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  • ये सच अगर होता

    ये सच अगर होता

    ये सच अगर होता, की कुछ भी देखता नही।। पत्थर की आँखें धीरे से, वो पोंछता नही।। ज़ख्मों पे मरहम, दूर से रखता रहा है वो। कहता ज़रूर है, किसी से वास्ता नही।। उनसे मिले क्या,...

  • कविता

    कविता

    ठहराव नही अच्छा ‘मनवा’, सम्भव है, पुनः छले जाओ। स्मृतियाँ न पीछा छोड़ेंगी, चाहे तुम कहीं चले जाओ। पर तुमने कहाँ मानी ‘मनवा’, झट द्वार झरोखे सब खोले। और मधुर तान सी, बह निकले, बिन सोचे...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    यार, जबसे तू खफा सा हो गया है। हर ख़ुशी से, फासला सा हो गया है। इस दफा तो, ओर है न छोर इसका। दर्द बढ़ कर, आसमां सा हो गया है।। आते जाते, पूछते सब...