गीत/नवगीत

सरसी छन्द गीत : ये जीवन इक रंग मंच है

ये जीवन इक रंग मंच है, अलग- अलग किरदार । कठपुतली के खेल में हुए ,हम सब हिस्सेदार । कोई नराधम हुआ धरा पर ,चलता  कुत्सित राह । ओर निभाये कोई  मीत बन ,डाल प्रीत की बांह। नानक सम है सतगुरु कोई ,तो कोई घन श्याम। भूमिकाएं सब निभा रहे हैं ,क्या रहीम क्या राम […]

गीत/नवगीत

सरसी छन्द होली गीत – सब मिल खेलो रंग

फागुन की छायी बहार है ,सब मिल खेलो रंग । हर सू बिखरा रंग केसरी ,मनवा हुआ मलंग । होली खेलें कुँवर कन्हाई ,करें हास परिहास । चुपके से राधा रंग दीन्हि ,श्याम रंग में खास । राधे बन मतवारी झूमें ,सांवरिया के संग ।। हर सू बिखरा रंग केसरी——– धूम मची है  गाँव गली  […]

मुक्तक/दोहा

होली का त्यौहार

अबके फागुन यूँ करो,मिले सभी का साथ । जला बैर की होलिका, गल डालो सब हाथ ।।१।। ढीठ छोरियां कर रही ,पानी की बरसात। नुक्कड़- नुक्कड़ बावरे ,भिगा रहे हैं गात ।।२।। घर घर आँगन में खिले ,फूल अबीर गुलाल । ऐसी होली प्रेम की ,आये सालों साल ।।३।। विविध रंग ले आ गया ,होली […]

गीत/नवगीत

कुकुभ छंद गीत : नारी तुम्हें नमन

जिसके  बिन जीवन मे तम है ,दीप वही  प्रकाशित नारी घर -आँगन जो सुरभित करती ,सुमन सुशोभित वह क्यारी। त्याग ,समर्पण ,दया,शीलता ,सब मिल नारी बनती है। कभी तोड़ने अहं दुष्ट का , चण्ड रूप भी धरती है । भिन्न -भिन्न रुपों को धारे , दुर्गा की है अवतारी  । घर -आँगन जो सुरभित करती […]

भजन/भावगीत

हरिगीतिका छन्द वंदना

विनती सुनो प्रभु पातकी की ,भय क्षरण  मम कीजिये  । निष्काम मेरी प्रार्थना  प्रभु ,रख पगों में लीजिये । तुलसी सजी हो बीच तन पर ,अंत हो जब श्वास का । जल गंग का मुख में डले तब ,प्रश्न हो जब प्यास का । मुझको पुकारें आप जिस  क्षण , तिथि रहे एकादशी। पाऊँ जनम […]

भजन/भावगीत

शिव आराधना

डम डम डम शिव डमरू बाजे, तीन लोक करते जयकार । पार्वती के प्रीतम प्यारे ,    जग के हो प्रभु ,पालनहार । सब देवों के देव कहाते, अविनाशी को कोटि प्रणाम, ज्योतिर्मय है रूप तुम्हारा ,अद्भुत लिंग अनेकों नाम , हे नटराजन है दुख भंजन, शरणागत हम आये  द्वार । पार्वती के प्रीतम प्यारे […]

गीत/नवगीत

विधा-सुगत सवैया

दुग्ध पिलाकर अपने उर  का ,आँचल बीच समा लेती हो । अपने हाथों से सहलाकर, मन की थकन मिटा देती हो । बोध कराती ऊंच नीच का ,कर ममत्व की छाँव निराली । प्रथम शिक्षिका मात तुम्ही हो ,संस्कार सिखलाने वाली । अपने सुत के हित हितार्थ माँ ,तुम सर्वस्व लुटा देती हो । अपने […]

कुण्डली/छंद

मदिरा सवैया : नैनन देख लजाय रहे

प्रेम कि बात छिपावत मोहन ,हाय हिया अकुलाय रहे । रीझ गयी सुन तान हरी जब,सुंदर गीत सुनाय रहे । चाँद समान खिले मुख प्रीतम,नैनन देख लजाय रहे । आन बसो हिय सांवरिया अब प्राण अधीर बुलाय रहे।। याद पिया तुमको करती जब ,पीर बढ़े इन नैनन में । भीतर भीतर जी तड़पा अरु ,ताप […]

गीत/नवगीत

व्यथा सुनाने आयी हूँ

ओढ़ निराशा का आँचल जो, क्रंदन को मजबूर हुई। विवश उसी भारत माता की, व्यथा सुनाने आयी हूँ। छंद लिखें कितने कवियों ने, अधर, नयन, मुख,गालों पर। रुदन नहीं क्यों लिख पाये वो, रिसे पाँव के छालों पर। मौन हुए भारत के जन भी, निर्धन की निर्धनता पर। दुबके रहे घरों के भीतर, झांके नहीं […]

गीत/नवगीत

लावणी छंद

कितना कुछ दे गया वर्ष यह ,कितना पीछे छूट गया । स्मृतियां ही शेष किसी की , भाग्य कहीं पर रूठ गया । शीला,सुष्मा ,अरुण जेटली ,मौन हो गए बैनो से । गए वर्ष में करी विदाई ,अश्रू पूरित नयनों से । मृत्यू भर ले गयी अंक में ।जीवन धागा टूट गया । कितना कुछ […]