कविता

क्षितिज

जीवन क्षितिज के अंत में मिलूंगा फिर से तुमको, देखना तुम मैं कितना बदल सा गया हूं मिलकर तुमको। जीवन क्षितिज के अंतिम छोर में देखना मेरे ढलते जीवन की परछाई को, कितनी बिखर सी गई है मिलकर तुमको। जीवन क्षितिज के अंत में देखना मेरी डगमगाती सांसों को, कितना टूट सी गई है मिलकर […]

कविता

आधुनिक मुखौटा

कुछ यूं बदला वक्त की सब कुछ बदलता चला गया। जमी ये आसमा और आसमा से जमी सब कुछ यूं ही बदलकर बिखरता सा गया। इस बदलते हुए वक़्त में मैंने सोचा शायद कोई तो मेरा होगा, मगर आधुनिकता के नाम पर मुखौटा पहने हुए लोगों ने समझा दिया की, कोई अपना नहीं होता यहां […]

कविता

हे ईश्वर !

हे ईश्वर ! मैं कुछ खास नहीं फिर भी गुफ्तगू करता हूं तुमसे दुनिया का हाल छोड़कर। लोग पूछते हैं मुझसे क्यों गुमसुम से रहते हो ? क्या कोई दर्द मिला है ? किसी अनजान शख्स से ? अब क्या कहूं मैं और कैसे कहूं तेरी प्रेम अनुभूति किसी से बोलने ही नहीं देती। लोग […]

कविता

मैं आज भी वही हूं

बीत गया जो वक्त तो अब क्यों मुझे तलाश रहे हो। जब थे आपके पास तो बस आपके ही थे। अब गैरों ने जब बाहें पकड़ ली तो क्यों अब हताश और परेशान हो रहे हो? क्या बीता हुआ बीता वक्त अब याद आ रहा है, या फिर बीते हुए लम्हों की अपनी गलतियां अब […]

भजन/भावगीत

मां शेरावाली

मेरी माता शेरोवाली मेरे घर भी तू आ जाना बच्चे जो तुझे पुकारे एक बार तो दर्शन दे जाना मेरी माता शेरोवाली………. जाने अनजान मैंने माँ बहुत अपराध किए उनको भी आकर मिटा जाना मेरी माता शेरोवाली………. शिव ने जो जटा खिलारी माया तू करें सिंह सवारी दुष्टों का संहार कर जाना मेरी माता शेरोवाली………. […]

कविता

पिंजरे में बंद मानव

क्यों अच्छा लग रहा है न? अब पंछियों की तरह कैद होकर तुम ही तो कहते थे न, सब कुछ तो दे रहे हैं हम दाना-पानी इतना अच्छा पिंजरा तो अब क्यों ? खुद ही तड़प रहे हो उसी पिंजरे में बैठकर। क्यों बंधे हुए हाथ-पांव अच्छे नहीं लग रहें तुम्हें? मगर तुमने भी तो […]

कविता

बेजुबान इश्क

खूबसूरती सिर्फ जिस्म में ही नहीं, दिल में भी होती है। जरा ओढ़ कर देखना मेरी हस्ती की मिटी हुई, राख को अपने सीने पर। दिख जाएगी तुम्हें वो मोहब्बत जो  दिखी नहीं कभी तुम्हें मेरे सीने में धड़कते दिल में। तुम्हें लगता है अगर चाहने वाले बहुत हैं तुम्हारे तो आने दो जरा झुर्रियों […]

कविता

मृत्यु का अट्टहास

वक़्त संहार का हैं पापियों का विनाश हैं, क्यों दुआ करु की सब रुक जाए, किये हैं जो दुष्कर्म मानव भी तो उनका फल पाए। जी रहे थे जो अब तक अपने वक़्त पर घमंड कर। उनको भी तो मृत्यु का अहसास आए। ईश्वर के नाम पर किये जो बुरे कर्म मरते-मरते उनका भी तो […]

कविता

मृत्यु का अघोष

अघोष करता रहा मृत्यु का अट्टहास करता रहा काल से, जब कुछ भी न बचेगा तो हे! प्रभु लीन हो जाऊँगा तुम में। मृत्यु के कण-कण में मैं विराजमान रहा, क्षण-क्षण मरता हुआ भी पल-पल काल के जकड़े पंजों में पलता रहा। लोगों ने इतना तोड़ा-मरोड़ा फिर भी जीवन के वृक्ष पर मानवता की आड़ […]

भजन/भावगीत

मां दक्षिणेश्वरी काली कल्याण करो

जागो जागो माँ रणचंडी जन जन का कल्याण करो। उठो उठो मां दक्षिणेश्वरी काली बच्चों का हाथ पकड़ अब उनको प्यार करो। कांप रही थर थर दुनिया तेरे अट्हास से। अब तो बच्चों का उद्धार करो। जपत निरंतर नाम तेरो ओम दक्षिणेश्वरी काली नमः सब का माँ कल्याण करो। तीनो लोक कांप रहे। तेरे क्रोध […]