कविता

हर रूप में नारी महान…. (कविता)

क्रोधाग्नि में हो तो कुछ भी कर गुजरती है ,
स्नेह में हो तो आकाश को भी पीछे छोड़ देती है,
वात्सल्य की मूर्ति बन अवनि के गरूर तोड़ दे ,

मीठी वाणी ऐसी की मन को भी हर जाये ,
प्यार में हो तो झरने की तरह बहती जाये ,
अपराजिता, निडर, अति सहनशील है वह ,
निर्छल, निर्मल,प्यारी सी नारी है वह ,
नारी है तो ही नर का अस्तित्व है ,
वर्ना बताओ आप क्या उनका महत्व है ,
माँ है बेटी है पत्नी है यह नारी ,
हर रूप में नारी महान 
और आदरणीय है नारी |

*सविता मिश्रा

श्रीमती हीरा देवी और पिता श्री शेषमणि तिवारी की चार बेटो में अकेली बिटिया हैं हम | पिता की पुलिस की नौकरी के कारन बंजारों की तरह भटकना पड़ा | अंत में इलाहाबाद में स्थायी निवास बना | अब वर्तमान में आगरा में अपना पड़ाव हैं क्योकि पति देवेन्द्र नाथ मिश्र भी उसी विभाग से सम्बध्द हैं | हम साधारण गृहणी हैं जो मन में भाव घुमड़ते है उन्हें कलम बद्द्ध कर लेते है| क्योकि वह विचार जब तक बोले, लिखे ना दिमाग में उथलपुथल मचाते रहते हैं | बस कह लीजिये लिखना हमारा शौक है| जहाँ तक याद है कक्षा ६-७ से लिखना आरम्भ हुआ ...पर शादी के बाद पति के कहने पर सारे ढूढ कर एक डायरी में लिखे | बीच में दस साल लगभग लिखना छोड़ भी दिए थे क्योकि बच्चे और पति में ही समय खो सा गया था | पहली कविता पति जहाँ नौकरी करते थे वहीं की पत्रिका में छपी| छपने पर लगा सच में कलम चलती है तो थोड़ा और लिखने के प्रति सचेत हो गये थे| दूबारा लेखनी पकड़ने में सबसे बड़ा योगदान फेसबुक का हैं| फिर यहाँ कई पत्रिका -बेब पत्रिका अंजुम, करुणावती, युवा सुघोष, इण्डिया हेल्पलाइन, मनमीत, रचनाकार और अवधि समाचार में छपा....|