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  • समसामयिक दोहे

    समसामयिक दोहे

    (1) दुर्घटना पथ पर हुई, चोट लगी गम्भीर । देख देख सब चल दिये, जागा नही जमीर।। (2) कुमकुम विवश पुकारती, कौन बढ़ाये हाथ । बैरी सब जग  ही हुआ, छोड़ चले सब साथ ।। (3)...

  • ऐसी ईद मनाएं हम

    ऐसी ईद मनाएं हम

    ईद  मने हर दिन सबकी ही ,दीवाली हर रात रहे । मन की मन से प्रीत बावरी ,सरस्  सलिल जज्बात रहे । मकसद इक सद्भाव,शांति का ,आतंकी का अंत करो । दो हर दिल पैगाम मुहब्बत...

  • गीत – नफरत

    गीत – नफरत

    चलो मिटायें नफरत दिल से , यही सच्चा प्रयास करें । सरस , सरल हो जाये जीवन ,ऐसी मन से आस करें । व्यर्थ दलित को निम्न जानकर,अहम हृदय पर क्यों थोपें जाति -पाति के भेद...

  • नारी

    नारी

    जिसके  बिन जीवन मे तम है ,वह प्रकाश ही  नारी है। घर -आँगन जो सुरभित करती ,सुमन सुशोभित  क्यारी है । त्याग ,समर्पण ,दया,शीलता ,से मिलकर नारी बनती  । कभी तोड़ने अहं दुष्ट का ,चंडी रूप...

  • सुगत सवैया- परिवर्तन

    सुगत सवैया- परिवर्तन

    परिवर्तन है नियम प्रकृति का, परिवर्तित चहुँ दिश होती है। मन, समाज, स्थिति, ऋतुओं में, सृष्टि नवल कुछ तो बोती है। कुछ नवीन हर पल होता है, यह विकास परिवर्तन का है। तुम देखो अनुवेषन कर...

  • लावणी छंद – मौसम

    लावणी छंद – मौसम

    ज्यों- ज्यों  धूप चढ़ी अम्बर पर ,ढली रात भी बादल में । इक झटके में हवा जा छुपी, जाने किसके आँचल में । धीरे-धीरे गर्म हुआ फिर , वसुधा का कोना-कोना- झुलसा है मन इस मौसम...


  • गीत – श्रमिक जीवन

    गीत – श्रमिक जीवन

    कब जीवन है सुखद सरल सा , कठिनाई में ढलना है। शीष धार लकड़ी का गठठर ,तीव्र वेग से चलना है । रहने को नहि ठौर ठिकाना ,बालक छोड़ कहां आऊँ । हुआ क्षुधातुर शिशु  कोमल...


  • लावणी छंद – नारी की व्यथा

    लावणी छंद – नारी की व्यथा

    तनी अँगुलियाँ चढ़ी भृकुटियां, अरु तानों को सहती थी। बहुत सोचती प्रति उत्तर दूं, किंतु मौन ही रहती थी। संस्कार से बंधा हुआ मन, लोक लाज से नैन भरे। किंतु रहे कुत्सित जग वाले, करुण हृदय...