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  • सबको आता है सुकूँ…

    सबको आता है सुकूँ…

      सबको आता है सुकूँ आग क्यों लगाने में। है बुरी बात यही एक, बस ज़माने में।। अभी तो शिरकतें महफिलों में सीखी हैं। लगेगा वक्त अभी, यार उठ के जाने में।। जीने मरने की तरह...






  • कीजिये यकीन मेरा

    कीजिये यकीन मेरा

    कीजिये यकीन मेरा, कि ये गुस्ताखी नहीं। और रखिए आप, इतनी रंजिशें काफी नहीं।। आपको है क्या ज़रूरत, यूँ उठाने की कसम। आदतें तो शख्सियत से इस तरह जाती नहीं।। कर दिया होगा, रिहा करने का...

  • मुनासिब है नहीं

    मुनासिब है नहीं

      बेवजह मिलना मुनासिब है नही। संग संग चलना मुनासिब है नहीं।। दोस्ती का दौर वो कुछ और था, अब गले मिलना मुनासिब है नहीं। मोम बन कर आ ज़रा खुद भी जलें, औरों से जलना...