धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा सामाजिक

साई बाबा का विरोध कितना सही कितना गलत

  साईं बाबा के नाम को सुर्ख़ियों में लाने का श्रेय शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी को जाता हैं जिनका कहना हैं की साई बाबा की पूजा हिन्दू समाज को नहीं करनी चाहिए क्यूंकि न साई ईश्वर के अवतार हैं न ही साई का हिन्दू धर्म से कुछ लेना देना हैं। साई बाबा जन्म से मुस्लमान […]

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अरब के मुसलमानों से उच्चतम था भारत का ज्ञान

जब इस्लाम की भारत में पहली जीत सिंध में हुई तो इस्लाम के लिए यह कोई नई चीज नहीं थी क्यों की इससे पहले इस्लाम कई मुल्को में युद्ध कर के जीत चूका था । पर इस विजय से मुस्लिम संस्कृति पर गहरा असर पड़ा, मुसलमान भारत में आये तो भारत की उच्च संस्कृति देख […]

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मैं आस्तिक क्यों हूँ? (भाग – ३)

       नास्तिक बनने के क्या कारण हैं? समाधान- नास्तिक बनने के प्रमुख कारण हैं १.  ईश्वर के गुण,कर्म और स्वभाव से अनभिज्ञता २.  धर्म के नाम पर अन्धविश्वास जिनका मूल मत मतान्तर की संकीर्ण सोच हैं ३.  विज्ञान द्वारा करी गई कुछ भौतिक प्रगति को देखकर अभिमान का होना ४.  धर्म के नाम पर दंगे,युद्ध, उपद्रव आदि ईश्वर […]

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धर्म/मजहब पर विश्व प्रसिद्ध लोगो के विचार

यूँ तो मजहब के ठेकेदार हमेशा से जनमानस को “ईश्वर” के जाल में फंसा के उनका शोषण करते आये हैं , पर जब किसी ने भी इनके “काल्पनिक” ईश्वर और उसके नाम पर चलने वाले धंधे के शोषण से लोगो को मुक्त करने का प्रयास किया है उसे इन लोगो ने “नास्तिक ” करार दिया […]

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हिंदू क्यूँ पूजता है साई बाबा को?

मित्रो , आपने मेरे पिछले लेख “साईं बाबा : कुछ शंकाएं” में पढ़ा कि किस तरह हिन्दू अपने धर्म ग्रंथो में वर्णित ईश्वर, भगवान, देवी -देवताओं को छोड़कर आज कल साईं भक्त बनता जा रहा है … हर गली हर चौराहे पर साईं मंदिर मिल जायेगा जहाँ साईं के हिन्दू अंधभक्तों की भीड़ जमा रहती […]

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हिंदू और साई बाबा: कुछ शंकायें

हिन्दुओं में एक बड़ा तबका साईं बाबा को मानने वाला तथा उनका पूजक है, साईं के एकल मंदिर के आलावा शायद ही कोई ऐसा मंदिर होगा जहां उनकी मूर्ति न हो | साईं संध्या, साईं भजन जैसी सामग्रियां शायद और किसी भी हिन्दू देवी- देवता से ज्यादा उपलब्द हो बाजार में | ब्रह्मण जो कभी […]

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आस्तिको द्वारा ईश्वर के विषय में बोला गया झूठ

यदि ईश्वर का अस्तित्व वास्तव में होता तो लोगो में उसको लेके भिन्न भिन्न धारणाये क्यूँ हैं? अलग अलग मतों के लोगो की ईश्वर को लेके मान्यताये मान्यताये अलग और विपरीत क्यों हैं? यंहा तक की हिन्दुओ में ही ईश्वर को लेके सैकड़ो मत प्रचलित हैं । कोई कहता है इश्वर सगुन है तो कोई […]

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मैं आस्तिक क्यों हूँ? (भाग – २)

       धर्म और मत/मजहब में अंतर क्या हैं? यह समझने की आवश्यकता हैं। मज़हब अथवा मत-मतान्तर के अनेक अर्थ हैं। मत का अर्थ हैं वह रास्ता जो स्वर्ग और ईश्वर प्राप्ति का हैं जोकि उस मत अथवा मज़हब के प्रवर्तक अर्थात चलाने वाले ने बताया हैं। एक और परिभाषा हैं की कुछ विशेष मान्यताओं पर ईमान […]

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मैं आस्तिक क्यों हूँ? (भाग – १)

एक नया नया फैशन चला हैं अपने आपको नास्तिक यानि की atheist कहलाने का जिसका अर्थ हैं की मैं ईश्वर की सत्ता, ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं रखता। अलग अलग तर्क प्रस्तुत  किये जाते हैं जैसे अगर ईश्वर हैं तो दिखाई क्यों नहीं देते? अगर ईश्वर हैं तो किसी भी वैज्ञानिक प्रयोग के द्वारा सिद्ध क्यों नहीं होते? अगर ईश्वर […]

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आज मुसलमान ही मुसलमान का दुश्मन क्यों बना है?

अजीब नज़ारा है. जिस इस्लाम को भाईचारे और समानता की मिसाल के रूप में पेश किया जाता है, आज उसी इस्लाम को मानने वाले एक दूसरे के जानी दुश्मन बने हुए हैं. दुनिया के किसी भी देश में देख लो, जहां भी मुसलमानों की अच्छी खासी संख्या है, वहीँ आज सबसे अधिक अशांति है. भारत […]