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  • क्या तब?

    क्या तब?

    तप्त अग्नि में जलकर राख हो जाऊंगा। एक दिन मिट्टी में मिलकर खाक हो जाऊंगा। तब मिट्टी को रौंदकर क्या मुझे  याद करोगे? झूठे ख्वाबों की शायरी से क्या मेरा इंतजार करोगे? करना है इश्क़ तो...

  • गुलाम आज़ादी

    गुलाम आज़ादी

    मुबारक हो, मुबारक हो आज़ाद हिंद के गुलाम नागरिकों को आज़ादी मुबारक हो। गुलाम हो, गुलाम हो आज भी तुम अपने कामुक विचारों के गुलाम हो। शिकार हो, शिकार हो आज भी तुम गली चौराहों में...

  • दूषित राजनीति दूषित लोग

    दूषित राजनीति दूषित लोग

    आज हम भारत की राजनीति की बात करें तो वह पूरी तरह दूषित हो चुकी है।इसके लिए हम किस को जिम्मेवार ठहरा है।कुछ समझ नहीं आता मगर वास्तव में हम विचार करें तो दूषित राजनीति के...

  • कविता

    कविता

    बहते अश्कों के साथ अश्क बहाते नजर आएंगे। बदलते चेहरों के साथ हम भी बदलते नजर आएंगे। सुकून नहीं मिला भले इस दुनिया से फिर भी हंसते मुस्काते हम अब नजर आएंगे। बेदर्द कातिल की तरह...

  • हम इश्क करते-करते 

    हम इश्क करते-करते 

    हम इश्क करते-करते निभाना सीख गए। वो इश्क करते-करते सब का दिल बहलाना सीख गए। हम इश्क़ करते-करते मोहब्बत के अफसाने लिखने लग पढ़े। वो इश्क करते-करते हर जगह नए अफ़साने गढ़ने लग पड़े। हम इश्क...

  • बेदर्द दुनिया

    बेदर्द दुनिया

    बेदर्द दुनिया में, दर्द को अपना मान बैठा। अपना समझ कर, गैरों को गले लगा बैठा। न मिला चाहत को कोई गुलाब अगर, तो दर्द भरे चीखते कांटों को अपने गले लगा बैठा। न मिला रोशनी...

  • आखिर कब तक 

    आखिर कब तक 

    आखिर कब तक मुझे यूं ही नफरत करोगे। मिट्टी में मिलने के बाद तो एक दिन तुम याद करोगे। आखिर कब तक अपने दिल की धड़कनों से मुझे दूर करोगे। सांसे रुक जाने के बाद तो...

  • कविता

    कविता

    हमें न मालूम है न मालूम करना चाहते हैं। हमें  इश्क था हमें  इश्क है, और इश्क ही बस करना चाहते हैं। न जीवन का ठिकाना पता है, न मृत्यु का अट्हास का सुना है। हर...


  • अध्यापक के परम कर्तव्य

    अध्यापक के परम कर्तव्य

    एक अध्यापक का परम कर्तव्य है कि वह सबसे पहले एक अच्छा ज्ञानवान गुरु बने और अपने विद्यार्थियों में ज्ञान ऊर्जा को विकसित करें क्योंकि जब तक अध्यापक में ही ज्ञान ऊर्जा नहीं होगी वह अपने...