कविता

हिन्दुस्तान का पहचान : हिन्दी

हिंदी हमारी शान है हिंदी हमारी जान
हमारा हिंदुस्तान का हिंदी है पहचान

शिष्टता और सम्मान का हिंदी पाठ पढ़ाती है
प्राचीन भाषा संस्कृत की खुशबू ये लाती है
सभ्यता-संस्कृति का भी देती है ज्ञान
हमारा हिंदुस्तान का हिंदी है पहचान

माँ की गोद में सिखे हिंदी इसे सुनकर पले-बढ़े
इस भाषा में मजबूती लाकर आओ अपना देश गढ़ें
अंग्रेजी का बढ़ता काल इसकी ले लेगी प्राण
हमारा हिंदुस्तान का हिंदी है पहचान

हमारे महापुरुषों ने भी हिंदी को ही मान दिया
मातृभाषा के रुप में हिंदी का ही नाम दिया
अंग्रेजों की भाषा बोलने में क्यों समझते हो शान
हमारा हिंदुस्तान का हिंदी है पहचान

दुनिया के हर दिल में हिंदी की क्रांति लायेंगे
राष्ट्रीय से इसे अंतरराष्ट्रीय भाषा बनायेंगे
हिंदी-हिंदु-हिंदुस्तान फिर करेंगे एलान
हमारा हिंदुस्तान का हिंदी है पहचान

___ दीपिका कुमारी दीप्ति

दीपिका कुमारी दीप्ति

मैं दीपिका दीप्ति हूँ बैजनाथ यादव की नंदनी, मध्य वर्ग में जन्मी हूँ माँ है विन्ध्यावाशनी, पटना की निवासी हूँ पी.जी. की विधार्थी। लेखनी को मैंने बनाया अपना साथी ।। दीप जैसा जलकर तमस मिटाने का अरमान है, ईमानदारी और खुद्दारी ही अपनी पहचान है, चरित्र मेरी पूंजी है रचनाएँ मेरी थाती। लेखनी को मैंने बनाया अपना साथी।। दिल की बात स्याही में समेटती मेरी कलम, शब्दों का श्रृंगार कर बनाती है दुल्हन, तमन्ना है लेखनी मेरी पाये जग में ख्याति । लेखनी को मैंने बनाया अपना साथी ।।

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