गीत/नवगीत

विधा-सुगत सवैया

दुग्ध पिलाकर अपने उर  का ,आँचल बीच समा लेती हो । अपने हाथों से सहलाकर, मन की थकन मिटा देती हो । बोध कराती ऊंच नीच का ,कर ममत्व की छाँव निराली । प्रथम शिक्षिका मात तुम्ही हो ,संस्कार सिखलाने वाली । अपने सुत के हित हितार्थ माँ ,तुम सर्वस्व लुटा देती हो । अपने […]

कुण्डली/छंद

मदिरा सवैया : नैनन देख लजाय रहे

प्रेम कि बात छिपावत मोहन ,हाय हिया अकुलाय रहे । रीझ गयी सुन तान हरी जब,सुंदर गीत सुनाय रहे । चाँद समान खिले मुख प्रीतम,नैनन देख लजाय रहे । आन बसो हिय सांवरिया अब प्राण अधीर बुलाय रहे।। याद पिया तुमको करती जब ,पीर बढ़े इन नैनन में । भीतर भीतर जी तड़पा अरु ,ताप […]

गीत/नवगीत

व्यथा सुनाने आयी हूँ

ओढ़ निराशा का आँचल जो, क्रंदन को मजबूर हुई। विवश उसी भारत माता की, व्यथा सुनाने आयी हूँ। छंद लिखें कितने कवियों ने, अधर, नयन, मुख,गालों पर। रुदन नहीं क्यों लिख पाये वो, रिसे पाँव के छालों पर। मौन हुए भारत के जन भी, निर्धन की निर्धनता पर। दुबके रहे घरों के भीतर, झांके नहीं […]

गीत/नवगीत

लावणी छंद

कितना कुछ दे गया वर्ष यह ,कितना पीछे छूट गया । स्मृतियां ही शेष किसी की , भाग्य कहीं पर रूठ गया । शीला,सुष्मा ,अरुण जेटली ,मौन हो गए बैनो से । गए वर्ष में करी विदाई ,अश्रू पूरित नयनों से । मृत्यू भर ले गयी अंक में ।जीवन धागा टूट गया । कितना कुछ […]

गीत/नवगीत

सागर की लहरें

स्वर की लहरी पर मंद मंद , सागर की लहरें गीत गुनें । उठ- उठ गिर-गिर मद में बहकर ,जाने क्या क्या कह जाती हैं । उन्मुक्त लहर के राज कई ,सागर के हृदय समाए हैं । लेता समेट बाहें फैला  ,जो अपने हुए पराये हैं । है नीरनिधि विस्तार लिए ,यह दृष्टि जहाँ तक […]

गीत/नवगीत

सरसी छन्द : गीतआयी नवल प्रभात

आशा की स्वर्णिम किरणें फिर ,लायी नवल प्रभात । अब होगा उत्थान मनुज का ,तम पर कर प्रतिघात ।। रंग भेद औ जाति- पाति की,टूटेंगी दीवार । क्षमताओं की दीप्त प्रभा में ,छँटे सभी अँधियार । ऊँचा रहे मनोबल तो हो ,निराशाओं की मात । अब होगा उत्थान मनुज का ,तम पर कर प्रतिघात ।। […]

गीत/नवगीत

चूर करो अभिमान

जो करें भंग शांति देश की , मत करना सम्मान । संदिग्धो का पता लगाकर ,चूर करो अभिमान । जो विकास में जहर घोलते ,फैलाते अफवाह । ऐसे मक्कारों की जग को ,क्योंकर हो परवाह। आगजनी ,उपद्रव जिन्होंने ,ध्येय लिया है मान । संदिग्धो का पता लगाकर ,चूर करो अभिमान ।। है संदिग्ध भरे अपनों […]

गीत/नवगीत

शीत लहर है आयी

सुबह हुई है सिमट धुंध में ,ठिठुरन करती अगुआई ।  रंग सभी कुहरे में लिपटे ,शीत लहर यूँ गहराई । शरद उगलती भांप साँस से,जमते पलकों के घेरे । सिकुड़न बढ़ती अंग -अंग में ,हुए ठंड के जब फेरे । ढके ओस से गांव शहर सब ,नहीं दीखती परछाई । रंग सभी कुहरे में लिपटे […]

गीत/नवगीत

सार_छंदाधारित_गीत – मौन विहग है कब से

ठूंठ वृक्ष है रहित पात से ,सन्नाटा है छाया । हरियाली का चीर हरण कर ,पतझड़ है  इतराया ।। नयन नीर भर खड़ा अकेला  ,साथी छूटे जबसे । किसको अपनी दशा दिखाए ,मौन विहग है कबसे । कौन यहाँ अब सुने हृदय की ,कैसा दृश्य दिखाया ।  हरियाली का चीर हरण कर ,पतझड़ है  इतराया […]

गीत/नवगीत

कल तुम्हारी जीत होगी

हौंसलो को आजमाओ ,साथ साहस का न छोड़ो । लाख भय हो हारने का ,तय सफलता भी मिलेगी । मत मनोबल टूटने दो ,कल तुम्हारी जीत होगी । डाल कर बाहें गले में ,वो बनी मनमीत होगी । आसमां कदमों में होगा ,गर्व से धरती हिलेगी । लाख भय हो हारने का ,तय सफलता भी […]