुषी फूलों की सजावट और सुगंध हर और छाई थी। शर्मीले पुष्पों से बनी मालाएं वातावरण को मनमोहक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती थीं। बाहर के कमरे में ढोलक और गीतों की मिश्रित ध्वनि...