Author :

  • सच से वाकिफ था

    सच से वाकिफ था

    झुका के सिर, उम्र भर वो तो ख़िदमद में रहा।। सच से वाकिफ था हमेशा ही अपने कद में रहा।। क्यों शिकायत करूँ मैं खुद पे उसके कब्जे की। मुझमे बेहद रहा पर  फिर भी अपनी...


  • मम्मी जी

    मम्मी जी

    नाना जी की राजदुलारी, मेरी प्यारी मम्मी जी।। सभी ज़रूरत समय पे पूरी, करें हमारी मम्मी जी।। कॉपी बस्ता पेन पेंसिल इधर उधर मैं फैलाती। सही जगह पर चीजें रखो मम्मी जी ही समझाती। पढूं देर...



  • कातिलों के शहर में

    कातिलों के शहर में

    मुमकिन सज़ा-ए-मौत या वजह खुदखुशी मिले। कातिलों के शहर में, अब कैसे ज़िन्दगी मिले।। किस्मत की बात यार है, जो मिले कबूल कर। क्यों फिरे यहाँ वहाँ कैसे ही एक खुशी मिले।। हर शय नसीब है,...


  • आहटें चौखटों तक

    आहटें चौखटों तक

    आहटें, चौखटों तक अब मेरी, आती कम हैं। औ’ हवाएं भी खिड़कियों को हिलाती कम हैं।। गलियाँ सूनी, बदमिज़ाज़ सड़कें हो चली जब। मेरी आँखें भी इंतज़ार सजाती कम हैं।। वजह कोई और होगी, आँख ये...

  • अभागिन

    अभागिन

    लोग हवा में तैरती रस्सी पर चलती उस छोटी सी लड़की को देख कर दांतों तले अंगुली दबा कर कह रहे थे- “क्या गज़ब की एकाग्रता है साहब… क्या जोश, क्या हिम्मत है बच्ची की। ज़रा...