बालोपयोगी लेख

किस्सा कुँअर सिंह के

उनके किस्से बच्चे या जवान क्या, वृद्धों में भी शक्ति और ऊर्जा का नवसंचार कर दे तथा उनमें स्फूर्ति भर दे ! आज़ादी के ऐसे दीवाने, भारत और बिहार के ऐसे जमींदार, जो अंग्रेजों के विरुद्ध 80 वर्ष की अवस्था में भी ज़मींदारी त्यागते हुए अपनी माटी के रक्षार्थ ‘हल्ला बोल’ दिए, ऐसे अमर सेनानी […]

बालोपयोगी लेख

महान गणितज्ञ

सम्पूर्ण संसार के गणितज्ञ और थोड़े-बहुत गणित के जानकार भी ‘अभाज्य संख्या’ व प्राइम नंबर्स ज्ञात करने के नाम से परेशान और आक्रान्त रहा है । भारत ‘संख्या-सिद्धांत’ व नम्बर थ्योरी के मामले में अद्भुत जानकार देश रहा है । महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन ने 33 वर्षीय अल्प-जीवन में ही ‘संख्याओं’ पर प्रमेय दिए, […]

बालोपयोगी लेख

शहनाई अब कहाँ ?

शादी-समारोहों में सुनाई नहीं पड़ती शहनाई ! उच्च ध्वनि तीव्रता वाले डी.जे. और इसके धुन पर थिरकते बाराती और सराती, जिनकी आवाज किसी कमजोर घर को गिरा दे और किसी बुजुर्ग के मौत का कारण बन जाय । आज इस डी.जे. का मतलब ‘डेथ जर्नी’ (मृत्यु यात्रा) हो गया है । शादी-समाराहों में टेबल की […]

बालोपयोगी लेख

समय से घर पहुँच जाना चाहिए

हमारे घर पापा मम्मी कालेज भेजते हैं तो हमें भी डर लगता है। अपने पापा मम्मी को छोड़कर जाना हमको अच्छा नहीं लगता। भीड़ में कोई गुंडा हमको मार न डाले और हमें नुकसान न पहुँचा दे, हमको इसका डर लगता है। हमें अपने पापा मम्मी को छोड़कर नहीं जाना चाहिए। जाना है तो अपने […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म बालोपयोगी लेख सामाजिक

सेवा परमो धर्मः सूत्र-वाक्य की परीक्षा

ओ३म् हमारे देश में कुछ वाक्य व सूत्र प्रचलित हो गये हैं जिनमें से एक सूत्र वाक्य है ‘सेवा परमो धर्मः’। इसका अर्थ सभी जानते हैं। इसके आधार पर सेवा ही परम धर्म है। पता नहीं यह शब्द व वाक्य कहां से आया है? यह वेद वाक्य तो कदापि नहीं हो सकता और न ही […]

बालोपयोगी लेख

स्कूल की छुट्टी

लो स्कूल की छुट्टी हुई अब घर जाएंगे। बहुत तेज भूख लगी है जो मम्मी ने बनाया वही खा लेंगे। टी वि का रिमोट मम्मी से छीन कर कार्टून फिल्म देखेंगे। कुछ देर रेस्ट कर के स्कूल से मिला होमवर्क पूरा कर लेगे। स्कूल की मैडम से मिले गुड स्टार को मम्मी को बताएंगे। मैडम […]

बालोपयोगी लेख

पेड़ की आत्मकथा

मैं एक पेड़ हूं. मगर, आत्मनिर्भर पेड़ हूं. अपना भोजन स्वयं बनाता हूं. क्या आप जानना चाहते हो कि यह कार्य मैं किस तरह करता हूं ? हां. तो चलिए, मैं बताता हूं. मैं किस तरह काम करता हूं. मेरे अंदर एक भोजन बनाने का कारखाना है. इस कारखाने का नाम हरितलवक है. यह कारखाना […]

बालोपयोगी लेख

बाल-साहित्य

बच्चों की आवश्यकताएँ  सर्वव्यापी है , जहाँ उन्हें ज्ञान देने की आवश्यकता है , वही उन्हें सम्मान देने की भी आवश्यकता हैं| उन्हें संस्कारी बनाना है तो उसे सुविचारी भी  बनाना है , उन्हें परम्परा और परिपाटी से परिचित   कराना है तो स्वयं करने और सीखने के मौके को  भी  दिये  जाना  हैं|  उनको विवेकशील  […]

बाल साहित्य बालोपयोगी लेख

क्यों होते हैं बच्चे निराश !

लेखक की बालमनोविज्ञान परक कृति क्यों बोलते हैं बच्चे झूठ से. क्यों होते हैं बच्चे निराश ! सामान्यतः माता-पिता और अध्यापकों को कहते सुना व देखा जाता है कि अमुक बच्चा कमजोर है। उसे कुछ नहीं आता सुस्त रहता है।अकेले गुमसुम बैठा रहता है जबकि वास्तविकता यह होती है कि बालक विभिन्न शरीरिक मानसिक कारणों […]

बालोपयोगी लेख सामाजिक

गिनतारा (अबेकस) बच्चों के मानसिक विकास का अद्भुत साधन 

आज कल हर माता पिता के लिए यह चिंता का विषय है कि उनका बच्चा पढ़ाई लिखाई में अव्वल हो, और यह कोई नई बात भी नहीं है, सदियों से ऐसा होता आया है, लेकिन जहाँ पहले मां बाप बच्चे के 10 या 10+2 कि पढ़ाई के समय ही ऐसा सोचते थे पर अब यह एक […]