धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

विजयदशमी

विजयदशमी जिसे हम विजय दिवस के रूप में मनाते हैं इस दिन श्री रामचंद्र जी ने रावण पर विजय प्राप्त की थी उसी तथ्य को याद कर हम हर वर्ष विजयदशमी का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाते हैं पर वास्तव में विजयदशमी का त्यौहार हर साल मनाना कहां तक सार्थक है क्योंकि श्री रामचंद्र जी […]

कविता

याद रखना

उठूंगा एक दिन तूफान बन कर मुझे याद रखना। बहूँगा एक दिन आंखों का आंसू बनकर याद रखना। दूंगा दर्द सीने में याद बनकर याद रखना। ढूंढो गए मुझे तुम अपने और परायो में याद रखना। चीख उठोगे अपनी नासमझी पर एक दिन याद रखना। बड़ा भरोसा है तुम्हें जिन पर छोड़ जाएंगे वो एक […]

कविता

लौट कर आऊंगा

सुनो ! मैं फिर से लौट कर आऊंगा, मिट्टी नहीं हूं जो उड़ गया। तूफ़ान हूं फिर से थरथराता आऊंगा। सुनो ! जीवन पथ पर तुमने मुझे कभी कुछ नहीं समझा मगर वक्त के पन्नों पर लिखा है साथ मेरा तेरा मैं फिर से तुम्हें अपना बनाने आऊंगा। सुनो ! बहुत रुलाया है तुमने मुझे […]

कविता

आदेश

शमशान की राख को सीने से लिपटाए फिरता हूँ, महाकाल का भगत हूँ उनका नाम लिए फिरते हूँ, मैं चुपचाप सभी की सुनता हूं किसी को कुछ बोलता नहीं। आदेश है माँ महाकाली का बेमतलब इसलिए किसी को सताता नहीं। गुर्राता है कोई तो मैं चुप रहता हूँ फिर भी बेमतलब किसी को मौत की […]

कविता

न जाने क्यों

न जाने क्यों खो सा गया है कही मेरा मन। न जाने क्यों मिट्टी सा हो गया है मेरा तन। न जाने क्यों टूट गया है, उनकी याद में ह्रदय का हर एक कण। न जाने क्यों बिखर गए है, हर ख्वाब मेरे फिक्र में उनकी हरदम। — राजीव डोगरा ‘विमल’

कविता

कभी तो

तुम ख्वाहिश हो मेरी कभी तो मुझे मिला करो। तुम दुआ हो मेरी कभी तो कबूल हुआ करो। तुम मोहब्बत हो मेरी कभी तो पूरी हुआ करो। तुम जहान हो मेरा कभी तो मुझ पर मर मिटा करो। तुम धड़कन हो मेरी कभी तो मेरे दहकते दिल में धड़का करो। तुम सांस हो मेरी कभी […]

कविता

तुम में लीन

जीवन व्याधियों मुझे काट खाने को दौड़ती रहे मैं फिर भी तुम में लीन रहूं। सुख की अनुभूतियां मुझे हर पल खोजती रहे मैं फिर भी तुम में लीन रहूं। दसों दिशाओं में मेरे लिए मृत्यु का अट्हास होता रहे हैं मैं फिर भी तुम में लीन रहूं। जीवन के अंतिम छोर में मुक्ति का […]

कविता

नवीन जीवन

चलो चलते हैं फिर से जीवन की तलाश में किस अजनबी शहर की अनजान राहों पर। चलो फिर से बटोरते हैं उन ख़्वाबों को जो टूट कर बिखर गए थे किसी अनजान शख्स की बिखरी हुई याद में। चलो फिर से उन दिलों को धड़कना सिखाते हैं , जो टूट कर बिखर गए थे मरती […]

कविता

इंतकाम

मैं पत्थर सा हुआ उनकी याद में, वो तोड़ते रहे मुझे अपने इंतकाम में, सोचा न उन्होंने कभी कि बीते हुए वक्त में मैं कितना तड़पा हूँ उनकी याद में, बस वो जख्म देते रहे मुझे हँसते हुए अपने इंतकाम। मैं लेकर मिट्टी का तन उड़ता रहा उनकी याद में और वो बनकर बवंडर खिलवाड़ […]

कविता

माँ काली

एक तुम ही तो हो माँ काली जो मेरे लिए वक्त के हर पन्ने को पलट सकती हो। एक तुम ही तो हो माँ काली जो मेरे लिए काल से क्या महाकाल से भी लड़ सकती हो। एक तुम ही तो हो माँ काली जो मेरे लिए दसों दिशाओं को थाम कर मुझे पाल सकती […]