गीत/नवगीत

गुरु पूर्णिमा पर गुरु को समर्पित  प्रार्थना

गुरुवर तुम ही बने सहारा ,जब जीवन छाया अँधियारा । अंतर्मन में ज्ञान दीप से ,तुमने फैलाया उजियारा । शिक्षक दुविधा  हरते हिय की  ,मन को नित नव चेतन करते । भाव सरस् मन में उपजाकर ,संस्कार हिय भीतर भरते । मन नैया जब डगमग डोले ,तब गुरुवर ने पर उतारा । अंतर्मन में ज्ञान […]

गीत/नवगीत

नर बने दानव खड़े हैं

है नज़र जिस ओर जाती,नर बने दानव खड़े हैं । खून पीने  को जिगर का, जान के पीछे  पड़े हैं ।। काज  करते  हैं  घिनौने, बोल  मीठे  बोलते  हैं, आम जन की जिंदगी  में, विष यही तो घोलते हैं। हो गए साधन सुलभ पर,क्यों विकल हर आदमी है, खुश धनिक हर ओर है अरु,दीन के […]

गीत/नवगीत

लावणी छन्द गीत- कलम आज जय गाती है

अरि की सुन ललकार युद्ध में,उठे हिलोर जहां हृद में । सज्य लुटाने प्राण उन्ही की,कलम आज जय गाती है । सीने  पर  गोली  खाकर भी, डटे रहे  बांके  रण में, धीर,वीर वो कहां रुके थे,मातृ भूमि  जिनके प्रण में, धन्य किया  है जनम वीर ने, मान बढ़ाया माता  का, त्याग दिया घर बार उसी […]

गीत/नवगीत

सुगत सवैया – गरमी

आतप,ताप भरा भू,अम्बर, विकट रूप ग्रीष्म ऋतु आयी । रुद्र रूप दिनकर ने धारा,देह तपी धरणी अकुलायी । जेठ मास की तपिश कँटीली, सूख गए वन उपवन सारे । लू के घायल करे थपेड़े ,त्राहि माम हर प्राण पुकारे । महासमर का दृश्य डराता,उग्र अगन दे रही दिखाई । रुद्र रूप दिनकर ने धारा,देह तपी […]

गीत/नवगीत

पिता से है पहचान

नव जीवन पाया माता से,अरु पितु से पहचान । नहीं किताबों से मिलता,जो सीखा उनसे ज्ञान ।। माँ दुलार की नदी पिता के,सँग आमोद-प्रमोद, संस्कार का दीप जलाया,हुआ सत्य का बोध । क्षमा,दया के बीज भरे उर ,संघर्षों की खाद, नैतिक गुण के पुष्प खिलाकर,शूल हरे अवसाद । प्रश्न सभी हल करते धर कर ,अधरों […]

गीत/नवगीत

गीतिका छन्द – इक अपूर्ण क्षति

बोझ सीने में दबाकर,सब अकेले सह गए । कुछ कभी कहते किसी से ,खुद सिसकते रह गए । हाथ जीवन से छुड़ाया,मृत्यु को अपना लिया । हैं सभी हैरान तुमने, ये अचानक क्या किया ।। आस का हर बंध तोड़ा,डोर जीवन तोड़कर । जिंदगी सस्ती नहीं थी,जो गए हो छोड़कर। मुश्किलें हैं अंग जीवन का […]

गीत/नवगीत

सरसी छन्द गीत : ये जीवन इक रंग मंच है

ये जीवन इक रंग मंच है, अलग- अलग किरदार । कठपुतली के खेल में हुए ,हम सब हिस्सेदार । कोई नराधम हुआ धरा पर ,चलता  कुत्सित राह । ओर निभाये कोई  मीत बन ,डाल प्रीत की बांह। नानक सम है सतगुरु कोई ,तो कोई घन श्याम। भूमिकाएं सब निभा रहे हैं ,क्या रहीम क्या राम […]

गीत/नवगीत

सरसी छन्द होली गीत – सब मिल खेलो रंग

फागुन की छायी बहार है ,सब मिल खेलो रंग । हर सू बिखरा रंग केसरी ,मनवा हुआ मलंग । होली खेलें कुँवर कन्हाई ,करें हास परिहास । चुपके से राधा रंग दीन्हि ,श्याम रंग में खास । राधे बन मतवारी झूमें ,सांवरिया के संग ।। हर सू बिखरा रंग केसरी——– धूम मची है  गाँव गली  […]

मुक्तक/दोहा

होली का त्यौहार

अबके फागुन यूँ करो,मिले सभी का साथ । जला बैर की होलिका, गल डालो सब हाथ ।।१।। ढीठ छोरियां कर रही ,पानी की बरसात। नुक्कड़- नुक्कड़ बावरे ,भिगा रहे हैं गात ।।२।। घर घर आँगन में खिले ,फूल अबीर गुलाल । ऐसी होली प्रेम की ,आये सालों साल ।।३।। विविध रंग ले आ गया ,होली […]

गीत/नवगीत

कुकुभ छंद गीत : नारी तुम्हें नमन

जिसके  बिन जीवन मे तम है ,दीप वही  प्रकाशित नारी घर -आँगन जो सुरभित करती ,सुमन सुशोभित वह क्यारी। त्याग ,समर्पण ,दया,शीलता ,सब मिल नारी बनती है। कभी तोड़ने अहं दुष्ट का , चण्ड रूप भी धरती है । भिन्न -भिन्न रुपों को धारे , दुर्गा की है अवतारी  । घर -आँगन जो सुरभित करती […]