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  • छन्द मुक्त गीत

    छन्द मुक्त गीत

    पनघट पर नित नन्द का छौना मोहे छेड़ के जावै री मार कंकरिया मटकी फोरि, वो तो खूब सतावै री ।। बीच बजरिया अँखिया मारे ,पकड़ कलइया मोरी बनता कैसा ढीट तनिक भी नही लजावै री...


  • रिमझिम पड़ी फुहारें

    रिमझिम पड़ी फुहारें

    रिमझिम पड़े फुहार सुहानी,ऋतु वर्षा की आये । सँवर सँवर कर वृक्ष लताएं ,मन को रही रिझाये ।  घेरे में  सागर  की  बाँहों ,सरिता  है   इठलाती । लहर-लहर बनकर हमजोली , झूम-झूम कर गाती । अवनी...

  • गुलामी

    गुलामी

    दो बच्चो की माँ थी मैं इस उम्र में पति को जाने क्या हुआ. शायद भायी नही मैं कभी और मुझे बच्चो के साथ अकेली छोड कर वो परदेस जा बसे.  अब मैंने कैसे जीवन चलाया...

  • गीत – कलम/लेखनी/तूलिका

    गीत – कलम/लेखनी/तूलिका

    कलम कहीं कब रुक पाती है ,नभ में परे उड़ान ।  कह जाती है प्रीत दिलों की ,नयन लिए अरमान । आड़े-तिरछे शब्द उकेरे , भर-भर उर में  भाव । अनबुझ,गहरे इन शब्दों से,मेरा रहा लगाव...


  • इक परिवार चलाती माँ

    इक परिवार चलाती माँ

    मेहनत  मजदूरी कर करके ,इक परिवार चलाती माँ । दिन भर श्रम में जुट जानें को ,कुछ कम ही सो पाती माँ । पीठ बिठाकर बालक चलती , उस पर स्नेह लुटाती वो । शिशु को...

  • आयी सुहानी तीज

    आयी सुहानी तीज

    चली मनाने तीज सखी सब ,झूले डाले बागों में । गीत मनोहर छेड़ रही हैं ,मीठे -मीठे रागों में ।।1।। खेतों में लहराई फसलें ,है बहार चहुँ ओर दिखी । बदरा बन चूनर उड़ जाए ,नाचे...


  • सरसी छंद गीत – मुखौटा

    सरसी छंद गीत – मुखौटा

    विविध भाँति के सजा मुखौटे,जग में खुली दुकान । भीतर कौन छुपा है कैसे, हो किसकी पहचान । हर कोई है लेने वाला ,भारी लगती  भीड़ । मुख पर ओढ़ मुखौटा चलते ,नहीं समझते पीड़ ।...