कविता

गर्व है हम भारतवासी हैं

गर्व है …  हम भारतवासी हैं जहाँ गंगा ,शिव और काशी है, हैं मेल – मिलाप के अच्छे ढंग, हम आपस में जो विश्वासी हैं .! उत्तर में हिम – हिमालय है जो देवस्थान, भव्यालय है दक्षिण में है सागर लहराता बारह कोटिक शिवालय है। जहाँ  देवी – देवता  को पूजें भूलें  ना , भक्ति […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुशबुओं की तरह हम बिखर जाएंगे, इक न इक दिन जहाँ से भी तर जाएंगे ।। तुम सँभलना बहुत ही कठिन है डगर जिस्म से जाँ तक ,…  घाव भर जाएंगे ।। बात रोटी मकाँ और मकीं तक नहीं नाम भी कुछ रहे ,….ऐसा कर जाएंगे ।। जिंदगी जो मिली है ,…सलामत रहे क्या भरोसा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जिंदगी से भला क्या गिला कीजिए सबकी’ किस्मत है ,यूंही जिया कीजिए। देखता तो खुदा भी यूं हमको यहाँ देखिये  मत किसी से दगा़ कीजिए। जिनसे दिल की लगी ,दिल्लगी  हम करें उनकी महफिल में इज्ज़त बढा़ दीजिए। जख़्म देकर हमें याद आते हैं जो आप उनको ही दिल से मिटा दीजिए। हर शह्र क्यों […]

गीतिका/ग़ज़ल

 ग़ज़ल

जीत की खातिर न यूँ तकरार करना हार को भी शान से स्वीकार करना। आग का दरिया अगर हो राह में भी हौसले से मुश्किलों को पार करना । बन न जाए इक तमाशा आदमी भी सोच अपनी भी न  यूँ  बेकार करना । हुस्न, दौलत से मुहब्बत लाजिमी है कोई हद इसके लिये मत […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हैरत की बात उनको’ ये कैसा मलाल है क्यूँ दोस्ती में रंजिश , दिल में उबाल है ! आओ हमारे घर पे कभी तुम भी यार तो बातें करेंगे रू ब रू कैसा खयाल है ! उलझे हुए हैं खुद भी मुहब्बत की राह में दिल में भी उड़ रहें हैं रंग ए गुलाल है […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

थरथराते  लब  थे  मेरे  आपको  यूँ  देखकर होश उड़ जाते कभी थे आपको यूँ देखकर। जाँ  निकल जाती  थी  मेरी  आपके  दीदार से दिल  ये धड़का था हमारी आपको यूँ देखकर। कुछ हया थी और हमको डर भी उनका था जरा कुछ निगाहों की  थी  बंदिश आपको यूँ देखकर। वो जमाना  खूब था  मौसम सुहाना  […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

मेरी कश्ती का अब तू भी सहारा हो न पायेगा, कभी मझधार दरिया का किनारा हो न पायेगा। कहीं पतवार जो टूटी …तो नैया डूब जाएगी खुदा करना जरा रहमत उतारा हो न पायेगा। मिले जन्नत अगर मुझको नहीं जाना वहाँ बस यूँ मेरी माँ के तो चरणों सेे वो प्यारा हो न पायेगा। करो […]

लघुकथा

लघुकथा : मधुरिमा

ईश्वर ने अनुपम कृति बच्चों के रूप में अद्भुत उपहार के रूप में हमें प्रदान की है। एक छोटी सी घटना आज से दो वर्ष पूर्व दिल्ली में मेरे मायके में घटी। सर्दियों की एक शाम मेेरे पिता जी अचानक बीमार पड़ गए। रात होने तक उन्हें बेहोशी आने लगती। सुबह थोड़ा ठीक महसूस करने […]