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  • लावणी छंद – नारी की व्यथा

    लावणी छंद – नारी की व्यथा

    तनी अँगुलियाँ चढ़ी भृकुटियां, अरु तानों को सहती थी। बहुत सोचती प्रति उत्तर दूं, किंतु मौन ही रहती थी। संस्कार से बंधा हुआ मन, लोक लाज से नैन भरे। किंतु रहे कुत्सित जग वाले, करुण हृदय...


  • लावणी छंद गीत – चुनाव

    लावणी छंद गीत – चुनाव

    समय चुनावों का आया तो ,नेता हरकत में आते । भोली भाली जनता से फिर ,वादे सौ- सौ कर जाते । सत्तर वर्षों से जनता ने ,दंश यही तो झेला है । पाँच साल अंतर पर...

  • नववर्ष बहुत मंगलमय हो

    नववर्ष बहुत मंगलमय हो

    यही मेरी शुभकामनाएं ,नव वर्ष बहुत आनन्दित हो । फैला उजास हो खुशियों का ,अरु हृदय सदा प्रसन्नचित हो । महका -महका हो अन्तर्मन, सुरभित पल्लव चहुँ ओर खिले । स्वर्ण रश्मियां बाँध लड़ी जो ,उषा...

  • सरसी छंद रचना – दुर्गा स्तुति

    सरसी छंद रचना – दुर्गा स्तुति

    नमो नमो है माता दुर्गे ,तेरी जय जयकार । सिंह वाहिनी मात भवानी ,वन्दन बारम्बार ।। तुम ही सृजन रूप में माता ,पालक रूप तुम्हार । कल्प अंत संहाररूपिणी ,जग तेरा विस्तार ।। शत रूपा  है...

  • सुगत सवैया – तृष्णा

    सुगत सवैया – तृष्णा

    मन रूपी घट  बसे साँवरे,फिर भी तृष्णा रही अधूरी । जैसे वन वन ढूँढ़ रहा मृग ,छिपी हुई मन में कस्तूरी । लोभ ,मोह अरु मद माया में ,मृग तृष्णा सा मन भटका है । जनम...

  • लौट आओ अब

    लौट आओ अब

    सुनो,….आज हमारे विवाह को 23 वर्ष पूरे होने आए ।इन तेईस वर्षों में हमने जाने कितने दुख सुख एक साथ देखे हैं ।बहुत से उतार- चढ़ाव जीवन मे सहे हैं । एक लंबा सफर एक साथ मिल...

  • समय

    समय

    टिक टिक करती समय की सुइयां कब देती हैं साथ । कितना दौडो भागो पीछे हाथ आये बस काश । कभी दर्द के कांटे छलनी मन कर जातें हैं । मुड़कर देखो अगर जरा  ये हमें...

  • शहीद दिवस (23 मार्च) पर कविता

    शहीद दिवस (23 मार्च) पर कविता

    धरती माँ के लाल भगत थे ,वीर अमर बलिदानी थे । आजादी  के दीवाने थे ,स्वतंत्रता सेनानी थे । हँसते हँसते गले लगाकर ,मृत्यू का मुख चूमा था । भारत माँ के जयकारों से ,वीरों का...