बाल कविता बाल साहित्य

गुड़िया की शादी

    गुड़िया की शादी बात सुनो न दादी प्यारी।।                                    गुड़िया दस की हुई हमारी। पिंकी के घर गुड्डा आया। रिश्ता उसने है भिजवाया। देखो कैसा शुभ अवसर है। गुड्डा सेना में अफसर है। तारीख तुम्हे सुझानी होगी। […]

कविता पद्य साहित्य

होने लगे जो तबाह खुद….

होने लगे जो तबाह खुद तो पूछते हो तबाही क्यों…? पहाड़ नदियाँ अन्तरिक्ष और चांद काबू में किया। पनडुब्बियाँ तकनीकी वाहन ज्यूँ कोई जादू किया। मानव स्वरूपी देवता देता नहीं है दिखाई क्यों…? होने लगे जो तबाह खुद तो पूछते हो तबाही क्यों…? प्रकृति तबाह धरती तबाह आकाश सारा दाव पर। परमाणु ताकतें बने, थी […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

आफताब जले…

  आसमानों में दिन चढ़े ज्यूँ आफताब जले। जलने वाले कुछ इस कदर बेहिसाब जले।। वतन की इस तरह तकदीरें जला करती हैं। जले मकतब अगर जो हाथ की किताब जले।। बखूबी सीख लिया है लेने देने का हुनर। तेरे सवाल जले और मेरे जवाब जले।। बस्तियों में जो इतनी रोशनी सी फैली है। फ़क़त […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

जीना अगर तुम…

जीना अगर तुम ज़रा चाहते हो। तो ज़ख्मों का रंग क्यों हरा चाहते हो।। गुनाहों से तौबा सी करने का मन है। क्या कह दिया है ये क्या चाहते हो। कलम छीन कर यूँ खंजर थमा कर। बता ये रहे हो भला चाहते हो।। क्यों ज़ख्मों को खुल के नहीं खोल देते। क्यों कहते नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

भरम या दोस्ती…

भरम या दोस्ती दुआ फ़लसफ़ा ही हुआ। हमें तो बारहां यकीन इश्क़ का ही हुआ।। मन्ज़िलों पे था तेरी नाम किसी और का। ताउम्र को तेरी खातिर मैं रास्ता ही हुआ। मुद्दतों राह तकी उसकी मेंरी वफाओं ने। जो न इंसान हो सका जो न खुदा ही हुआ। जहाँ जा कर तेरी यादों की जद […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

आधार मेरे सपनों का…

गीत संजीवनी सी ये पीड़ा। आधार मेरे सपनों का।। बाटें खुशियाँ दुगनी हों, कहते ही दुःख हो आधा। पीड़ा हो जब अपनी सी, फिर क्यों न चाहूँ ज्यादा। क्यों न इनको फिर मन में, मैं बड़े जतन से पालूँ। क्यों कहूँ विकलता अपनी, औ’ इनको कम कर डालूँ। ये भार नही हैं मन पर, उपकार […]

कविता

नाव…

रोज़ बीनती थी… कुछ लकड़ियाँ रोज़ ही तो… देखते ही देखते एक ढेर खड़ा था आँगन में। आश्वस्त था मन अंतिम समय के लिए चिता की सामग्री भरपूर थी। पर एक रोज़ अचानक…. जी को न जाने क्या सूझी हाथों को इशारा हुआ और एक नाव बना डाली लकड़ियों की। फिर तो किनारे से बीच […]

गीतिका/ग़ज़ल

वो इस तरह मिला है…

आ कर गले वो इस तरह मिला है। जैसे बाक़ी अभी कोई गिला है।। ए दिल तय करनी होगी लम्बी दूरी। अभी तो पहला दरवाज़ा खुला है।। ख्वाबों को नींद में ही रहने दो। फ़क़त एक हाथ हाथ से मिला है।। इतनी जल्दी भला क्यों ऊब गए। चलेगा लम्बा, ये जो सिलसिला है।। तुमने कहा, […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

दिल की गिरह में ….

दिल की गिरह में जो दबी सी थी। याद शायद वो आपकी सी थी।। कच्चे आँगन में यारियाँ पक्की। ज़िन्दगी वो ही ज़िन्दगी सी थी।। तेरे घर की वो राह पथरीली। पैर कहते हैं मखमली सी थी।। चाहे जुगनू या फिर शमा जैसी। जैसी भी थी वो रोशनी सी थी।। जाने दुनिया में कैसे फैल […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

भूल के….

रंगीं कागज़ के ये चंद टुकड़े कमाना भूल के। आ लगा लें दिल ज़रा दिल को जलाना भूल के।। मुझको कब परवाह थी दुनिया तेरे दस्तूर की। जी रहा हूँ देख ले ‘उसको भुलाना’ भूल के।। बच्चों की तकरार को तकरार ही रहने दो तुम। देख वो फिर हँस दिए रोना रुलाना भूल के।। यूँ […]