गीत/नवगीत

कुकुभ छन्द गीत – जंग जीत ही जायेंगे

कोरोना से छिड़ी भयंकर,जंग जीत ही जायेंगे । अभी ज़रा विचलित हैं लेकिन,कब तक यूँ घबरायेंगे ।। मानवता के शुक्ष्म शत्रु का,छद्म रूप दिखलाना है । है सवार संकल्प शीश पर,अब पाषाण गलाना है । उग्र ज्वाल यदि हृदय भरेंगे, नष्ट तभी कर पाएंगे ।। कोरोना से छिड़ी भयंकर……..। रख कर  दूरी भीड़-भाड़ से, कहीं […]

गीत/नवगीत

वीर छन्द गीत – कुछ तो लोग कहेंगे

कुछ तो लोग कहेंगे इसकी,करे उम्र भर क्यों परवाह । नाहक ही खुशियां खो बैठे,अंतर्मन का करके दाह । उलझ गए इस यक्ष प्रश्न पर,नही मगर पाये परिणाम । आत्म अनुभूति तजी स्वयं ही,नष्ट किये सुख स्वत:तमाम । करो वही जो निज को भाए, क्या हो प्रतिपल करके आह ।। कुछ तो लोग कहेंगे ………………। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मैं बडी क्या हो गयी दुश्मन ज़माना हो गया एक मेरा ही बदन सबका निशाना हो गया …! कस रहें हैं  फब्तियाँ सब राह में होकर खडे रोज उस रस्ते से सबका आना जाना हो गया …!! तकते हैं यूँ घूर के जैसे मैं उनकी मल्कियत हर कोई मेरी नज़र का ही दिवाना  हो गया […]

गीत/नवगीत

सार  छन्द 

मिल बाबुल से बिटिया रोये ,छोड़ चली घर द्वारा । सपनों से भी जो सुंदर था ,प्राणों से भी प्यारा । जब मैं छोटी सी बच्ची थी ,जल्दी तुम घर आते थे । गुड़िया ,गुड्डा,और खिलौने ,कितने सारे लाते थे । लेकिन सबसे अच्छा लगता ,मुझको साथ तुम्हारा । साथ तुम्ही तो होते मैंने ,जब […]

गीत/नवगीत

मैं पीड़ा गाने आयी हूँ

ओढ़ निराशा का आँचल जो ,क्रंदन को मजबूर हुई । विवश उसी भारत माता की,व्यथा सुनाने आयी हूँ । छंद लिखें कितने कवियों ने ,अधर ,नयन, मुख,गालों पर । रुदन नहीं क्यों लिख  पाये वो,  रिसे पाँव के छालों पर । मौन हुए भारत के जन भी  ,निर्धन की निर्धनता पर । दुबके रहे घरों […]

गीत/नवगीत

सार छंद गीत : मां ममता की मूरत

झाँके मन में साया मां का, जब मैं हँसती, गाती। तेरी यादों की फुलवारी, मन अँगना खिल जाती। दिनकर से भी प्रथम भोर में, माँ मेरी जग जाती। सुघड़, सुशील कहाती गृहिणी, सब दायित्व निभाती। दिवस रैन तक श्रम थी करती, कामों में रत रहती। थक कर चूर भले हो जाती, मुख पर शिकन न […]

गीत/नवगीत

कुहुक- कुहुक कोयलिया बोले

उपवन-उपवन शाखा- शाखा ,कुहुक- कुहुक कोयलिया बोले मीठे- मीठे गीत सुनाकर,  आमों में मीठा रस घोले ।   आम्र वृक्ष फल-फूल रहे हैं ,हरियाली हर ओर छा रही । वात बह रही मदिर मदिर जब,हाय!सजन की याद आ रही।  अंग-अंग पुलकित धरणी का ,अरु अम्बर छाई उमंग है । लहर-लहर आनन्दित करती ,सागर में उठकर […]

गीत/नवगीत

लहरें जाने क्या कहती हैं

स्वर की लहरी पर मंद मंद , सागर की लहरें गीत गुनें । उठ- उठ गिर-गिर मद में बहकर ,जाने क्या क्या कह जाती हैं । उन्मुक्त लहर के राज कई ,सागर के हृदय समाए हैं । लेता समेट बाहें फैला ,जो अपने हुए पराये हैं । है नीरनिधि विस्तार लिए ,यह दृष्टि जहाँ तक […]

गीत/नवगीत

आयी सुहानी तीज

चली मनाने तीज सखी सब ,झूले डाले बागों में । गीत मनोहर छेड़ रही हैं ,मीठे -मीठे रागों में ।।1।। खेतों में लहराई फसलें ,है बहार चहुँ ओर दिखी । बदरा बन चूनर उड़ जाए ,नाचे मन का मोर सखी । पवन करे व्यवहार अनूठा ,इतराकर  इस मौसम में । वसुधा का चुम्बन लें बूँदे […]

गीत/नवगीत

गीत  लावणी छंद – आज नई शुरुआत करें

आओ भूलें!कटु अनुभव को, क्यों उनकी हम बात करें । संचित कर मृदु भाव हृदय में, आज नई शुरुआत करें । घाव दिलों के भरे वक्त ही, सिद्ध समय ही कर देता । अंत बाद, आरम्भ हुआ है, विश्वास हृदय को देता । उपज न पाए,मन नीरसता कटुता पर आघात करें। संचित कर मृदु भाव […]