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  • जीना  किया मुहाल धरा का

    जीना किया मुहाल धरा का

    जीना  किया मुहाल धरा का ,संकट में मन प्राण किया है । ढेर लगा,मल औ कचरे का , हैवानों सा काम किया है । नदियों के जल में मिलता मल ,दूषित करते हैं गंगाजल । यदि...


  • चल कैलाश पति के धाम

    चल कैलाश पति के धाम

    ॐ नाम का दर्शन होगा ,चल कैलाश पति के धाम । शिखर हिमालय मानसरोवर ,सम पूरण हैं चारों धाम । हिंदू संस्कृति का प्रतिबिंब ,कल्पवृक्ष की छाँव यहाँ , पवित्र  रूप  शिव शंकर का है, हिम...

  • छन्द मुक्त गीत

    छन्द मुक्त गीत

    पनघट पर नित नन्द का छौना मोहे छेड़ के जावै री मार कंकरिया मटकी फोरि, वो तो खूब सतावै री ।। बीच बजरिया अँखिया मारे ,पकड़ कलइया मोरी बनता कैसा ढीट तनिक भी नही लजावै री...


  • रिमझिम पड़ी फुहारें

    रिमझिम पड़ी फुहारें

    रिमझिम पड़े फुहार सुहानी,ऋतु वर्षा की आये । सँवर सँवर कर वृक्ष लताएं ,मन को रही रिझाये ।  घेरे में  सागर  की  बाँहों ,सरिता  है   इठलाती । लहर-लहर बनकर हमजोली , झूम-झूम कर गाती । अवनी...

  • गुलामी

    गुलामी

    दो बच्चो की माँ थी मैं इस उम्र में पति को जाने क्या हुआ. शायद भायी नही मैं कभी और मुझे बच्चो के साथ अकेली छोड कर वो परदेस जा बसे.  अब मैंने कैसे जीवन चलाया...

  • गीत – कलम/लेखनी/तूलिका

    गीत – कलम/लेखनी/तूलिका

    कलम कहीं कब रुक पाती है ,नभ में परे उड़ान ।  कह जाती है प्रीत दिलों की ,नयन लिए अरमान । आड़े-तिरछे शब्द उकेरे , भर-भर उर में  भाव । अनबुझ,गहरे इन शब्दों से,मेरा रहा लगाव...