गीतिका/ग़ज़ल

वो इस तरह मिला है…

आ कर गले वो इस तरह मिला है। जैसे बाक़ी अभी कोई गिला है।। ए दिल तय करनी होगी लम्बी दूरी। अभी तो पहला दरवाज़ा खुला है।। ख्वाबों को नींद में ही रहने दो। फ़क़त एक हाथ हाथ से मिला है।। इतनी जल्दी भला क्यों ऊब गए। चलेगा लम्बा, ये जो सिलसिला है।। तुमने कहा, […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

दिल की गिरह में ….

दिल की गिरह में जो दबी सी थी। याद शायद वो आपकी सी थी।। कच्चे आँगन में यारियाँ पक्की। ज़िन्दगी वो ही ज़िन्दगी सी थी।। तेरे घर की वो राह पथरीली। पैर कहते हैं मखमली सी थी।। चाहे जुगनू या फिर शमा जैसी। जैसी भी थी वो रोशनी सी थी।। जाने दुनिया में कैसे फैल […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

भूल के….

रंगीं कागज़ के ये चंद टुकड़े कमाना भूल के। आ लगा लें दिल ज़रा दिल को जलाना भूल के।। मुझको कब परवाह थी दुनिया तेरे दस्तूर की। जी रहा हूँ देख ले ‘उसको भुलाना’ भूल के।। बच्चों की तकरार को तकरार ही रहने दो तुम। देख वो फिर हँस दिए रोना रुलाना भूल के।। यूँ […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

रुख पे गुलालों के रंग

जबसे देखे हमने तेरे रुख पे गुलालों के रंग। धुल गये दिल से जैसे सारे मलालों के रंग।। कितनी एतिहात से रखो इन्हें पर सच यही। पल में बिखर जाएंगे काँच के प्यालों के रंग। अश्क़ या की हो पसीना पौंछने तक ठीक है। कौन देखता है उसके बाद रूमालों के रंग।। चार दिन की […]

गीतिका/ग़ज़ल

शायद अब करार आए…

हर एक लम्हा लगा था यूँ कि शायद अब करार आए। इसी उम्मीद के सदके उमर सारी गुज़ार आए।। निभाया वादा शिद्दत से, कि हम जाने से पहले तक। तेरी दहलीज़ पर कितनी दफा जा कर पुकार आए।। खुदा के घर सभी कुछ था,कभी माँगा नहीं हमने। चंद साँसे ज़रूरी थीं वही ले कर उधार […]

बाल कविता बाल साहित्य

मियां गधे जी

  बाँध गले में टाई, सिर पर सेहरा धर कर ऐंठे हैं। ब्याह रचाने मिंया गधे जी, मंडप में आ बैठे हैं। बाराती कुछ नाच रहे कुछ हैं खाने में जुटे हुए। यार दोस्त फ़ोटो खिंचवाने एक दूजे से सटे हुए। बहना रानी जीजा जी से नेग ढेर से मांग रही। दुल्हन की माँ दुल्हन […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

यूँ तो हमेशा ही

  यूँ तो हमेशा ही ये लब, ये आँख मुस्काती रही। दिल से रोने की मगर आवाज़ संग आती रही।। न पूछ कैसे कारवां, चलता रहा इस सांस का। तेरी खबर के संग संग आती रही जाती रही।। पहले ही दर्द-ए-फ़िराक़ ने गुंजाइशें छोड़ी न थीं। उस पर थी तेरी याद जो शिद्दत से तड़पाती […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

भाव जब होता प्रखर है

  कंठ तब होता मुखर है। भाव जब होता प्रखर है। भीतर बवंडर डोलता है, और हृदय ये बोलता है, टीस हर अपनी छुपा ले, सिसकियां गहरी दबा ले, वेदना आँखों से बहती, बांध तोड़ तोड़ कहती, उंगलियों के बीच अब तू, ले कलम यूँ खींच अब तू, अश्रुओं को दे के वाणी, अब सुना […]

गीतिका/ग़ज़ल

सच से वाकिफ था

झुका के सिर, उम्र भर वो तो ख़िदमद में रहा।। सच से वाकिफ था हमेशा ही अपने कद में रहा।। क्यों शिकायत करूँ मैं खुद पे उसके कब्जे की। मुझमे बेहद रहा पर  फिर भी अपनी हद  मेंं रहा।। लाख कोशिश के बावजूद भी ख्याल तेरा। इधर उधर तो हुआ, दिल की ही सरहद में […]

गीतिका/ग़ज़ल

ख्वाहिशों का ज़ख़ीरा

ख्वाहिशों का ये ज़ख़ीरा दिल मे गर रह जाएगा। ज़ख्म एक रिसता हुआ सा उम्र भर रह जाएगा।। कूच करके चल दिए, इस पार से उस पार जो।। जिक्र अब उनका ज़ुबाँ पे रस्म भर रह जाएगा।। कुछ देर जो आग़ोश में ख्वाबों की रहने दो मुझे। कुछ देर को कांधे पे मेरे उसका सिर […]