गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा हिन्दुस्तान है सबकी आँखों का है तारा मेरा हिन्दुस्तान है सूर मीरा तुलसी हों या हों रहीम रसखान बहाई सबने भक्ति की धारा मेरा हिन्दुस्तान है राम कृष्ण महावीर गुरु गोविंदसिंह को पाकर धन्य हुआ है देश सारा मेरा हिन्दुस्तान है गंगा जमुना सरस्वती के पावन जल को छूकर सबने […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

एक तरफ शंख बजे दूजी तरफ अजान है यही पुल तो कौमी एकता की पहचान है हो जाते हैं आपस में सभी कौम के एक जब जब भी गीता से मिलती कुरान है होती नहीं धर्म मजहब की कभी लड़ाई पास इनके एकता की मजबूत चट्टान है अनेकता में एकता का देख तू यह मिलन […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

लोग अधिक ही घबराये हुए हैं नदी के तट पर घर बनाये हुए हैं भीड़ में कैसे पहचानोगे उसे जबकि वो मुखौटा लगाये हुए है शतरंज के हैं वे माहिर खिलाड़ी हरेक गोटियाँ भी बिछाये हुए हैं भले ही उपलब्धि को शून्य मगर वे सब पर अपनी धाक जमाये हुए हैं टूट गयी महँगाई से […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सब हिसाब और किताब देखे हैं खर्च भी बेहिसाब देखे हैं फूटी कौड़ी भी नहीं है जेब में ऐसे भी हमने नबाब देखे हैं होंगे धनवान बैठे बैठे ही लोगों ने ये भी ख्वाब देखे हैं इज्जतों पर जो डालते डाका हमने वो भी जनाब देखे हैं एक ही की है रोशनी भरपूर किसने दो […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

फिर वे अपनी दुकानें सजाने लगे हैं और भीड़ लोगों की बढ़ाने लगे हैं जिसे हाथ पकड़कर चलना सिखाया वे ही हमको अब आँखें दिखाने लगे हैं यह जानकर कि वो अपराधी हैं फिर भी लालच के खातिर उसे बचाने लगे हैं कल तक खुलती नहीं थी जिनकी जुबां वे भी आज शोर मचाने लगे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जो अम्लो-अमन की दुआ करते हैं वे लोग अपना हक अदा करते हैं सियासत वाले होते हैं वाचाल नाम के वास्ते जलसा करते हैं देते सौगात में भरकर लिफाफे उनका ही आज वे भला करते हैं अपेक्षा से अधिक करते हैं संग्रह जब माँगते हैं तो मना करते हैं काम करना आता है करते नहीं […]

मुक्तक/दोहा

दोहे

छायादार पेड़ नहीं, बोया याद बबूल अब करते हैं देश वे गलती यहाँ कबूल पैसों से बढ़कर नहीं, उनके लिए अब कोय अपने सब अपराध भी, इसके बल पर धोय खुद को ही मान लेते सबसे बड़ा महान एक दिन उतरेगा सभी उनका ये अभिमान जो करता है सदा ही अच्छों का सम्मान उसको उचित […]

क्षणिका

क्षणिकायें

क्रोध क्रोध जितना भी आप करेंगे श्रीमान इससे होगा खुद का नुकसान अतः भीतर के क्रोध को बाहर न आने दें उसे भीतर ही खत्म कर दो। आत्मीयता मन के भीतर यदि भरा हुआ हो छल कपट पहले उसे बाहर निकालो फिर वहाँ आत्मीयता का खाद डालो जिससे जो भी पौधा उगेगा वो ठंडी छाँव […]