कविता

करो न आहट

करो न आहट धडकनों

टुकड़े दिल के जुड़ रहे हैं

करो न आहट आहों

बहते आंसू सूख रहे हैं

करो न आरज़ू कोई

बिखरा अक्स बन रहा है

करो न फरियाद कोई

होगा न कोई मोल तेरा

साँसे छुटने से पहले

है अदा यही ज़िन्दगी की

खोने के बाद ही चीज़

बेशकीमती हो जाती है

ऐ दिल संभल जा

नए दर्द ने दी है दस्तक फिर है

ऐ पलकों संभल जाओ

थामना होगा आंसूओं को फिर ||

मीनाक्षी सुकुमारन

 

मीनाक्षी सुकुमारन

नाम : श्रीमती मीनाक्षी सुकुमारन जन्मतिथि : 18 सितंबर पता : डी 214 रेल नगर प्लाट न . 1 सेक्टर 50 नॉएडा ( यू.पी) शिक्षा : एम ए ( अंग्रेज़ी) & एम ए (हिन्दी) मेरे बारे में : मुझे कविता लिखना व् पुराने गीत ,ग़ज़ल सुनना बेहद पसंद है | विभिन्न अख़बारों में व् विशेष रूप से राष्टीय सहारा ,sunday मेल में निरंतर लेख, साक्षात्कार आदि समय समय पर प्रकशित होते रहे हैं और आकाशवाणी (युववाणी ) पर भी सक्रिय रूप से अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत करते रहे हैं | हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रहों .....”अपने - अपने सपने , “अपना – अपना आसमान “ “अपनी –अपनी धरती “ व् “ निर्झरिका “ में कवितायेँ प्रकाशित | अखण्ड भारत पत्रिका : रानी लक्ष्मीबाई विशेषांक में भी कविता प्रकाशित| कनाडा से प्रकाशित इ मेल पत्रिका में भी कवितायेँ प्रकाशित | हाल ही में भाषा सहोदरी द्वारा "साँझा काव्य संग्रह" में भी कवितायेँ प्रकाशित |

2 thoughts on “करो न आहट

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    बहुत अच्छी कविता .

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत ख़ूब

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