पर्यावरण

मानव अपने भविष्य की जड़ स्वयं खोद रहा है

कितने दुख और अफ़सोस की बात है कि मानव प्रजाति, जो अपने आपको इस पृथ्वी का सबसे बुद्धिमान प्राणी समझता है!, वह जिस पृथ्वी पर पैदा हुआ है, जिन खेतों से अन्न प्राप्त करता है, जिन नदियों के जल से उसका जीवन का हर काम होता है, जिन हरे-भरे जंगलों से वह ऑक्सीजन लेकर जिंदा […]

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‘फैनी तूफान’ : भविष्य के किसी बड़े खतरे की घण्टी तो नही?

जिस तूफ़ान का अनुमान मौसम वैज्ञानिकों ने करीबन हफ्ते भर पहले ही लगा लिया था, शुक्रवार को उसने उड़ीसा तट से भारत मे प्रवेश किया और पूरे उत्तर-पूर्वी भारत को गम्भीर रुप से प्रभावित कर भयंकर तबाही के निशान छोड़ गया। हालांकि भारत सरकार ,सेना और सुरक्षा कर्मियों ने अथक प्रयास से लाखों लोगों को […]

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माऊँट एवरेस्ट भी कचरे से पटा

आज के लगभग सभी समाचार पत्रों ने हिमालय की सबसे ऊँची चोटी माऊँट एवरेस्ट के बारे में बहुत ही व्यथित कर देने वाला समाचार प्रकाशित किए हैं। खबरों के अनुसार समूचे उत्तर भारत की सैकड़ों छोटी बड़ी नदियों के उद्गम श्रोत हिमालय के उच्चतम शिखर माऊँट एवरेस्ट पर मानव की आवाजाही अब एक साधारण पर्यटन […]

पर्यावरण

किसान के मित्र नेवले का भी अस्तित्व गंभीर संकट में

‘नेवला’ एक ऐसा निष्पृह शब्द है, जिसके अवचेतन मन में याद आते ही एक ऐसे चुलबुले, तेज दृष्टि वाले, मटमैले, चितकबरे, सुरमुई रंग के छरहरे, फुर्तीले और बहादुर जीव की तस्वीर उभरने लगती है, जो हमारे बचपन के दिनों में गाँवों में हमारे घरों के आसपास अक्सर, रास्तों में, गलियों में हमारे रास्ते को काटकर […]

पर्यावरण

घायल धरती करे पुकार

मानव जीवन में अगर कोई सम्बंध सर्वाधिक उदात्त, गरिमामय, पावन और प्रेमपूर्ण है तो वह है मां और पुत्र का सम्बंध। एक मां कभी भी अपनी संतान को भूखा-प्यासा, बेबस और कष्ट का जीवन जीते नहीं देख सकती और ऐसा कोई पुत्र भी नहीं होगा जो मां की कराह सुन व्याकुल और व्यथित न हो। […]

पर्यावरण

वृक्षों का उपचार भी किया जाए

पर्यावरण के हित मे कई संस्थाए कार्य कर रही है। कई संस्थाए वृक्षारोपण का पुनीत कार्य करती है।उन्हें बीमार वृक्षो की औऱ ध्यान देना होगा।ताकि वृक्ष जो सेकड़ो वर्ष पुराने है उनका इलाज कर उनको सुरक्षित किया जा सके।वृक्षों को प्राचीन समय से लोग पूजते आ रहे है ,इसके पीछे भीषण गर्मी मे ठंडी सुखद […]

पर्यावरण

विलुप्त होने के कगार पर राजस्थान का राज्य पक्षी ‘गोडावण’

समूचे विश्व के समक्ष आज पर्यावरण संरक्षण व प्राकृतिक संतुलन एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। दिनोंदिन बढ़ती जनसंख्या के कारण वनोन्मूलन की प्रक्रिया तेज होने से परिंदों की कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं और कई पक्षी ऐसे हैं, जिनकी संख्या लगातार कम हो रही है। संरक्षण के लिए मोहताज इन […]

पर्यावरण

हमारी पृथ्वी, हमारा पर्यावरण और हमारा कर्तव्य

हमारी पृथ्वी अपने आँगन में प्रकृति और पर्यावरण नामक अपने करिंदों से करोड़ों-अरबों वर्षों के अथक लगन, परिश्रम और अद्भुत अपनी उत्कृष्ट सोच से करोड़ों किस्म के फूलों, रंगविरंगी तितलियों, भौरों, सुरीले कंठ वाली और अपने अद्वितीय रंग की छटा वाले परिंदों, हरेभरे मैदानों में मन्त्रमुग्ध करतब दिखाने वाले सैकड़ों नस्लों के जंगली मृगों, हिरनों, […]

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लोकपक्षी गौरैया के अस्तित्व पर मंडराता संकट

आज से एक डेढ़-दो दशक पूर्व तक हमारे घरों में एक नन्ही प्यारी चिड़िया की खूब आवाजाही हुआ करती थी। वह बच्चों की मीत थी तो महिलाओं की चिर सखी भी। उसकी चहचहाहट में संगीत के सुरों की मिठास थी और हवा की ताजगी का सुवासित झोंका भी। नित्यप्रति प्रातः उसके कलरव से लोकजीवन को […]

पर्यावरण

इस धरती पर गौरैयों के रहने का मतलब ?

(20 मार्च विश्व गौरैया दिवस ) “गौरैया”…यह नाम सुनते ही प्रायः हम बचपन की यादों में खो जाते हैं ,जहाँ माँ घर के आंगन में रखी लकड़ी की चौकी (तखत ) पर सुबह-सुबह अभी-अभी बना गर्मा-गर्म चावल , नमक मिला कर मांड़ के साथ या अरहर की दाल के साथ देतीं थीं ..तभी आँगन में […]